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नागरिकता कानून लागू करने से क्या मना सकता है कोई राज्य? जानें क्या कहता है संविधान

Vivek Anand | News18Hindi
Updated: December 14, 2019, 11:31 AM IST
नागरिकता कानून लागू करने से क्या मना सकता है कोई राज्य? जानें क्या कहता है संविधान
गैरबीजेपी शासित राज्य नागरिकता कानून का विरोध कर रहे हैं

कई गैरबीजेपी शासित राज्य (Non BJP ruled States) के मुख्यमंत्रियों (Chief Ministers) ने ऐलान किया है कि वो अपने राज्य में नया नागरिकता कानून (Citizenship Act) को लागू नहीं होने देंगे. सवाल है कि क्या वो ऐसा कर सकते हैं?

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  • Last Updated: December 14, 2019, 11:31 AM IST
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नागरिकता संशोधन बिल (Citizenship Amendment Bill) पर राष्ट्रपति की मुहर लगते ही ये कानून बन चुका है. अब इस कानून को नोटिफाई कर पूरे देश में लागू किया जाएगा. लेकिन कानून बन जाने के बाद भी सिटीजनशिप एक्ट (Citizenship Act) का विरोध कम नहीं हो रहा है. नॉर्थ ईस्ट राज्यों (North East States) में इस एक्ट के विरोध में हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. असम (Assam) में स्थितियां बेकाबू हो गई हैं. दूसरे राज्यों में भी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. खासकर गैरबीजेपी शासित राज्य नए नागरिकता कानून का जोरदार विरोध कर रहे हैं.

कई गैरबीजेपी शासित राज्य के मुख्यमंत्रियों ने ऐलान किया है कि वो अपने राज्य में इस कानून को लागू नहीं होने देंगे. सवाल है कि क्या वो ऐसा कर सकते हैं? क्या राज्यों के पास ये अधिकार है कि वो केंद्र के बनाए कानून को अपने यहां लागू होने से रोक दें? इस बारे में संविधान में क्या व्यवस्था है?

नागरिकता कानून पर गैरबीजेपी शासित राज्य के मुख्यमंत्रियों का विरोध
पश्चिम बंगाल, केरल और पंजाब के मुख्यमंत्रियों ने कहा है कि वो अपने यहां नागरिकता संशोधन कानून को लागू नहीं होने देंगे. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सरकारों ने भी अपने यहां नया नागरिकता कानून नहीं लागू करने की बात कही है. इन्होंने आधिकारिक ऐलान तो नहीं किया है लेकिन कहा गया है कि वो कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के स्टैंड के मुताबिक ही एक्ट का विरोध करेंगे.

इसी तरह से महाराष्ट्र में शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा है नया एक्ट संविधान का उल्लंघन करता है. उनका कहना है कि राज्य में इसे लागू करने या न करने का फैसला मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे लेंगे, जबकि महाराष्ट्र में सरकार में साझीदार कांग्रेस पार्टी के नेताओं का कहना है कि वो राज्य में नया नागरिकता कानून लागू नहीं होने देंगे.

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ममता बनर्जी 16 दिसंबर को नागरिकता कानून के विरोध में रैली करने वाली हैं


पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बिल के पास होने से पहले ही इसका विरोध किया था. बनर्जी ने शुक्रवार को भी कहा कि वो राज्य में इसे लागू नहीं होने देंगी. ममता बनर्जी नए कानून के खिलाफ 16 दिसंबर को कोलकाता में बड़ी रैली करने वाली हैं. केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि नया कानून असंवैधानिक है. ये धर्म के आधार पर भेदभाव फैलाने वाला है, जिसकी इजाजत संविधान कतई नहीं देता. पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा है कि पंजाब विधानसभा नए कानून को राज्य में लागू करने से रोक देगी. ये संविधान के खिलाफ है.गैरशासित बीजेपी के मुख्यमंत्रियों के ये बयान भ्रामक हैं. मुख्यमंत्री सिटीजनशिप एक्ट का राजनीतिक विरोध कर सकते हैं लेकिन उनके पास इतना अधिकार नहीं है कि वो राज्य में इसे लागू करने से रोक सकें. हकीकत ये है कि कोई भी राज्य केंद्र के बनाए कानून को अपने यहां लागू होने से नहीं रोक सकता. गृहमंत्रालय की तरफ से भी कहा गया है कि कोई भी राज्य अपने यहां केंद्र के बनाए कानून (जो केंद्र की लिस्ट में आते हैं) को अपने यहां लागू करने से नहीं रोक सकते हैं.

इस बारे में क्या है संविधान में व्यवस्था?
इस बारे में संविधान की सातवीं अनुसूची में व्यवस्था दी गई है. दरअसल संविधान की सातवीं अनुसूची में केंद्र और राज्यों की ताकत का बंटवारा किया गया है. भारत के संघीय ढांचे में राज्यों के पास भी अधिकार हैं, लेकिन केंद्रीय लिस्ट वाले अधिकार में वो दखल नहीं दे सकते.

संविधान ने अलग-अलग विषयों पर केंद्र और राज्यों को अधिकार सौंपे हैं. इसमें केंद्रीय लिस्ट में ऐसे 100 विषय हैं, जिनपर कानून बनाने का अधिकार केंद्र सरकार को दिया गया है. इसी तरह से राज्यों की लिस्ट में ऐसे 52 विषय हैं, जिसपर कानून बनाने का अधिकार राज्यों को दिया गया है. इसी तरह से कुछ विषय समवर्ती सूची में रखे गए हैं. जिनपर कानून बनाने का अधिकार केंद्र और राज्य दोनों के पास है.

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नागरिकता कानून का विरोध


केंद्र के कानून को लागू होने से नहीं रोक सकते राज्य
नागरिकता का विषय केंद्र के अंतर्गत आता है, इसलिए इसपर कानून बनाने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है. नागरिकता पर बनाए केंद्र सरकार के कानून को राज्य अपने यहां लागू करने से मना नहीं कर सकते. नागरिकता के कानून देश के सभी हिस्सों में एकसमान रूप से लागू होंगे. रक्षा नीति, विदेश नीति, संचार नीति और रेलवे जैसे विषयों के साथ नागरिकता एक ऐसा विषय है, जिसपर कानून बनाने का अधिकार सिर्फ केंद्र के पास है. राज्य केंद्र के बनाए कानून को मानने को बाध्य होंगे.

राज्य सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मामलों पर अपने कानून बना सकती है और उसे अपना यहां लागू करवा सकती है. इस तरह से करीब 52 विषयों पर वो कानून बनाकर लागू करवा सकती है. राज्यों को क्षेत्रीय हितों का ख्याल रखने वाले विषयों पर कानून बनाने के अधिकार मिले हुए हैं.

इसी तरह से समवर्ती सूची में शामिल विषयों पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं. हालांकि केंद्र के बनाया कानून राज्य के बनाए कानून से ज्यादा प्रभावी होगा. क्रिमिनल लॉ और फैमिली प्लानिंग जैसे मामले समवर्ती सूची में रखे गए हैं. इस पर कानून बनाने का अधिकार केंद्र और राज्य दोनों को है.

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First published: December 14, 2019, 10:04 AM IST
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