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जब 2.0 लिखा जाता है तो उसका क्या मतलब होता है?

जब 2.0 लिखा जाता है तो उसका क्या मतलब होता है?

रजनीकांत की नई फिल्म 2.0 का पोस्टर

रजनीकांत की नई फिल्म 2.0 का पोस्टर

2.0 का कमाल है जिसने फेसबुक, ट्विटर, माई स्पेस और इंस्टाग्राम जैसे तरीके देकर संवाद के मायने बदल डाले हैं.

    फिल्म आई है 2.0 . टू पॉइंट जीरो नहीं, टू पॉइंट ओ. चेट्टी और ताकतवर बनकर आया तो चेट्टी टू पॉइंट ओ हो गया. किसी भी ऐप का नया वर्जन आता है तो वह भी टू पॉइंट ओ हो जाता है. कोई खिलाड़ी फेल होने के बाद लौट कर आता है तो उसे भी टू पॉइंट ओ की संज्ञा दी जाती है. दो बातें. ये टू पॉइंट जीरो ओ कैसे बन गया? और ये टू पॉइंट ओ का पूरा चक्कर है क्या?

    टू पॉइंट ओ और जीरो में में कोई फर्क नहीं है. आपको जानकार आश्चर्य होगा लेकिन जीरो को ओ बोलना बेहतर और कूल लगता है इसलिए उसे ओ कहा जाने लगा. लेकिन अब ये टू पॉइंट ओ शुरू कैसे हुआ?

    टू पॉइंट ओ असल में इंटरनेट के विकास का दूसरा चरण है. विशेष रूप से वह चरण जो पुराने रुके हुए वेब पेजों को गतिशील या यूजर द्वारा उत्पन्न कंटेंट और सोशल मीडिया के विकास से इंटरनेट में बदलाव लाया है. 2.0 होने का मतलब है कि कुछ नया नया, कुछ अलग, क्रांतिकारी, पुराने 1.0 से पूरी तरह से अलग और तेज. यह वास्तव में सरल गणित है. 2.0 1.0 का दो गुणा है. तो जो भी पुराने से बेहतर है वह टू पॉइंट ओ है.

    फिल्म 2.0 के पोस्टर में रजनीकांत


    2.0 शब्द का निर्माण और इस्तेमाल 
    2.0 सॉफ्टवेयर डेवलपर्स नए "प्रमुख संस्करण रिलीज" को भी कहते हैं. यह सभी चीजों को एक अपडेटेड नाम देने का एक लोकप्रिय तरीका है. उदाहरण के लिए, रोबोट के दूसरे वरजन को 2.0 कहा गया है. किरदार वही है, कहानी नई है और पहले से बड़े बजट वाली और व्यापक है.

    एक कम्युनिकेशन आर्किटेक्चर एडवाइजर डार्सी दीनुची ने 1999 के लेख, फ्रैगमेंटेड फ्यूचर  में वेब 2.0 शब्द का निर्माण और इस्तेमाल किया था.



    इंटरनेट की दूसरी पीढ़ी
    वेब 2.0 यानी इंटरनेट की दूसरी पीढ़ी. वेब 2.0 का कमाल जिसने फेसबुक, ऑरकुट, ट्विटर, माई स्पेस और बज जैसे तरीके देकर संवाद के मायने बदल डाले. पहली पीढ़ी वह थी जब वेबसाइट्स का सारा का सारा कंटेंट पहले से तय होता था, आप बस लॉग इन करते और पढ़ते थे. ज्यादा से ज्यादा ईमेल करके संवाद कायम कर सकते थे. वेब 2.0 ने इसे बदल डाला.

    2.0 का मतलब क्या होता है


    इंटरनेट की नई जेनरेशन में क्या पढ़ना है, क्या देखना है... सब हम और आप तय करते हैं. फेसबुक, ट्विटर, ब्लॉग, पिकासा, फ्लिकर, यू-ट्यूब.. ये सभी इंटरनेट की दूसरी जेनरेशन के रूप हैं. इन सभी में वेबसाइट बनाने वालों ने आपको ऐसे प्लैटफॉर्म बनाकर दिए हैं, जिन पर क्या लिखना है, क्या फोटो या विडियो डालने हैं, वे सब आप अपनी मर्जी से करते हैं. इंटरनेट के इस नए रूप में कम्यूनिकेशन के सबसे बड़े टूल के तौर पर उभर रहे हैं फेसबुक, ट्विटर और गूगल.undefined

    Tags: 2.0, Digital India, Internet users, Mobile Phone, Voxweb

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