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Delhi Police Protest: आखिर वकीलों के खिलाफ लड़ाई में दिल्ली के पुलिसवाले क्यों कर रहे किरण बेदी को याद

News18Hindi
Updated: November 5, 2019, 3:21 PM IST
Delhi Police Protest: आखिर वकीलों के खिलाफ लड़ाई में दिल्ली के पुलिसवाले क्यों कर रहे किरण बेदी को याद
प्रदर्शन करती दिल्ली पुलिस

Delhi Police Vs Lawyers: दिल्ली पुलिस (Delhi Police) हेडक्वॉर्टर के पास पुलिसकर्मियों की भीड़ नारे लगा रही थी- पुलिस कमिश्नर कैसा हो किरण बेदी (Kiran Bedi) जैसा हो...

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  • Last Updated: November 5, 2019, 3:21 PM IST
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दिल्ली पुलिस कमिश्नर (Delhi Police Commissioner) अमूल्य पटनायक (Amulya Patnaik) को अपने ही पुलिसकर्मियों के विरोध का सामना करना पड़ा. मंगलवार को हजारों पुलिसकर्मी दिल्ली के पुलिस हेडक्वॉर्टर पहुंच गए. पुलिसवाले नारे लगा रहे थे- पुलिस कमिश्नर कैसा हो, किरण बेदी (Kiran Bedi) जैसा हो. इन्होंने अपने हाथों में तख्तियां ले रखी थीं, जिसमें लिखा था- मैडम वी नीड यू.

दिल्ली आईटीओ के पास पुलिस हेडक्वॉर्टर पर जमा हुए पुलिस वाले कह रहे थे कि उन्हें किरण बेदी जैसा पुलिस कमिश्नर चाहिए. पुलिस कमिश्नर को नाराज पुलिसवालों को मनाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही थी.

पुलिस फोर्स में ऐसे नजारे कम ही दिखने को मिलते हैं, जब पुलिसकर्मी अपने ही सीनियर से नाराज दिखते हों. पुलिसवालों और वकीलों के बीच तीसहजारी कोर्ट में झड़प के बाद मामले को जिस तरह से लिया गया, उससे अपने सीनियर अधिकारियों से पुलिसवाले नाराज हैं.

पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक के सामने पुलिसवाले नारे लगाते रहे- हमें इंसाफ चाहिए. अमूल्य पटनायक बार-बार उन्हें शांत रहने की अपील करते दिखे. जब कहा गया कि पुलिसवालों को अनुशासित रहना चाहिए और उन्हें ज्यूडिशियल इंक्वॉयरी का इंतजार करना चाहिए, तो वो एक बार फिर किरण बेदी के नाम के नारे लगाने लगे.


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31 साल पुराने मामले से जुड़ा है किरण बेदी का नाम
पुलिसवालों के किरणबेदी को लेकर नारे लगाने के पीछे 31 साल पुराना एक ऐसा ही मामला है. एक ऐसे ही मामले में वकीलों के साथ किरण बेदी ने सख्ती दिखाई थी. 1988 में किरण बेदी के नॉर्थ दिल्ली के डिप्टी कमिश्नर रहते हुए एक ऐसा ही वाकया पेश आया था.

दिल्ली में जनवरी 1988 में वकील और पुलिसवाले आपस में भिड़ गए थे. दरअसल चोरी के एक मामले में एक वकील की गिरफ्तारी हुई थी. तीसहजारी कोर्ट से वकील को हथकड़ी पहनाकर पुलिस ले गई थी. इसी बात पर तीसहजारी कोर्ट के वकील धरने पर चले गए. उनका कहना था कि एक वकील को इस तरह हथकड़ी पहनाकर पुलिस नहीं ले जा सकती.

Why did the delhi Police chant Police commissioner kaisa ho kiran bedi jaisa ho
दिल्ली पुलिसकर्मी पोस्टर बैनर लेकर प्रदर्शन कर रहे थे


पूरे देश के वकीलों ने इसका विरोध किया. दो जगह हिंसक झड़प भी हुई. वकीलों ने आरोप लगाया कि किरण बेदी ने उनपर हमले करवाए. पहली झड़प किरण बेदी के दफ्तर के बाहर हुई थी, इसमें 18 वकील जख्मी हुए थे. 21 जनवरी को हुए इस झड़प में वकीलों का आरोप था कि पुलिसवालों ने उनपर हमला किया. जबकि किरण बेदी का कहना था कि पुलिसवालों ने उनके दफ्तर में तोड़फोड़ की, पुलिसवालों के कपड़े फाड़ देने की धमकी दी और उनके साथ गाली गलौच की. पुलिस को मजबूरन बल प्रयोग करना पड़ा.

17 फरवरी 1988 को हुए दूसरे मामले में वकीलों ने कहा कि करीब 3 हजार की भीड़ तीसहजारी कोर्ट पहुंच गई. भीड़ ने दंगा किया, वहां मौजूद गाड़ियों में तोड़फोड़ की और वकीलों के दफ्तर पर हमला बोल दिया. वकीलों का आरोप था कि भीड़ ने किरण बेदी के कहने पर हमला किया था, इसके पीछे किरण बेदी का दिमाग था. इस मामले की जांच के लिए दो जजों की एक बेंच बैठी. किरण बेदी के इसमें शामिल होने का कोई सबूत नहीं मिला.

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First published: November 5, 2019, 2:59 PM IST
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