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Explained: कोविशील्ड लगवाने के बाद आपकी यूरोप यात्रा क्यों मुश्किल ला सकती है?

यूरोप में वैक्सीन पासपोर्ट को EU डिजिटल कोविड सर्टिफिकेट कहा जा रहा है- सांकेतिक फोटो (moneycontrol)

यूरोप में वैक्सीन पासपोर्ट को EU डिजिटल कोविड सर्टिफिकेट कहा जा रहा है- सांकेतिक फोटो (moneycontrol)

यूरोपियन मेडिकल एजेंसी (EMA) अब वैक्सीन पासपोर्ट (vaccine passport EU) जारी कर रही है. इसमें जिन 4 वैक्सीन को मंजूरी मि ...अधिक पढ़ें

    टीकाकरण शुरू होने के साथ आखिरकार महीनों से बंद देशों की सीमाएं खुल रही हैं, लेकिन इसके लिए शर्त ये है कि लोगों को कोरोना वैक्सीन (coronavirus vaccine) की दोनों शॉट लग चुकी हो. हालांकि टीका ले चुके लोग अब भी निश्चिंत नहीं हो पा रहे. दरअसल यूरोपियन संघ ने जो पहली लिस्ट जारी की है, उसमें भारत की कोविशील्ड वैक्सीन को ग्रीन पास नहीं (Covishield has not been included in EU list of vaccine passport) मिला. यानी कोविशील्ड लगवाकर काम, पढ़ाई या सैर-सपाटे के लिए यूरोपियन देश जाने की सोच रहे लोगों को इसकी अनुमति नहीं.

    जारी होगा वैक्सीन पासपोर्ट 
    जिस वैक्सीन पासपोर्ट की साल 2020 से बात चल रही थी, वो दिखने लगा है. एक जुलाई से वो लोग यूरोपियन देशों में आ-जा सकते हैं, जिनका टीकाकरण हो चुका. खुद यूरोपियन मेडिकल एजेंसी (EMA) ने इसके लिए उन वैक्सीन्स की सूची बनाई है, जो लोगों को हरी झंडी देती है. लेकिन पेंच ये है कि लिस्ट में सीरम इंस्टीट्यूट की बनाई हुई कोविशील्ड का नाम गायब है. ऐसा क्यों है, ये समझने के लिए एक बार EU के वैक्सीन पासपोर्ट के बारे में जानना होगा.

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    सर्टिफिकेट डिजिटल रूप में होगा, जो ये बताएगा कि फलां व्यक्ति कोविड के लिए वैक्सीन के दोनों डोज ले चुका- सांकेतिक फोटो (pixabay)


    ये होंगे यूरोप यात्रा के कायदे 
    यूरोप में वैक्सीन पासपोर्ट को EU डिजिटल कोविड सर्टिफिकेट कहा जा रहा है. इसकी मदद से धीरे-धीरे देशों की सीमाएं, विदेशियों के लिए खोली जाएंगी. सर्टिफिकेट डिजिटल रूप में होगा, जो ये बताएगा कि फलां व्यक्ति कोविड के लिए वैक्सीन के दोनों डोज ले चुका है. या फिर उसे वायरल संक्रमण हुआ और अब वो कोरोना निगेटिव है. ये सर्टिफिकेट सारे ही यूरोपियन देशों में वैध होगा.

    क्या होगा सर्टिफिकेट में?
    ये एक डिजिटल पासपोर्ट ही होगा. इसमें नाम, जन्मतिथि, इंश्योरेंस की तारीख के अलावा ये बताया जाएगा कि कौन सी वैक्सीन ली गई है. या फिर कोरोना संक्रमण कब हुआ और कब उसका रिजल्ट निगेटिव आया. यूरोपियन देशों का प्रशासन इसकी जांच करेगा. साथ ही ये पासपोर्ट ई-हेल्थ पोर्टल से जारी होगा. सर्टिफिकेट में एक क्यूआर कोड भी होगा ताकि वो स्कैन हो सके और वैधता की जांच हो.

