तो इसलिए रेलवे कैंसिल कर देता है इंटरनेट से लिया गया वेटिंग का टिकट

जबकि अगर आप रेलवे स्टेशन की विंडो से वेटिंग का टिकट लें तो कंफर्म न होने पर भी वो कैंसिल नहीं होता और आप वेटिंग के टिकट के साथ ट्रेन में यात्रा कर सकते हैं.

Avinash Dwivedi | News18Hindi
Updated: September 7, 2018, 1:00 PM IST
तो इसलिए रेलवे कैंसिल कर देता है इंटरनेट से लिया गया वेटिंग का टिकट
सांकेतिक तस्वीर
Avinash Dwivedi | News18Hindi
Updated: September 7, 2018, 1:00 PM IST
जब आप भारतीय रेलवे से रिजर्वेशन टिकट लेना चाहते हैं तो रेलवे विभाग आपको दो तरह से टिकट बुक कराने की सुविधा देता है. एक सीधे रेलवे स्टेशन की रिजर्वेशन विंडो से और दूसरा इंटरनेट से. इंटरनेट से आप चाहे तो सीधे IRCTC की वेबसाइट से टिकट लें या फिर एप से सारे ही टिकट 'ई-टिकट' होते हैं.

अगर आप काउंटर से रिजर्वेशन टिकट बुक करवा रहे हैं और आपको आपकी कंफर्म बर्थ मिल जाती है. तो कंफर्म लिस्ट में आपका नाम आ जाता है और आपकी लिस्ट की एक कॉपी टीटी को दे दी जाती है जिससे वह यात्रा के वक्त आकर आपके टिकट का मिलान अपनी लिस्ट से कर लेता है. लेकिन अगर आपकी सीट वेटिंग लिस्ट में है और आपकी टिकट ट्रेन यात्रा से पहले आखिरी लिस्ट बनने तक कंफर्म नहीं होती है तो भी आपको रिजर्वेशन वाले डिब्बे में खड़े होकर यात्रा करने दिया जाता है.

लेकिन आईआरसीटीसी से किए गए टिकट की कहानी अलग ही है. अगर आपको कंफर्म टिकट मिलती है तब तो ठीक है. लेकिन अगर आपको आईआरसीटीसी से वेटिंग का टिकट मिलता है और जिस ट्रेन में आपको यात्रा करनी है उसकी लिस्ट बनाते हुए आखिरी में बनी लिस्ट में भी आपका नाम नहीं आ पाता तो आपका टिकट ऑटोमैटिकली कैंसिल हो जाता है. ऐसी हालत में रेलवे थोड़ा सा पैसा काटकर बाकी का पैसा आपके एकाउंट में ट्रांसफर कर देता है. ऐसे में आपको अगर यात्रा करना बहुत जरूरी होता है तो आप एक जनरल टिकट ले लेते हैं और रिजर्वेशन वाले डिब्बे में टीटी को जुर्माना देकर यात्रा करने के लिए वाजिब टिकट ले लेते हैं.

ऐसे में प्रश्न उठता है कि इंटरनेट से बुक किए किसी भी टिकट को रेलवे कंफर्म न होने पर कैंसिल क्यों कर देती है जबकि काउंटर से लिए गए टिकट को नहीं करती? यानि रेलवे को ई-टिकट पर वेटिंग देने में क्या समस्या है?

रेलवे को होता है फर्जीवाड़े का डर
दरअसल रेलवे जो ई-टिकट जारी करता है उसमें सीट नहीं अलॉट होती है. ऐसे में ज्यादा से ज्यादा लोग एक ही टिकट की फोटोकॉपी कराकर यात्रा कर सकते हैं. क्योंकि इंटरनेट बुकिंग से जनरेट होने वाला ई-टिकट या तो A-4 साइज के पेपर पर होता है या फिर मैसेज के जरिए. ऐसे में कई सारे लोग फर्जी पेपर या मैसेज के जरिए यात्री होने का दावा कर सकते हैं. जिसे जांचने का टीटी के पास कोई सबूत नहीं होगा. ऐसे में बहुत से यात्रियों की बाढ़ आ जायेगी, जिससे दूसरे यात्रियों को असुविधा हो सकती है. यही कारण है कि रेलवे ई-टिकट को वेटिंग क्लियर न होने पर कैंसिल कर देता है.

विंडो टिकट पर पैसा वापस करना भी होगा मुश्किल
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विंडो टिकट पर वेटिंग अगर कंफर्म न हो रेलवे उस टिकट को कैंसिल कर दे तो उसे यात्री को पैसा वापस करने में बहुत परेशानी होगी. ऐसे में वह यात्री को कहां-कहां खोजता फिरेगा! साथ में केवल जिनकी वेटिंग कंफर्म न हुई हो उन्हें टिकट का पैसा लौटाने के लिए ही रेलवे को बहुत ज्यादा लोगों की आवश्यकता होगी. ऐसी किसी मेहनत से बचने के लिए रेलवे उन सभी लोगों को रेल के रिजर्वेशन वाले डिब्बे में यात्रा करने देता है जिन्होंने विंडो से टिकट लिया होता है और उनका टिकट कंफर्म नहीं हुआ होता है.

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