हांगकांग के साथ जबरदस्ती क्यों चीन को पड़ सकती है महंगी?

हांगकांग के साथ जबरदस्ती क्यों चीन को पड़ सकती है महंगी?
शी जिनपिंग के खिलाफ जाने वाले हर आवाज को दबा दिया जाता है.

हांगकांग (Hong-Kong) के लिए लाया गया चीन (China) का नया कानून काफी महंगा पड़ सकता है. दरअसल इस कानून के साथ चीन जिस दमन की शुरुआत करेगा वो आत्मघाती भी साबित हो सकता है. जानिए क्यों...

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अमेरिका की धमकियों के बावजूद चीन ने वो विवादित कानून पास कर ही दिया जिसे लेकर लगातार हांगकांग में विरोध जताया जा रहा था. इस विवादित राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के जरिए अब चीन हांगकांग में वो सबकुछ खुलेआम कर सकेगा, जिससे हांगकांग की लोकतांत्रिक आवाज हमेशा के लिए दबाई जा सके. हांगकांग के लोकतंत्र समर्थक एक्टिविस्ट्स का कहना है कि चीन का ये कानून एक लंबे अत्याचार और दमन की शुरुआत होगा. लेकिन चीन ने आलोचनाओं की परवाह नहीं की है. चीन ने ताकत के दम पर ये कानून बनाकर हांगकांग में इस नए अत्याचार की शुरुआत तो कर दी है लेकिन ये उसे बेहद महंगा भी पड़ सकता है.

चीन ने खोल रखे हैं कई फ्रंट
कोरोना वायरस से उबरने के बाद चीन ने दुनिया के कई देशों के खिलाफ एक साथ फ्रंट खोल रखा है. अमेरिका सहित कई पश्चिमी ताकतवर देशों के साथ उसकी जुबानी जंग जारी है, जिसने वैश्विक माहौल को गर्म कर रखा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन और पश्चिमी देशों के बीच कोरोना वायरस को लेकर लंबी रस्साकशी चल सकती है. इसमें चीन पर आर्थिक प्रतिबंध सबसे पहले सामने आ सकते हैं. अमेरिका ने इसकी शुरुआत भी कर दी है.

चीन ने हांगकांग को लेकर विवादित कानून पास कर दिया है.




अमेरिका अपने यहां से हजारों चीनी स्टूडेंट्स को उनके देश का रास्त वापस दिखा सकता है. माना जा रहा है कि ये अमेरिका की तरफ से चीन को दिया गया पहला झटका है. हालांकि हांगकांग के कानून पर तो अभी अमेरिका ने कोई कड़ी प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन माना जा रहा है बड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है. खुद चीन की तरफ से कहा जा रहा है कि अमेरिका संबंधों को दूसरे शीत युद्ध की तरफ धकेल रहा है. चीन दक्षिणी चीन सागर के विवादित टापुओं के विवाद में भी एक बार फिर जापान के साथ उलझने की तरफ है. चीन दक्षिणी चीन सागर में भी एक साथ कई देशों के निशाने पर आ सकता है.



उधर ताइवान दिन ब दिन चीन के सामने मजबूत होता जा रहा है. कोरोना वायरस को भी ताइवान ने अपने यहां बढ़ने नहीं दिया. इसे लेकर उसकी दुनियाभर में तारीफ हुई है. अमेरिका के साथ ताइवान के संबंध बेहद मजबूत हैं. चीन के साथ किसी भी अमेरिकी विवाद की स्थिति का सीधा फायदा ताइवान को मिलेगा. और ताइवान जितना मजबूत होगा, चीन के लिए मुश्किलें उतनी ही बढ़ेंगी.

माओ जेदॉन्ग


माओ के रास्ते पर बढ़ रहे शी जिनपिंग
शी जिनिपंग ने सत्ता में आने के बाद से भले दुनिया को बताया हो कि वो वो भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम उठा रहे हैं. लेकिन एक्सपर्ट्स का एक बड़ा वर्ग मानता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर चीन में विरोधियों को निपटाया जा रहा है. ये कुछ वैसा ही हो रहा है जैसा 1960 के दशक में चीन के सर्वोच्च नेता माओ जेदॉन्ग ने किया था. शी जिनपिंग भी खुद को चीन का सर्वाधिक शक्तिशाली नेता घोषित कर चुके हैं. वो शक्ति के केंद्र को बीते सालों में बिल्कुल समेटते चले गए हैं. चीन में शी जिनपिंग के खिलाफ आवाज उठाना अब बेहद मुश्किल है. लेकिन शी जिनपिंग ने ये सब करते हुए वैश्विक स्तर पर चीन की छवि कमजोर ही की है. पश्चिमी देशों के साथ उसकी जिसकी तरह की जुबानी जंग चल रही है अगर वो बढ़ेगी तो शी जिनपिंग प्रशासन की छवि सबसे बड़ी दिक्कतें पैदा करेगी. वैसे भी भ्रष्टाचार के खिलाफ चीनी कार्रवाई की पोल हाल ही में खुल गई है. द डिप्लोमैट में प्रकाशित एक स्टोरी के मुताबिक चीनी नेवी में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है.

कंपनियों के हटने से चीन को हो सकता है बड़ा नुकसान
कोरोना वायरस के बाद चीन से अब कई देश अपनी कंपनियां हटा रहे हैं. जापान ने तो इसकी शुरुआत भी कर दी है. कहा जा रहा है की चीन का मुख्य गुस्सा आर्थिक नुकसान को लेकर ही है. ऐसे में अगर दुनिया के कई ताकतवर देशों ने चीन से अपने उद्योग धंधे हटाने का फैसला किया तो उस पर दोहरी मार पड़ेगी. माना जा रहा है चीन से हटने वाली इन कंपनियों का फायदा भारत और ताइवान को सबसे ज्यादा हो सकता है.

प्रतीकात्मक तस्वीर


हांगकांग में तेज हो सकते हैं प्रदर्शन
यह सही है कि नए कानून के बाद चीन हांगकांग में ज्यादा ताकत का इस्तेमाल करेगा लेकिन लोकतंत्र समर्थक आंदोलन भी इस बीच ज्यादा तेज हो सकते हैं. ऐसे में अगर चीन ज्यादा कठोर कार्रवाई करेगा तो ये भी अतंरराष्ट्रीय मुद्दा बन सकता है. वैसे भी चीन ने हांगकांग के संबंध में उन सारी शर्तों को तोड़ दिया है जो उसने ब्रिटेन के वहां से हटने के दौरान की थी. ब्रिटेन भी इस मामले में मजबूत हस्तक्षेप कर सकता है. इसके पहले कोरोना वायरस के संदर्भ में भी ब्रिटेन की तरफ से कहा जा चुका है एक बार त्रासदी का समय निकल जाए, फिर चीन से हिसाब-किताब किया जाएगा.

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