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मॉब लिंचिंग पर केंद्र सरकार क्यों नहीं बनाती कड़ा कानून?

Vivek Anand | News18Hindi
Updated: September 20, 2019, 11:51 AM IST
मॉब लिंचिंग पर केंद्र सरकार क्यों नहीं बनाती कड़ा कानून?
मॉब लिंचिंग पर कुछ राज्यों ने सख्त कानून बनाए हैं

मॉब लिंचिंग (Mob Lynching) पर बिहार सरकार (Bihar Government) सख्त कानून लाने पर विचार कर रही है. पश्चिम बंगाल (West Bengal) और राजस्थान (Rajasthan) में इसको लेकर पहले ही कानून बना चुके हैं. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तक ने इस पर सख्त कानून बनाने की सिफारिश की है, सवाल है कि केंद्र सरकार इस पर सख्त कानून क्यों नहीं ला रही है...

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  • Last Updated: September 20, 2019, 11:51 AM IST
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बिहार सरकार (Bihar Government) ने मॉब लिचिंग (Mob Lynching) पर सख्त कानून (tough law) बनाने का फैसला किया है. बिहार में पिछले दिनों मॉब लिचिंग के 39 मामलों में 14 लोगों की जान गई है. मॉब लिचिंग की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए बिहार सरकार इस पर सख्त कानून लाने पर विचार कर रही है.

बिहार सरकार ने फैसला किया है कि अगर मॉब लिचिंग में शामिल आरोपी किसी सरकारी नौकरी में है तो उसे नौकरी से तुरंत बर्खास्त किया जाएगा. अगर आरोपी किसी नौकरी में नहीं है तो वो किसी भी नौकरी के लिए तुरंत अयोग्य करार दे दिया जाएगा. बिहार में मॉब लिचिंग के आरोपियों की पहचान के लिए पुलिस भी तेजी दिखा रही है. लोगों से लिचिंग की घटनाओं के वीडियो मंगवाए जा रहे हैं.

पिछले दिनों बिहार के पटना, सासाराम, जहानाबाद, गया और दूसरे जिलों में मॉब लिंचिंग की 39 घटनाएं हुई हैं. इसमें 345 लोगों के नाम आरोपी के तौर पर सामने आए हैं. पुलिस ने करीब 278 लोगों को गिरफ्तार किया है. सरकार इन घटनाओं पर लगाम लगाने के उपाय कर रही है.

बिहार में मॉब लिचिंग की सबसे ज्यादा घटनाएं बच्चा चोरी के आरोप में हुई हैं. गया मे पिछले महीने बच्चा चोरी के शक में चार युवकों की बुरी तरह से पिटाई की गई. एक ऐसे ही मामले में पटना में एक बुजुर्ग और एक मानसिक तौर पर कमजोर महिला को भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला था.

मॉब लिचिंग की घटनाएं देशभर में हो रही है. कुछ राज्य इस पर सख्त कानून बना चुके हैं और कुछ बनाने की तैयारी कर रहे हैं. हालांकि अभी तक इस पर कोई केंद्रीय कानून नहीं है, जबकि सुप्रीम कोर्ट तक ऐसे मामलों में सख्त कानून बनाए जाने की सिफारिश कर चुका है.

Why does modi government not make stricter laws on mob lynching incpite of supreme court suggestion
मॉब लिंचिंग पर बिहार सरकार सख्त कानून बनाने पर विचार कर रही है


पश्चिम बंगाल सरकार लिचिंग पर बना चुकी है कानून
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पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार मॉब लिचिंग पर कानून बना चुकी है. अगस्त में राज्य सरकार पश्चिम बंगाल लिंचिंग रोकथाम बिल 2019 लेकर आई. पश्चिम बंगाल के कानून में ऐसे मामलों के आरोपियों के भीतर डर पैदा करने के लिए अधिकतम फांसी की सजा तक का प्रावधान है. इस कानून के मुताबिक अगर किसी मॉब लिचिंग की घटना में पीड़ित की मौत हो जाती है तो आरोपी को उम्र कैद से लेकर फांसी तक की सजा दी जा सकती है.

बंगाल की विधानसभा ने इस कानून को ध्वनिमत से पारित किया था. बंगाल में बच्चा चोरी और जानवरों की चोरी के आरोप में सबसे ज्यादा लिचिंग की घटनाएं हुई हैं. इसके पहले वहां ऐसी घटनाओं में तीन साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान था. ऐसे मामलों में एक लाख से लेकर 3 लाख तक के जुर्माने का भी प्रावधान था. लेकिन इसके बावजूद लिंचिंग की घटनाएं बढ़ती ही जा रही थी.

पश्चिम बंगाल की सरकार अब ऐसे मामलों को रोकने के लिए एक नोडल ऑफिसर को नियुक्त करेगी. कोलकाता के पुलिस कमिश्नर एसीपी स्तर के पुलिस अधिकारी को ऐसे मामलों के नोडल अफसर नियुक्त करेंगे. नोडल अफसर स्थानीय खुफिया पुलिस की सहायता से ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए काम करेंगे.

