Explained: कनाडा के लोगों को मक्खन से आखिर क्या शिकायत हो रही है?

कनाडा में इन दिनों मक्खन को लेकर बवाल मचा हुआ है- सांकेतिक फोटो (pixabay)

कनाडा में इन दिनों मक्खन को लेकर बवाल मचा हुआ है- सांकेतिक फोटो (pixabay)

साल 2020 में लॉकडाउन के दौरान कनाडा (Canada) में मक्खन की मांग में 12% बढ़त हुई. इसके साथ ही वहां मक्खन की गुणवत्ता में फर्क आ गया. इसके बाद से स्थानीय मीडिया इसे बटरगेट (Buttergate) कह रहा है.

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कनाडा में इन दिनों मक्खन को लेकर बवाल मचा हुआ है. कनाडियन जनता को संदेह है कि डेयरी उत्पादक गायों के खाने में मिलावट कर रहे हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा मक्खन तैयार हो सके. इससे बटर की क्वालिटी खराब होती जा रही है. बटर जैसी सामान्य चीज को लेकर वहां लोगों का गुस्सा मीडिया की रिपोर्टिंग में भी दिख रहा है. इसे बटरगेट कांड तक कहा जा रहा है.

मक्खन को लेकर परेशान कनाडा 

एक तरफ दुनिया कोरोना वायरस से त्रस्त है तो दूसरी ओर कई देश अपनी अलग ही समस्याओं से दो-चार हो रहे हैं. कनाडियन लोगों में मक्खन को लेकर शिकायत इसी श्रेणी में है. वे परेशान हैं कि मक्खन को कमरे के तापमान पर रखने पर भी वो नर्म नहीं पड़ रही और उसका स्वाद भी उतना बढ़िया नहीं रहा. अंदेशा जताया जा रहा है कि गायों की डाइट में कोई ऐसा बदलाव हुआ है, जिसका असर बटर पर हुआ है. कुछ का ये भी मानना है कि गायों को ताड़ का तेल दिया जा रहा है ताकि उनके दूध से ज्यादा से ज्यादा बटर तैयार हो सके.

ज्यादा बटर की जरूरत क्यों?
दरअसल साल 2020 में पूरी दुनिया की तरह कनाडा भी कोरोना संक्रमण की चपेट में था. इस दौरान वहां भी सख्त लॉकडाउन हुआ. घरों में बंद लोगों का खानेपीने की ओर रुझान बढ़ा. इसके साथ ही बटर की खपत तेजी से बढ़ी. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि बीते साल कनाडा में मक्खन की खपत में 12% से भी ज्यादा इजाफा हुआ.

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बीते साल कनाडा में मक्खन की खपत में 12% से भी ज्यादा इजाफा हुआ- सांकेतिक फोटो (pixabay)

गायों की डायट में बदलाव 



मांग बढ़ने के कारण डेयरी उत्पादकों पर इसे पूरा करने का दबाव बढ़ा. ऐसे में एक कदम ये हो सकता था कि दूसरे देशों से बटर मंगवाया जाए लेकिन ऊंची कीमत और कोरोना से डर के चलते कनाडा ने ऐसा नहीं किया. तब मांग को पूरा करने के लिए उत्पादकों ने ये तरीका निकाला कि वे गायों की डायट में बदलाव करने लगे ताकि दूध से ज्यादा बटर तैयार हो सके.

बटरगेट क्या है और कैसे ये टर्म आया?

इसी साल की शुरुआत में मक्खन को लेकर शिकायतें तेज हो गईं. एक फूड राइटर जूली वान रोजेंन्दल ने ट्वीट किया कि उनके घर पर मक्खन कमरे के तापमान पर भी सख्त का सख्त है. रोजेंन्दल साल 2020 से ही बटर में ये बदलाव देख रही थीं और पाया कि ये बदलाव उसके किसी खास ब्रांड तक सीमित नहीं, बल्कि एक साथ पूरे देश में मक्खन की गुणवत्ता बदल गई है.

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कथित तौर पर कनाडियन डेयरी उत्पादक गायों की डायट में बदलाव करने लगे ताकि ज्यादा बटर तैयार हो सके- सांकेतिक फोटो (pixabay)

मीडिया ने कहा बटरगेट 

इसके बाद कनाडियन लोगों ने भी ट्वीट कर यही बात कहनी शुरू कर दी. अनुमान लगा कि शायद गायों के खानपान में ताड़ का तेल शामिल करने से मक्खन की गुणवत्ता बदली है. इसके बाद मक्खनप्रेमी देश कनाडा में मामला इतना उछला कि मीडिया ने इसे वॉटरगेट की तर्ज पर बटरगेट नाम दे दिया. बता दें कि वॉटरगेट कांड अमेरिका में वो स्कैंडल है, जिसके कारण साल 1973 में महाभियोग चलने पर अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन को इस्तीफा देना पड़ा था. ये स्कैंडल फोन टैपिंग से संबंधित था और खाने से इसका कोई लेना-देना नहीं था.

शुरू हो चुकी जांच 

अब कनाडा में बटर से जुड़ा ये मामला इतना उछल चुका है कि इसमें खुद डेयरी फार्मर्स ऑफ कनाडा संस्थान को दखल देना पड़ा. ये संस्था किसानों और डेयरी उत्पादकों से जुड़ी है. शिकायतों को लेकर उसका कहना है कि वो पूरे मामले की जांच करेगी और पता लगाएगी कि बीते साल से अब तक आखिर मक्खन की गुणवत्ता में बदलाव क्यों आया.

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ताड़ के बीजों से तैयार तेल की दुनियाभर में खूब मांग है- सांकेतिक फोटो (pixabay)

क्या है ताड़ का तेल?

डेयरी उत्पादकों पर गायों के खाने में ताड़ का तेल मिलाने की शिकायत हो रही है. इस बीच ये जानना दिलचस्प होगा कि आखिर ताड़ का तेल क्या है और कहां इस्तेमाल आता है. ये एक तरह का वनस्पति तेल है, जो दुनिया के कई देशों में काफी पसंद किया जाता है. बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत भी सालाना लगभग 90 लाख टन पाम ऑयल का आयात करता है.

इसलिए होता है उपयोग 

ताड़ के पेड़ के बीजों से तैयार होने वाले इस तेल में कोई गंध नहीं होती है इसलिए भी इसका इस्तेमाल खूब होता है. इस तेल में सैचुरेटेड फैट काफी ज्यादा होता है. यही कारण है कि किसानों पर संदेह जताया जा रहा है कि वे गायों के खाने में इसे मिला रहे हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा बटर उत्पादन हो सके.

पाम ऑइल पर कनाडियन्स को इतना एतराज क्यों?

तो यहां सवाल केवल बटर के सख्त या कम स्वादिष्ट होने का नहीं, बल्कि ये भी है कि इससे सेहत को कई नुकसान होते हैं. इस तेल में फैट काफी ज्यादा मात्रा में होता है, जिससे दिल से लेकर किडनी की सेहत पर बुरा असर होता है.

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