Toolkit Case : कोर्ट ने क्यों दी अभिव्यक्ति-असहमति को दिशा? 10 अहम वजहें

कोर्ट से दिशा रवि को ज़मानत मिली.

कोर्ट से दिशा रवि को ज़मानत मिली.

कोई नागरिक सरकार से असहमत हो सकता है, अभिव्यक्ति और ग्लोबल ऑडियंस पाने की आज़ादी (Freedom of Expression) छीनी नहीं जा सकती, पुलिस के पास थ्योरीज़ तो हैं, सबूत नहीं... दिल्ली सेशन कोर्ट के अहम आदेश को समझें...

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 24, 2021, 9:27 AM IST
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किसान आंदोलन (Farmers' Protests) से जुड़े टूलकिट केस में दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के हाथों गिरफ्तार की गई 22 वर्षीय क्लाइमेट चेंज एक्टिविस्ट दिशा रवि को दिल्ली सेशन कोर्ट ने ज़मानत पर छोड़ते हुए कई अहम बातें कहीं. दिशा को बेल मिलने के दस अहम कारण आपको बताएंगे, उससे पहले याद दिला दें कि आंदोलन को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने और आंदोलन के दौरान ज़रूरी कदम उठाने के बारे में जानकारी देने वाले दस्तावेज़ (Google Document) को टूलकिट कहकर दिल्ली पुलिस ने दिशा के साथ ही निकिता जैकब (Nikita Jaicob) व शांतनु मुलुक (Shantanu Muluk) जैसे एक्टिविस्टों को भी जांच के घेरे में लिया.

सरकार से असहमति को जायज़ बताने वाले कोर्ट ने दिशा रवि को अच्छी खासी रकम के मुचलके पर ज़मानत दी. दिशा पर पुलिस ने सेक्शन 124A (राजद्रोह) और 153A यानी विभिन्न समूहों के बीच धर्म, नस्ल, जन्मस्थान, आवास या भाषा आदि के आधार पर नफरत फैलाने के आरोप लगाए थे. इस बारे में जज धर्मेंद्र राणा ने दिशा को ज़मानत देते हुए कारणों के तौर पर कुछ अहम बातें कीं. इन दस महत्वपूर्ण पॉइंट्स को जानिए.

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दिशा क्लाइमेट एक्टिविस्ट हैं और फ्राइडे फॉर फ्यूचर इंडिया संस्था की संस्थापक.

1. आसान शब्दों में समझें तो कोर्ट ने कहा कि किसी संदिग्ध पहचान वाले व्यक्ति के साथ किसी व्यक्ति के मामूली इंगेजमेंट को गंभीर अपराध नहीं ठहराया जाना चाहिए. अस्ल में पुलिस ने दिशा पर कथित आपत्तिजनक समूह 'पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन' के कुछ सदस्यों के साथ एक ज़ूम मीटिंग में शामिल होने का आरोप लगाया था. बकौल पुलिस करीब 70 लोगों की ग्रुप मीटिंग में दो खालिस्तान समर्थक संदिग्ध भी शामिल थे.

2. दिशा पर आरोप था कि टूलकिट से जुड़े उसके एक्शन के चलते 26 जनवरी को दिल्ली में हिंसा हुई. लेकिन कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि इस आरोप को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं था. कोर्ट ने देखा कि इस हिंसा मामले में सैकड़ों लोग गिरफ्तार किए गए लेकिन पुलिस इनके साथ दिशा के संबंध को साबित नहीं कर सकी.

3. कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि कृषि कानूनों का विरोध करते हुए किसी प्लेटफॉर्म पर कोई विचार शेयर करने का मतलब यह नहीं माना जा सकता कि व्यक्ति अलगाववादी है, जबकि कोई और सबूत न हो.

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4. कोर्ट के आदेश का महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि कोर्ट ने उस टूलकिट दस्तावेज़ को पेश करवाया और उसका अवलोकन करने के बाद कहा कि इस तरह के दस्तावेज़ से किसी हिंसा की साज़िश रचे जाने की थ्योरी साबित नहीं होती.

5. कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में नागरिक सरकार के लिए एक तरह से चेतना के पहरेदार होते हैं. किसी नागरिक को सिर्फ इसलिए सलाखों के पीछे नहीं रखा जा सकता क्योंकि वह सरकार की नीतियों से सहमत नहीं है. कोर्ट ने ज़ोर दिया कि 'जागरूक नागरिक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए ज़रूरी' होते हैं.

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दिशा की रिहाई के लिए प्रदर्शन करते लोग.


6. आ नो भदाः कतवो यनतु ​विश्वतोऽदबधासो अपरीतास इददः... अर्थात उत्तम विचार हर दिशा से आने दो. ऋग्वेद का यह श्लोक कोट करते हुए कोर्ट ने कहा कि भारतीय सभ्यता में अलग अलग विचारों के लिए सम्मान रहा है. सबको अपना मत रखने का अधिकार हमारी संस्कृति देती रही है.

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7. कोर्ट ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने हमें अभिव्यक्ति की आज़ादी का मूलभूत अधिकार दिया है. कोर्ट के शब्दों में 'भारत के संविधान के आर्टिकल 19 में असहमति का अधिकार मज़बूती से दर्ज है.' इस पहलू पर बात करते हुए कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस अधिकार के दायरे में कोई भी व्यक्ति कानून के दायरे को न तोड़ते हुए दुनिया में जिससे चाहे, उस तक अभिव्यक्ति पहुंचा सकता है.

8. दिशा पर पुलिस ने आरोप लगाए कि किसान स्ट्राइक संबंधी एक वॉट्सएप ग्रुप बनाया, चैट डिलीट कर दी, इसमें दिशा ने शांतुन के साथ ही ग्रेटा थनबर्ग जैसे विदेशियों को भी जोड़ा ताकि दिल्ली में हिंसा नियोजित ढंग से हो सके. इस पर कोर्ट ने कहा कि कोई वॉट्सएप ग्रुप बनाना या किसी नुकसान न पहुंचाने वाले दस्तावेज़ को एडिट/शेयर करना कोई अपराध नहीं है. शांतनु की बात पर कहा कि विरोध प्रदर्शन की इजाज़त दिल्ली पुलिस ने ही दी थी, इसलिए इसमें किसी व्यक्ति के शामिल होने से कानून कैसे टूटा.

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9. पुलिस का आरोप था कि दिशा ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन की आड़ में न केवल भारतीय दूतावासों पर तोड़ फोड़ करने का मकसद रखा बल्कि योग और चाय जैसे भारतीय प्रतीकों का अपमान भी किया. इस बारे में कोर्ट ने कहा कि इस आरोप से जुड़ा सबूत अदालत के सामने पेश नहीं किया गया. कोर्ट के मुताबिक दूतावास में तोड़ फोड़ की थ्योरी पेश किए गए तथ्यों या सबूतों से साबित नहीं हुई.

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शांतनु मुलुक, दिशा रवि और निकिता जैकब


10. कोर्ट ने माना कि इतने कम और अधूरे सबूतों के आधार पर कोई अपराध साबित नहीं किया जा सकता. दिशा को पहले ही पुलिस कस्टडी में रखकर पांच दिन पूछताछ की जा चुकी है इसलिए उसे और अंकुश में रखना न तो तार्किक है और न ही कानूनी.
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