Why does modi government not make stricter laws on mob lynching incpite of supreme court suggestion
मॉब लिंचिंग पर पश्चिम बंगाल और राजस्थान में बना है सख्त कानून


राजस्थान सरकार भी ला चुकी है लिंचिंग पर कानून

पश्चिम बंगाल की तरह राजस्थान की सरकार भी पहले ही लिंचिंग पर कानून ला चुकी है. पिछले महीने ही राजस्थान ने मॉब लिंचिंग पर कानून पास किया है. राजस्थान में इस कानून के मुताबिक आरोपी को ऐसे मामलों में उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है. अगर मॉब लिंचिंग की घटना में पीड़ित की मौत हो जाती है तो आरोपी के दोषी साबित होने पर उम्रकैद की सजा मिल सकती है. साथ ही  1 लाख से लेकर 5 लाख रुपए तक का जुर्माना देना पड़ेगा.

राजस्थान लिचिंग रोकथाम बिल 2019 को राज्य की विधानसभा ने ध्वनिमत से पारित किया था. हालांकि बीजेपी इस बिल को सेलेक्ट कमिटी भेजने पर अड़ी थी. लेकिन विधानसभा ने आखिरकार इसे बिना सेलेक्ट कमिटी को भेजे पारित कर दिया.

इस बिल पर चर्चा करते हुए राज्य के संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने कहा था कि 2014 के बाद देशभर में हुई मॉब लिंचिंग की घटनाओं में सबसे ज्यादा 86 फीसदी मामले राजस्थान में हुए हैं. राजस्थान जैसे शांत राज्य में ऐसा होना हैरानी भरा है.

राजस्थान के कानून के मुताबिक मॉब लिंचिंग की घटनाओं में अगर पीड़ित को गंभीर जख्म पहुंचता है तो इसके आरोपियों को 10 साल तक की सजा और 25 हजार से लेकर 3 लाख तक का जुर्माना हो सकता है. अगर पीड़ित को मामूली चोट भी पहुंचता है तो भी 7 साल तक की सजा और 1 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है. राज्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए राज्य के पुलिस महानिदेशक को कुछ खास अधिकार दिए गए हैं. डीजीपी, आईजी रैंक के अधिकारी को ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए डिस्ट्रिक कॉर्डिनेटर नियुक्त कर सकते हैं.

Why does modi government not make stricter laws on mob lynching incpite of supreme court suggestion
मॉब लिंचिंग पर अमेरिका ने पिछले साल ही कानून बनाया है


मॉब लिंचिंग पर केंद्र सरकार क्यों नहीं बना रही कानून?

देशभर में मॉब लिंचिंग की घटनाएं बढ़ी हैं. कई राज्य इस दिशा में कानून बनाने पर विचार कर रहे हैं. लेकिन अभी तक मॉब लिंचिंग को लेकर कोई केंद्रीय कानून नहीं बना है. पश्चिम बंगाल की सरकार ने इस पर केंद्र की मोदी सरकार पर हमला भी बोला था.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लिंचिंग पर कानून पास होने के मौके पर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के इस बारे में दिशा निर्देश देने के बावजूद भी केंद्र सरकार ने मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकने के लिए कुछ नहीं किया है. केंद्र के कुछ एक्शन नहीं लेने की स्थिति में हम ये कानून लेकर आए हैं.

पिछले साल जुलाई महीने में सुप्रीम कोर्ट ने मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकने के लिए खास दिशा निर्देश दिए थे. सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए गंभीरता से काम करने को कहा था. कोर्ट ने इस पर अलग से कानून बनाने की राय दी थी ताकि समाज का ताना-बाना बचा रहे.

अमेरिका तक में बने हैं लिंचिंग पर कानून

अमेरिका तक में मॉब लिंचिंग बड़ी समस्या बनी हुई है. पिछले साल अमेरिका भी मॉब लिंचिंग पर अलग से कानून बना चुका है. दिसंबर 2018 में अमेरिकी संसद ने इस बिल को मंजूरी दी थी. अमेरिका में तीन अश्वेत सीनेटर्स इस बिल को लेकर आए थे. इस बिल में मॉब लिंचिंग को हेट क्राइम और मर्डर जैसा गंभीर अपराध माना गया है.

हालांकि अमेरिका में लिंचिंग को लेकर बहुत कम बार अपराध साबित हुआ है. अमेरिका में 1918 से लेकर अब तक लिचिंग पर 200 पर कानून बनाने की कोशिश हुई थी. लेकिन हर बार बिल किसी न किसी वजह से गिर गया. 2018 में पहली बार वहां इस पर कानून बना.

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First published: September 20, 2019, 11:51 AM IST
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