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    खास बात ये है कि सर्टिफिकेट के क्यूआर कोड में डिजिटल साइन भी होगा, जिसका डाटा हरेक यूरोपीय देश के पास होगा. ये तय करेगा कि कहीं भी कोई चूक न हो.

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    फ्रांस ने अपने यहां आइसोलेशन का कड़ा नियम बना दिया है- सांकेतिक फोटो


    जिनके पास ग्रीन पास न हो, वे क्या यूरोप नहीं जा सकते?
    ऐसा नहीं है. ग्रीन पास इसलिए जारी किया जा रहा है ताकि काफी वक्त से बंद पड़ी सीमाएं पूरी तरह से खोली जा सकें और संक्रमण के दोबारा खतरनाक होने का डर न हो. ग्रीन पास इसमें मदद करेगा. हालांकि जिनके पास ग्रीन पास न हो, वे भी यूरोप यात्रा कर सकेंगे, लेकिन उन्हें देश के क्वारंटाइन नियम को मानना होगा. साथ ही वे हर जगह नहीं जा सकेंगे.

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    फ्रांस में सख्त आइसोलेशन नियम 
    अगर कोई फ्रांस जाए तो उसे फ्लाइट में जाने से पहले RT-PCR रिपोर्ट देनी होगी. साथ ही फ्रांस पहुंचते ही दोबारा एयरपोर्ट पर ही जांच होगी. जिन्होंने वैक्सीन नहीं लगवाई है, उन्हें अनिवार्य तौर पर 10 दिन आइसोलेशन में रहना होगा, जिसकी जांच खुद फ्रेंच सुरक्षा बल करेगा.

    कौन सी वैक्सीन के लिए ग्रीन पास?
    EMA ने अबतक जिन 4 टीकों को मंजूरी दी है, उनमें कॉमिरनाटी (बायोटेक-फाइजर), मॉडर्ना, वैक्सजेवरिया (ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनिका) और जानसेन (जॉनसन एंड जॉनसन) शामिल हैं.

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    EMA ने अबतक 4 टीकों को मंजूरी दी है- सांकेतिक फोटो


    क्यों कोविशील्ड लिस्ट से बाहर?
    वैसे ध्यान दें तो पाएंगे कि कोविशील्ड ही नहीं, बल्कि भारत में मिल रही कोई भी वैक्सीन लिस्ट में नहीं. रूसी वैक्सीन स्पूतनिक-वी को भी ग्रीन पास नहीं मिला. हालांकि कोविशील्ड के ही दूसरे रूप वैक्सजेवरिया को मंजूरी मिली हुई है. बता दें कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका ने भारत में सीरम इंस्टिट्यूट के साथ मिल अपनी वैक्सीन को कोविशील्ड कहा, यही वैक्सीन यूरोप में वैक्सजेवरिया कहला रही है.

    इसे लिस्ट में शामिल न करने के पीछे EMA का अपना तर्क है
    उसका कहना है कि चूंकि कोविशील्ड को अबतक यूरोपियन संघ में बेचने की इजाजत नहीं मिली है, लिहाजा उसे ग्रीन पास में भी शामिल नहीं किया गया. बीबीसी की एक रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि सीरम इंस्टीट्यूट ने ही अब तक कोविशील्ड के लिए मंजूरी का आवेदन नहीं किया है.

    क्या कहता है सीरम इंस्टीट्यूट?
    इधर कोविशील्ड को मंजूरी न मिलने पर सीरम इंस्टीट्यूट के CEO अदार पूनावाला ने ट्वीट करके लोगों को आश्वस्त किया कि वे जल्द से जल्द इस मामले को सुलझाने की कोशिश करेंगे ताकि लोग बगैर मुश्किल यूरोप यात्रा कर सकें.

    Tags: Coronavirus vaccine india, Covaxin, Covishield vaccine, European union, France

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