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लॉकडाउन के दौरान नेपाल में क्यों बढ़ गए हैं बाल विवाह?

News18Hindi
Updated: May 21, 2020, 11:00 PM IST
लॉकडाउन के दौरान नेपाल में क्यों बढ़ गए हैं बाल विवाह?
नेपाल में तीन महीने से चल रहे लॉकडाउन के दौरान बाल विवाह के मामलों में तेजी आई है. (प्रतीकात्मक तस्वीर/यूट्यूब से साभार)

नेपाल (Nepal) पहले भी बाल विवाह (Child Marriages) की कुरीति से जूझता रहा है. नेपाल में बड़ी संख्या में लड़कियों को स्कूल के बीच में ही पढ़ाई छोडनी पड़ती है. इसमें सुधार के लिए लंबे समय तक सरकारी अभियान चलाए गए हैं.

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कोरोना वायरस की वजह से नेपाल में चल रहे लॉकडाउन के बीच एक कुरीति ने दोबारा पैर पसारने शुरू कर दिए हैं. दरअसल नेपाल में लॉकडाउन के दौरान बाल विवाह के मामलों में तेजी आई है. गौरतलब है कि नेपाल पहले भी इस कुरीति से जूझता रहा है. नेपाल में बड़ी संख्या में लड़कियों को स्कूल के बीच में ही पढ़ाई छोडनी पड़ती है. इसे ठीक करने के लिए लंबे समय तक सरकारी अभियान चलाए गए हैं. लेकिन अब तीन महीने से चल रहे लॉकडाउन के बीच एक बार फिर ये भय पैदा हो गया है कि लड़कियों की पढ़ाई में बाधा पहुंचेगी.

आईं कई रिपोर्ट्स
इस बीच रिपोर्ट्स आई हैं कि देश में बाल विवाह और लड़कियों की तस्करी के मामलों में तेजी आई है. अब ये डर जाहिर किया जा रहा है कि लड़कियों की पढ़ाई को लेकर की गई वर्षों की मेहनत बर्बाद हो सकती है. हाल ही में एक लड़की लॉकडाउन के दौरान गायब हो गई थी. वो अभी कक्षा 9 की छात्रा है. उसके माता-पिता ने इसकी रिपोर्ट भी नहीं लिखवाई. माना जा रहा है कि मां-बाप ने लोगों से ये बात छुपाई. नेपाल में लड़कियों की शिक्षा के लिए काम करने वाले एनजीओ रूम टू रोड की शकुंतला चौधरी का कहना है कि ये लड़की उस ग्रुप का हिस्सा थी, जिसे उनकी संस्था पढ़ाने में मदद करती है.





पुरानी परंपरा की वजह से चुप हैं परिवार


कक्षा 9 में ही पढ़ने वाली गुलेरिया की एक और लड़की भी गायब हुई है. कहा जा रहा है कि वो अपने सहपाठी के साथ गई है. उस लड़की के परिवार वालों ने भी केस नहीं दर्ज कराया. इस इलाके में लड़की के अपने मनपसंद लड़के के साथ चले जाने की प्रथा भी रही है. इस वजह से कोई ज्यादा शोर भी नहीं मचा. रूम टू रीड संस्था ने लॉकडाउन के दौरान बाल विवाह के मामलों में तेजी पाई है. लॉकडाउन की वजह से अब तक कई लड़कियां जो इस संस्था से संबंधित थीं, अपने मित्र के साथ चली गईं. क्योंकि नेपाल में कई जगह ऐसी प्रथा रही है, इस वजह से ये बड़ा मुद्दा भी नहीं बन रहा है.

वर्षों तक किए गए हैं प्रयास
कई बार जिस कुरीति को तोड़ने के लिए वर्षों तक प्रयास किए जाते हैं, वो किसी दूसरी विपत्ति की वजह से फिर सिर उठा लेती है. इस वक्त नेपाल में बाल विवाह के साथ भी कुछ ऐसा ही रहा है. नेपाल के बांके, बारडिया, तनाहू और नुवाकोट में सपोर्ट प्रोग्राम के जरिए चार हजार से ज्यादा लड़कियों पढ़ाई में मदद की जा रही थी. अब लॉकडाउन के दौरान रेडियो से डिस्टेंस लर्निंग के जरिए पढ़ाई कराने की कोशिश की जा रही है. लेकिन इन चार हजार लड़कियों में से 500 का अब कोई अता-पता नहीं है. शक जाहिर किया जा रहा है कि अब ये शायद ही अपनी पढ़ाई दोबारा पूरी कर पाएं.

अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर अशोक कुमार गुप्ता ने जारी किए आदेश.
कोरोना वायरस की वजह से हुए लॉकडाउन ने वर्षों की मेहनत बर्बाद कर दी है.


क्या कहता है मलाला फंड
अंतरराष्ट्रीय संस्था मलाला फंड के मुताबिक दुनियाभर के देशों में लॉकडाउन की वजह से सेकेंडरी एजुकेशन में करीब 1 करोड़ लड़कियों की पढ़ाई छूट सकती है. लेकिन नेपाल जैसे देश में इसका व्यापक असर हो रहा है. यूनेस्को के मुताबिक दुनियाभर के कुल छात्रों में तकरीबन 90 प्रतिशत लॉकडाउन की वजह से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. इनमें करीब 74 करोड़ लड़कियां/बच्चियां हैं.

पुलिसिया अनदेखी
नेपाल के बांके और बारडिया जिले में 14 से 17 साल की लड़कियों के घर से भागकर शादी करने के कई मामले सामने आए हैं. कहा जा रहा है कि पुलिस भी इन मामलों को रजिस्टर करने से परहेज कर रही है. लड़कियों की पढ़ाई को लेकर काम करने वाली संस्थाएं इसे पुलिसिया अनदेखी मान रही हैं. कहा जा रहा है कि पुलिस महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है.

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First published: May 21, 2020, 10:29 PM IST
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