खरमास में भी क्यों शपथ ले रहे हैं कांग्रेस के मुख्यमंत्री?

खरमास में भी क्यों शपथ ले रहे हैं कांग्रेस के मुख्यमंत्री?
सांकेतिक तस्वीर

माना जाता है कि खरमास में कोई शुभ काम नहीं करना चाहिए. लेकिन पंडितों का मानना है कि खरमास में भी कुछ लग्न शुभ होते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 17, 2018, 2:14 PM IST
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तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में जीत के बाद कांग्रेस के मुख्यमंत्री आज यानी 17 दिसंबर को शपथ ले रहे हैं. चूंकि उनके शपथ लेने के एक दिन पहले ही खरमास का महीना शुरू हो चुका है, लिहाजा ये सवाल भी हैं क्या उन्हें खरमास में शपथ लेनी चाहिए. भारतीय शास्त्रों में माना जाता है कि खरमास में कोई नया या शुभ काम नहीं करना चाहिए.

ये तो सबको मालूम है सभी ग्रह निश्चित समयावधि पर अपनी स्थिति बदलते रहते हैं. इसी प्रकार सूर्य भी राशि परिवर्तन करता है. 16 दिसंबर से खरमास शुरू हो रहा है.

शास्त्रों की मानें तो खरमास के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं होते. सबकुछ रुक जाता है. ये स्थिति 14 जनवरी तक जारी रहेगी. ऐसे में कांग्रेस के मुख्यमंत्री क्यों शपथ ले रहे हैं. ये एक बड़ा सवाल है. हालांकि जानकारों का मानना कुछ अलग है.



इस तरह होते हैं शुभ काम 



जाने माने ज्योतिषी अनिल कात्यान कहते हैं कि ये मानना उचित नहीं है कि खरमास खराब ही होते हैं. बल्कि खरमान लग्नि भी होते हैं. उसमें कुछ खास लग्न में शुभ काम होते रहे हैं.

इसी के अनुरुप कांग्रेस के मुख्यमंत्री भी शपथ ले रहे हैं. उन्होंने कहना है कि शपथ लेने से पहले कांग्रेस के नेताओं ने निश्चित तौर पर पंडितों से सलाह मश्विरा किया होगा. इसी वजह से वो आज शपथ ले रहे हैं.

सूर्य धनु राशि में प्रवेश करता है
16 दिसंबर को सूर्य ने धनु राशि में प्रवेश कर लिया है. इस स्थिति के बाद एक माह के लिए खरमास शुरू हो जाता है. ये स्थिति 16 दिसंबर रविवार को सुबह नौ बजकर आठ मिनट पर सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करते ही शुरू हो चुकी है.

Death Timing calculation and Astrology ज्योतिष मौत की भविष्यवाणी (Image Source: Pixabay.com and getty Images).
प्रतीकात्मक तस्वीर(Image Source: Pixabay.com and getty Images).


वैसे हमेशा से खर मास के बारे में माना जाता रहा है कि इस मास में विवाह, नूतन गृह प्रवेश, नया वाहन, भवन क्रय करना, मुंडन जैसे शुभ काम नहीं करने चाहिए. मान्यता ये भी रही है कि खरमास अशुद्ध मास होते हैं. 14 जनवरी 2019 को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ये मास खत्म हो जाएगा.

सूर्य की स्थिति क्या होती है
आचार्य रत्ना के अनुसार सूर्य जब गुरु की राशि धनु और मीन में प्रवेश करते हैं तो इससे गुरु निस्तेज हो जाता है, उसका प्रभाव समाप्त हो जाता है. जबकि शुभ कामों के लिए गुरु का मजबूत होना जरूरी है. लेकिन कई बार खर मास में भी कुछ लग्न ऐसे होते हैं जब नए काम या शुभ काम शुरू किए जा सकते हैं.

खर मास में क्या करें
खर मास के प्रतिनिधि आराध्य देव भगवान विष्णु हैं. इसलिए इस माह के दौरान भगवान विष्णु की पूजा नियमित रूप से करना चाहिए. खर मास में आने वाली दोनों एकादशियों का भी विशेष महत्व होता है. इनमें व्रत रखकर विधि-विधान से भगवान विष्णु का पूजन करने से समस्त सुखों की प्राप्ति होती है.



इस मास में प्रतिदिन स्नानादि से निवृत होकर भगवान विष्णु के मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम: का तुलसी की माला से एक माला जाप करना चाहिए. खरमास में भी पितृपक्ष की तरह पितृ पिंडदान का महत्व है.

क्या खरमास और मलमास में अंतर होता है
जिस तरह अंग्रेजी कैलेंडर में चार साल बाद लीप ईयर होता है, उसी तरह हिंदू कैलेंडर में भी तीन साल पर ऐसा काल आता है, तब अधिक दिनों को मलमास कहा जाता है. यह स्थिति 32 महीने और 16 दिन में होती है यानि लगभग हर तीन वर्ष बाद.

दो बार आता है खरमास
साल में दो बार सूर्य बृहस्पति की राशियों के संपर्क में आता है. पहले 15-16 दिसंबर से 14-15 जनवरी और दूसरा 14 मार्च से 13 अप्रैल. दूसरी बार में सूर्य मीन राशि में रहते हैं.

खरमास के पीछे है रोचक कहानी
खरमास नाम होने के पीछे एक रोचक काहानी है. खर मतलब खच्चर या गधा.ऐसी मान्यता है कि सूर्य अपने सातों घोड़ों के साथ घूम रहे थे, घूमते घूमते उनके घोड़े प्यास से व्‍याकुल हो गए.

रास्ते में उन्हें एक तालाब दिखा सूर्य अपने घोड़ों को पानी पिलाने लगे. पानी पीने के बाद घोड़े थकावट की वजह से अकड़ने लगे. तभी सूर्य को इस बात का स्मरण हुआ की सृष्टि के नियम के अनुसार उन्हें निरंतर ऊर्जावान होकर चलते रहने का निर्देश है.

सूर्य को तालाब के किनारे दो गधे दिखाई दिए. सूर्य देव ने शीघ्र उन गधो को रथ में जोता और वहां से चल दिए. इस तरह सूर्य देव पूरे महीने मंद गति से गधों की सवारी से चलते रहे. इस समय उनका तेज भी कम हो गया था. फिर मकर राशि में प्रवेश करते समय मतलब एक माह बाद उन्होंने अपने सातों घोड़ों की रथ की सवारी शुरू की.
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