आखिर क्यों चीन की बड़ी आबादी को पसंद हैं PM मोदी?

आखिर क्यों चीन की बड़ी आबादी को पसंद हैं PM मोदी?
हालिया सर्वे के मुताबिक 51 प्रतिशत चीनी मोदी सरकार को पसंद करते हैं

लद्दाख में भारत-चीन संघर्ष (India-China clash in Ladakh) में शहीद भारतीय सैनिकों को पूरा सम्मान मिलना भी चीनियों की अपनी सरकार से नाखुशी की वजह है. वहां शहीदों के आंकड़े छिपाए गए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 28, 2020, 11:34 AM IST
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भारत और चीन में लद्दाख सैन्य झड़प के बाद से तनाव गहराया हुआ है. इस बीच चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने अपने यहां एक सर्वे कराया. इसके नतीजे चौंकाने वाले रहे, जिसके मुताबिक 51 प्रतिशत चीनी मोदी सरकार को पसंद करते हैं, वहीं अपनी सरकार से नाखुश हैं. ताजा तनाव के बीच ये बात काफी दिलचस्प है. जानिए, क्यों चीन के लोगों को सरकारों की आपसी लड़ाई से खास फर्क नहीं पड़ रहा.

सबसे पहले तो जानते हैं, क्या कहता है सर्वे. ये सर्वे ग्लोबल टाइम्स ने चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ कंटेपररी इंटरनेशनल रिलेशन्स (CICIR) के साथ मिल कर किया. इसमें ये पता लगाने की कोशिश की गई कि आखिर सीमा पर तनाव का चीन की जनता के मन पर क्या असर पड़ा. अगस्त के दूसरे हफ्ते में हुए इस सर्वे में बीजिंग, शंघाई और वुहान समेत 10 बड़े शहरों के 2000 से ज्यादा लोगों से सवाल हुए. इसमें कई नतीजे निकलकर आए, जो चौंकाते हैं.

चीन के लोगों को सरकारों की आपसी लड़ाई से खास फर्क नहीं पड़ रहा (Photo-flickr)




इसमें सबसे पहला नतीजा तो ये था कि 51 प्रतिशत लोगों ने मोदी सरकार की तारीफ की. इसके उलट वे कम्युनिस्ट पार्टी से नाराज दिखे. हालांकि इसका दूसरा पक्ष भी दिखा. इसके मुताबिक चीन के लोग सीमा पर भारत के खिलाफ कार्रवाई को सही बताते दिखे. 70 फीसदी चीनी लोगों ने कहा कि भारत में चीन विरोधी सोच बहुत ज्‍यादा है. वहीं 30 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्‍हें लगता है कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच रिश्‍ते में सुधार आएगा.
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27 अगस्त की दोपहर तक ग्लोबल टाइम्स की वेबसाइट पर मोदी सरकार को चीनियों के पसंद करने वाली खबर थी लेकिन शाम को वो हिस्सा ही गायब कर दिया गया. हालांकि ट्वीट में अब भी वो हिस्सा बना हुआ है. चीनी जनता के मोदी सरकार को पसंद करने की बात की कई वजहें हो सकती हैं. इसमें एक सबसे बड़ी वजह जो दिख रही है, वो है गलवान घाटी में संघर्ष के दौरान शहीद भारतीय सैनिकों को पूरा सम्मान मिलना.

गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी (सांकेतिक फोटो)


बता दें कि 15 जून को गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी. इसमें भारत के 20 जवान शहीद हुए थे. इन सैनिकों को पूरे सम्मान से साथ अंतिम विदाई दी गई. भारतीय मीडिया भी शहीदों के सम्मान की खबरों से भरा रहा. दूसरी ओर चीन का मामला ही अलग था. माना जा रहा था कि वहां सैन्य संघर्ष में कई चीनी सैनिक मारे गए, जबकि कई गंभीर तौर पर घायल हुए. इसके बाद भी चीन की सरकार ने कभी घायल या मृत सैनिकों पर कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं दिया.

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बाद में ये खबर आने लगी कि चीन के लोग अपने मृत सैनिकों को गुमनामी में अंतिम विदा देने को बाध्य किए गए, ताकि इंटरनेशनल मीडिया में मारे गए सैनिकों का आंकड़ा सामने न आए. इसपर चीन की सोशल मीडिया में गुस्सा भी दिखता रहा. लोग मोदी सरकार के हवाले से कहते रहे कि वहां के शहीदों को कितना सम्मान मिलता है, जबकि चीन में छिपाने को कहा जाता है.

चीन से सैलानियों का भारत आना लगातार बढ़ रहा है, जो फिलहाल कोरोना के कारण बंद है (Photo-pixabay)


ये सवाल वहां लगातार उठता रहा कि भारत की तरफ से शहीद हुए सैनिकों की पूरी लिस्ट जारी की गई लेकिन चीन इसे लेकर पूरी तरह से खामोश क्यों है? माना जा रहा था कि अगर चीन के ज्यादा सैनिक मारे गए तो इससे उसकी कमजोरी दिखेगी. इससे चीन की जनता और सैन्य ताकत दोनों पर ही बुरा असर हो सकता है. फिलहाल कोरोना के कारण वैसे भी कम्युनिस्ट पार्टी पूरी दुनिया के निशाने पर है. ऐसे में कोई खतरा न लेने की बजाए उन्होंने सैनिकों का मामला दबा दिया. ये चीन के लोगों की सरकार से नाराजगी की बड़ी वजह दिख रही है.

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चाइना डेली की एक रिपोर्ट के मुताबिक इंटरनेशनल मीडिया में मोदी के छाए रहने के कारण भी चीन के लोग पहली बार भारत से ज्यादा परिचित महसूस कर रहे हैं. ये भी एक वजह हो सकती है कि वे मोदी के बारे में बुरी राय नहीं दे रहे.

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वैसे आम चीनी को सीमा पर सरकारी तनाव से खास सरोकार नहीं. इसकी एक वजह भारत में कई सारे लोकप्रिय टूरिस्ट डेस्टिनेशन होना भी है. चीन से सैलानी हर साल भारत और नेपाल विजिट करने आते हैं. Ctrip नाम की ऑनलाइन ट्रैवल चीनी कंपनी कहती है कि चीन से सैलानियों का भारत आना लगातार बढ़ रहा है, जो फिलहाल कोरोना से कारण बंद है. साल 2019 के जनवरी से सितंबर के बीच चीन के लोगों की भारत आने में दिलचस्पी में 70 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई.
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