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यहां ठिठुरन, वहां पसीना.. क्यों उत्तर और दक्षिण भारत में अलग है मौसम?

केरल के मुन्‍नार में गुरुवार को तापमान माइनस 2 डिग्री सेल्सियस यानी शून्‍य से 2 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज हुआ है.  (सांके‍ति‍क फोटो)

केरल के मुन्‍नार में गुरुवार को तापमान माइनस 2 डिग्री सेल्सियस यानी शून्‍य से 2 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज हुआ है. (सांके‍ति‍क फोटो)

एकदम उत्तर में बर्फबारी (Snowfall in North India) हो रही है तो थोड़ा नीचे शीतलहर (Cold Wave) चल रही है. एकदम दक्षिण तक पहुंचते तापमान वही है, जो हम एसी चलाकर रखना चाहते हैं. बेमौसम बारिश (Rainfall in Many States) के बीच जानिए तापमान में कितना फर्क है और क्यों?

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    दिल्ली में अधिकतम तापमान 14 डिग्री है तो श्रीनगर में 0°C वाली कड़ाके की ठंड है. उत्तर भारत में बर्फबारी हो रही है, लद्दाख में तापमान -12°C तक गिर चुका है और मध्य भारत तक इसका असर देखा जा रहा है. राजस्थान से लेकर मध्य प्रदेश तक शीतलहर चल रही है, जिसे बारिश जैसे मौसम ने और ठंडा कर दिया है. दूसरी तरफ, दक्षिण भारत के कई हिस्सों में तापमान काफी माकूल बना हुआ है. बेंगलूरु और चेन्नई में तापमान 25°C के आसपास बना हुआ है. आखिर क्यों उत्तर और दक्षिण के मौसम में इतना अंतर है?

    यह तकरीबन हर साल होता है कि कुछ समय के लिए उत्तर और दक्षिण भारत में एकदम उलट मौसम की स्थिति बनती है और अक्सर दोनों सिरों पर मौसम अलग तो बना ही रहता है. भौगोलिक स्थितियों के साथ ही प्राकृतिक संरचनाओं के कारण भी ऐसा होता है. नये साल 2021 की शुरूआत में दोनों क्षेत्रों में कॉमन यह है कि बारिश कई जगह हो रही है, इसके बावजूद तापमान में फर्क बना हुआ है.

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    क्या और कितना रहता है अंतर?
    पिछले साल मार्च के आसपास ये खबरें आई थीं कि उत्तर भारत में ठंड उतार पर थी, तो दक्षिण में गर्मी तेज़ हो गई थी और हीटवेव तक के अंदेशे बताए गए थे. इस मौसम में भी एक तरफ बर्फबारी है तो दूसरी तरफ पसीने बहने का मौसम बना हुआ है. इसे जानने के लिए पहले भूगोल को समझना ज़रूरी है.

    उत्तर भारत में गर्मियों का मौसम लंबा होता है यानी अप्रैल से अक्टूबर तक चलता है और इस दौरान तापमान कई हिस्सों में 45°C से भी ज़्यादा हो जाता है. वहीं, नवंबर से मार्च के बीच ठंड पड़ती है और एकदम उत्तर में -20°C तक तापमान चला जाता है. मध्य प्रदेश और आसपास के मध्य भारत क्षेत्र में हर मौसम शबाब पर रहता है. इसे बफर ज़ोन भी कहा जाता है, जहां सर्दी और गर्मी दोनों ही न तो कम होती हैं और न ही बहुत ज़्यादा.

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    मौसम विभाग के पोर्टल पर 5 जनवरी के इस सैटेलाइट चित्र में उत्तर में ठंड और दक्षिण में बारिश व अन्य हिस्सों में बादलों की स्थिति दिख रही है.


    इससे अलग दक्षिण भारत की स्थितियां अलग होती हैं. इक्वेटर के ज़्यादा नज़दीक आने वाले इस हिस्से में गर्मी ज़्यादा समय तक पड़ती है, तकरीबन साल भर. हालांकि यहां तापमान 40°C से ज़्यादा हो जाए, ऐसा कम होता है लेकिन शीतलहर तो यहां अजूबा ही है. 20°C से कम तापमान हो जाए तो यहां इसे ही बहुत सर्दी माना जाता है. अब इस तरह के फर्क के पीछे के कारणों को समझते हैं.

