गर्भनाल भी खा जाते हैं चीन के लोग, मानते हैं नपुंसकता की दवा

गर्भनाल भी खा जाते हैं चीन के लोग, मानते हैं नपुंसकता की दवा
ट्रेडिशनल चीनी दवाओं के तहत प्लेसेंटा की भारी कीमत है (Photo-pixabay)

चीन (China) में बच्चे के जन्म के बाद मां अपनी ही गर्भनाल (practice of eating placenta) खा लेती है. ये प्रैक्टिस वहां सैकड़ों सालों से चली आ रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 22, 2020, 12:00 PM IST
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खाने के मामले में किसी भी जीव-जंतु को न बख्शने वाला चीन आजकल दुनिया के गुस्से का शिकार हो रहा है. कई देशों का मानना है कि चीन में जंगली पशुओं को खाने (practice of eating wild animals in China) की वजह से कोरोना वायरस (coronavirus) दुनिया में तबाही मचा रहा है. खुद चीन में डरकर कुत्तों का मांस खाने पर पांच सालों के लिए बैन (dog meat ban in China) लग गया. वैसे यहां के वेट मार्केट (Wet market) में अब भी जंगली जानवरों के मांस की बिक्री की खबरें जब-तब आ रही हैं. वैसे चीन में केवल एग्जोटिक मीट ही नहीं, बल्कि मां की गर्भनाल (human placenta) भी खाई जाती है.

इस प्रैक्टिस को placentophagy कहा जाता है. माना जाता है कि गर्भनाल में काफी सारे पोषक तत्व होते हैं और इन्हें खाना फायदेमंद रहता है. यही वजह है कि इस देश में न केवल मांएं अपना प्लेसेंटा खा रही हैं, बल्कि अस्पताल में ही इसे चुराकर ऊंची कीमत पर बेचा भी जा रहा है.

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क्या है प्लेसेंटा
ये मां के शरीर में गर्भाशय के बाहरी हिस्से से जुड़ा होता है जो बच्चे से एक नाल के सहारे जुड़ता है. प्लेसेंटा गर्भावस्था के दौरान मां से भ्रूण तक पोषण पहुंचाने का जरिया है. इसी की वजह से बच्चा मां के गर्भ में जीवित रहता है और बढ़ता है. मां के शरीर का ये हिस्सा मां और बच्चे को जोड़ने का काम करता है. मां जो भी पोषण लेती है वो गर्भनाल के जरिए फिल्टर होकर भ्रूण तक जाता है. शिशु के जन्म के बाद नाल खुद ही सूखकर गिर जाती है. अब माना जाने लगा है कि इस नाल से बच्चे को कई गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता है. या इससे उसकी मेडिकल हिस्ट्री भी समझी जा सकती है. यही प्लेसेंटा अब शिशु जन्म के बाद मांएं भी खाने लगी हैं. माना जाता है कि इससे ब्रेस्टफीडिंग में आसानी होती है और पोस्ट नेटल डिप्रेशन से भी बचाव होता है.

सूखे ह्यूमन प्लेसेंटा को जिहेचे (zi he che) कहते हैं और ये दानेदार रूप में पाउच में भी मिलते हैं (Photo-pixabay)


ट्रेडिशनल चीनी दवाओं के तहत प्लेसेंटा की भारी कीमत है. इसे चीनी भाषा में Ziheche कहते हैं. इसे सूप बनाकर तुरंत खाया जा सकता है. वहीं प्लेसेंटा को सुखाकर जादुई असर वाली दवा की तरह भी बेचा जाता है. माना जाता है कि इससे नई मांओं को बच्चे के जन्म के बाद होने वाले अवसाद से छुटकारा मिलता है. साथ ही नपुंसकता के इलाज में भी इसे काफी असरदार माना जाता है. यही वजह है कि चीन में महिलाएं और पुरुष दोनों के बीच ही इसकी भारी मांग है.

सूखे हुए ह्यूमन प्लेसेंटा को जिहेचे (zi he che) कहते हैं और ये दानेदार रूप में पाउच में भी मिलते हैं. एक पैकेट में 3 ग्राम प्लेसेंटा होता है, जिसे पानी, दूध, जूस या सूप में डालकर भी पिया जाता है. चीन में ट्रेडिशनल मेडिसिन पर काम करने वाले एक्सपर्ट ली शिजेन के मुताबिक चीन में प्लेसेंटा खाने के प्रमाण साल 1500 में भी मिल चुके. उन्होंने Materia Medica में इस बात का जिक्र किया. है.

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चीन में प्लेसेंटा को कई तरह से खाते हैं. जैसे नई मां को इसका सूप बनाकर दिया जाता है. बहुत से लोग इसे जूस में डालकर पीना पसंद करते हैं. ट्रेडिनशल मेडिसिन बनाने वाले इसे धूप में सुखाकर कैप्सूल में बदलते हैं और फिर इसे भारी कीमत पर बेचा जाता है. प्लेसेंटा पर दुनियाभर को ट्रेनिंग देने के लिए एक संस्था Independent Placenta Encapsulation Network (IPEN) प्रोग्राम करती है. ये बताती है कि एक प्लेसेंटा की कीमत 150 पाउंड से लेकर काफी ऊंची हो सकती है. ये संस्था कैप्सूल भी बेचती है. हालांकि प्लेसेंटा की चोरी और तस्करी जैसी वजहों से अब इसपर कोर्ट केस चल रहा है.

साल 1998 में चैनल 4 ने बच्चे के जन्म के बाद प्लेसेंटा खाने का लाइव टेलीकास्ट किया था (Photo-pixabay)


वैसे बहुत से स्तनधारी जन्म के बाद प्लेसेंटा खाते हैं. चूहों और खरगोश में भी ये प्रवृति होती है. चीन में तो प्लेसेंटा खाने की प्रैक्टिस आम है लेकिन ये जब-तब क्रिटिसाइज भी की जाती रही है. लोग मानते हैं कि ये नरभक्षी होने की तरह है. साल 1998 में चैनल 4 ने बच्चे के जन्म के बाद प्लेसेंटा खाने का लाइव टेलीकास्ट किया. इसमें लहसुन के साथ प्लेसेंटा को पकाया गया और उसे मां समेत फैमिली को सर्व किया गया. बाद में इस टेलीकास्ट पर चैनल 4 की काफी छीछालेदर हुई.

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वैसे प्लेसेंटा खाने से वाकई में फायदा मिलता है, ऐसा कोई प्रमाण अब तक नहीं दिखा है. दूसरी ओर इसे खाने के कई खतरे बताए जा रहे हैं. जैसे टेक्सास यूनिवर्सिटी अस्पताल के मुताबिक प्लेसेंटा मां से बच्चे तक पहुंचने वाले पोषण को फिल्टर करने का काम करता है. इस वजह से इसमें कई खतरनाक बैक्टीरिया और वायरस छिपे होते हैं. इसे खाने पर इंफेक्शन का खतरा हो सकता है. साल 2016 में  Centers for Disease Control and Prevention (CDC) की एक स्टडी और भी डरावने तथ्य देती है. स्टडी में ऐसे मां को लिया गया, जिसके शिशु के खून में गंभीर किस्म का संक्रमण था. जांच में पता चला कि मां शिशुजन्म के बाद रोज प्लेसेंटा से बने कैप्सूल खा रही थी. इसी वजह से ब्रेस्टफीडिंग के दौरान संक्रमण बच्चे तक पहुंच गया.
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