क्यों सीमा पर एक दो नहीं बल्कि सैकड़ों गांव बना रहा है चीन

भारत-चीन (Indo-chaina) सीमा विवाद अभी पूरा नहीं सुलझा है, लेकिन चीन ने नियंत्रण रेखा (LAC) के पास अपने गांव (Village) बसाने की प्रक्रिया तेज कर दी है. (फाइल फोटो)

चीन (China) सुनियोजित कार्यक्रम के तहत भारत (India) के साथ वाली वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास बहुत सारे गांव (Village) बसा रहा है. भारत-चीन सीमा विवाद (Border dispute) के चलते अब इसमें तेजी भी दिख रही है.

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    भारत (India) और चीन (China) के बीच सीमा विवाद (Border Dispute) साल 1962 के युद्ध से जारी है. लेकिन पिछले साल लद्दाख में यह सीमा विवाद फिर सुर्खियों में छाया जब चीनी सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास लद्दाख के गलवान उसके आसपास के इलाके में घुस गई. तब से दोनों ही देशों की सेना आमने सामने खड़ी हो गईं और मामला बातचीत तक पहुंच गया जिसमें हाल ही में चीनी सेना के पीछे हटने से राहत मिली है. लेकिन चीन पिछले कई दशकों से एलएसी के बहुत ही पास के अपने नियंत्रण वाले इलाकों में गांव (Villages) बसा रहा है. इनकी बढ़ती संख्या भारत के लिए चिंता का विषय रही है.

    एक सुनियोजित कार्यक्रम
    चीन यह सबकुछ एक सुनियोजित कार्यक्रम के तहतकर रहा है जिससे उस जमीन पर भारत का दावा कमजोर हो सके जिसे उसने 1962 के युद्ध में हड़प लिया था. इस तरह के संकेत कई बार साफ तौर पर दिखाई दिए हैं. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का जियाओकांग सीमा ग्राम कार्यक्रम  मॉडल के तहत ये गांव बसाए जा रहे हैं.

    विकास कार्यक्रम लाने का वादा
    पिछले साल भारत और चीन डोकलाम विवाद के खत्म होने के बाद, जिनपिंग ने 19वीं पार्टी कॉन्ग्रेस के मौके पर दिए अपने भाषण में भी इस कार्यक्रम के संकेत देते हुए इन इलाकों को सीमा क्षेत्र और अल्पसंख्यक जैसे नामों से पुकारा और वहां सुरक्षा और स्थायित्व सुनिश्चित करने के लिए रक्षा बेहतर करने और विकास में तेजी लाने का वायदा किया.

    कितने गांव हैं इस कार्यक्रम में
    इतना ही नहीं पिछले ही बाद में स्थानीय चीन कम्पयुनिस्ट पार्टी यानी सीसीपी के तहत तिब्बत में जिआओकांग ग्राम कार्यक्रम शुरू किया गया है जिसके तहत 628 गांव को विकास किए जाने की बात की गई थी. ये सभी गांव भारत तिब्बत ‘सीमा’ पर स्थित हैं. ये गांव उत्तराखंड के नगारी सीमा और हिमाचल से अरुणाचल प्रदेश तक इलाके में मौजूद हैं. इन गावों में 62 हजार से ज्यादा घर हैं जो 21 हिमालय सीमा क्षेत्रों में हैं और यहां दो लाख चालीस हजार लोग रहते हैं.

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    भारत-चीन (Indo-chaina) सीमा को लेकर फिलहाल गलवान इलाके में तनाव बना हुआ है. (फाइल फोटो)


    साफ इरादा है सीसीपी का
    इन गांवों में खास तौर पर सीसीपी के वफादार लोगों को ही बसाया जा रहा है. साफ है कि इसका मकसद इन इलाकों में बीजींग का नियंत्रण बेहतर हो, ऐसा प्रयास है. सीसीपी ने गांवों के निर्माण या इनके उद्देश्यों को गोपनीय भी नहीं रखा है. उसका कहना है कि यह सीमा को मजबूत बनाने, उसे स्थायित्व देने के लिए केंद्रीय नीतियों को लागू करने के लिए है.

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    गतिविधियों की ऐसी मंशा भी
    ऐसा नहीं है कि चीन की यह मंशा हाल ही में बलवती हुई है. चीन लागातार ऐसा करता रहा है. साल 2018 में भी तिब्बत की पार्टी कमेटी के उप सचिव जुयांग यान ने सीमा के इलाके और सीमा सुरक्षा की मजबूती की बात दोहराई थी. चीनी सेना के समर्थन वाले चरवाहे भारतीय इलाकों में प्रवेश करते हैं. ऐसी घटनाएं भी कम नहीं होती. लेकिन गांवों का विकास इस तरह से किया जा रहा है कि जरूरत पड़ने पर इनका उपयोग निगारनी वाली  पोस्ट की तरह हो सके.

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    चीन (China) के राष्ट्रपति शी जिंनपिंग ने हाल ही में इन इलाकों में विकास कार्यों में तेजी दिखाई है. (File pic AP)


    और यह काम भी
    इस तरह इन गांवों के लोगो को चीनी सेना की आंख और कान कहा जाता है. यह पहली बार है कि चीन इस तरह से उन इलाकों में लोगों को बसाने की कोशिश कर रहा है जहां भारत और चीन दोनों का दावा है जबकि इस मुद्दे को सुलझाने के बजाय वह गलवान जैसे नए विवादों में भारत को उलझाता दिख रहा है. इतना ही नहीं लोगों को वहां बसने के लिए लुभावनी योजनाओं और सुविधाओं के विकास पर भी पूरा ध्यान दिया जा रहा है.

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    इन गावों में अधोसंरचना का विकास यूं तो लोगों के लिए बताया जा रहा है, लेकिन उसके विकास में पूरी तरह चीनी सेना की सुविधाओं और प्राथमिकताओं का ध्यान रखा जा रहा है. सैटेलाइट तस्वीरें साफ तौर पर बताती हैं कि गांव बसाने में चीन कितना आगे निकल गया है. वहीं एक चिंता की बात यह भी है कि चीन सीमा के पास भारतीय इलाकों में गांव खाली हो रहे हैं.

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