    क्यों इतना अलग होता है मौसम?
    कर्क रेखा की स्थिति के चलते उत्तर भारत शीतोष्ण ज़ोन में है तो दक्षिण भारत उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में. इसे आसान शब्दों में और कारणों के साथ समझते चलिए.

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    1. दक्षिण भारत का हिस्सा प्रायद्वीपीय त्रिकोण जैसा है, जिसे आप समुद्र का क्षेत्र समझ सकते हैं. तीन तरफ से समुद्र से घिरे होने के कारण दक्षिण के मौसम का स्वाभाविक तौर पर गर्म और आर्द्रता यानी पसीने वाला होता है. दूसरी तरफ, उत्तर भारत के पास समुद्र नहीं बल्कि हिमालय है इसलिए अपेक्षाकृत यहां का मौसम ठंडा रहता है.

    2. उत्तर और दक्षिण के साथ ही यह भी दिलचस्प है कि पश्चिम भारत में रेगिस्तान के कारण गर्मी और सर्दी दोनों ही तेज़ होती हैं और बारिश बहुत कम, जबकि पूर्व भारत में दुनिया की सबसे ज़्यादा बारिश वाले इलाके हैं.

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    3. भारत की कॉंटिनेंटल प्लेट होने के कारण दक्षिणी हिस्सा प्राचीन पठार जैसा है, जिसे डेक्कन प्लैटू के नाम से भी जाना जाता है. इसके साथ ही एक संकरी सी तटीय पट्टी है. जबकि उत्तर का हिस्सा अपेक्षाकृत नया है और एक प्राचीन समुद्र से बना बताया जाता है.

    4. अक्षांश के हिसाब से भारत और ऑस्ट्रेलिया एक ही जैसे हैं लेकिन अगर लंबाई में देखें तो उत्तर भारत का अक्षांश बदल जाता है. दूसरे ऑस्ट्रेलिया चारों तरफ से समुद्र से घिरा है और उत्तर भारत का पूरा हिस्सा चारों तरफ से ज़मीन से ही घिरा है.

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    कर्क रेखा भारत को साफ तौर पर नॉर्थ और साउथ दो ज़ोनों में बांटती है.


    कैसा है मौसम का हाल और कैसा होगा?
    फिलहाल दुनिया भर में उत्तरी अक्षांश वाले हिस्सों में ठंड ज़बरदस्त पड़ रही है. रूस, चीन, यूरोप के साथ ही अमेरिका के उत्तरी भाग कड़ाके की ठंड की चपेट में हैं और इसी का असर भारत के उत्तरी हिस्से के मौसम पर भी देखा जा रहा है. वहीं, समुद्र में एल नीनो और ला नीना स्थितियों के प्रभाव भी ठंड के पीछे की वजहें हैं.

    उत्तरी गोलार्ध में जनवरी के आखिर तक नम हवाओं, बर्फ और कड़कड़ाती ठंड रहने के अनुमान लगाए जा रहे हैं. वहीं, दक्षिणी गोलार्ध में तापमान अपेक्षाकृत सामान्य रहने के आसार हैं. फिलहाल पंजाब, ​हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे उत्तर भारतीय राज्यों ही नहीं, केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में भी बारिश हो रही है और अगले हफ्ते तक होने की भविष्यवाणियां हैं.

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    कुल मिलाकर कहा जा रहा है कि जनवरी भर उत्तर भारत ठिठुरता रहेगा तो दक्षिण भारत में तापमान माकूल बना रहेगा. जब एक्स्ट्रीम मौसम में एसी के ज़रिये तापमान नियंत्रित किया जाता है तो 18 से 24 डिग्री तक टेंप्रेचर को माकूल या ठीक या सुहाना समझा जाता है. ह्यूमिडिटी को छोड़ दें तो दक्षिण में यही तापमान बना हुआ है और अगले कुछ हफ्तों तक रह सकता है.

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