जब-जब सवर्णों को रास नहीं आया दलितों का घोड़ी चढ़ना...

केवल यूपी ही नहीं राजस्थान से लेकर गुजरात तक में दलितों की बारातों पर सवर्णों की नाराजगी भारी पड़ती रही है

News18Hindi
Updated: July 16, 2018, 12:18 PM IST
जब-जब सवर्णों को रास नहीं आया दलितों का घोड़ी चढ़ना...
दो साल पहले एमपी में हेलमेट पहने इस दूल्हे की तस्वीर चर्चा में आई थी.
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Updated: July 16, 2018, 12:18 PM IST
उत्तर प्रदेश में कासगंज के निजामपुर गांव में तमाम विरोध के बाद दलित संजय जाटव की बारात धूमधाम से बैंडबाजे के साथ निकली. हालांकि इस दौरान बड़े पैमाने पर पुलिस सुरक्षा थी. इस गांव में 80 साल बाद कोई दलित दूल्हा घोड़ी पर चढ़ा. हालांकि पिछले दो तीन महीनों में ही इस तरह की कई घटनाएं देश के कई हिस्सों में हुईं जब दलितों की बारात ने विवाद और हिंसा का रूप ले लिया.

हालांकि इसमें उत्तर प्रदेश का मुजफ्फरनगर ऐसा जिला भी है, जहां पिछले कुछ सालों से दलितों की बारात लगातार गाजे-बाजे और घोड़ी के साथ निकल रही है लेकिन उस पर कभी कोई आपत्ति नहीं हुई.

गुजरात में दूल्हे को घोड़ी से उतार कर पीटा
ये पिछले महीने का ही वाकया है कि जब गुजरात में गांधीनगर के माणसा में एक दलित युवक की बारात को लेकर विवाद हो गया. जब ये दलित युवक पारसा गांव बारात लेकर पहुंचा तो कथित बड़ी जाति के लोगों ने उसे घोड़ी से नीचे उतार दिया. इसके बाद हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि पुलिस बुलानी पड़ी. फिर पूरी शादी पुलिस बंदोबस्त के बीच ही हुई.

घोड़े पर चढ़ने पर हत्या
अप्रैल में गुजरात के भावनगर में एक दलित युवक की सिर्फ इसलिए हत्या कर दी गई क्योंकि उसने ऊंची जाति के लोगों के सामने घोड़े पर चढ़ने का कसूर किया था. 21 साल के प्रदीप राठौर ने कुछ महीने पहले ही एक घोड़ा खरीदा था. पिता कह रहे थे कि बेटा बाइक खरीद ले लेकिन घुड़सवारी के शौक के चलते उसने बाइक के बजाए घोड़ा खरीद लिया. भावनगर के उमराला तहसील के उसके गांव टिंबी के ऊंची जाति के लोगों को ये पसंद नहीं आया. उसकी हत्या कर दी गई.

गुजरात का प्रदीप राठौड, जिसकी हत्या केवल इसलिए कर दी गई, क्योंकि दलित होने के बाद भी वो घोड़े पर चढ़ा था
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राजस्थान में भी घोड़ी चढ़ने वाले दूल्हे की पिचाई
अप्रैल के आखिर हफ्ते में राजस्थान के भीलवाड़ा के गोवर्धनपुर गांव में दलित दूल्हे को घोड़ी चढ़ने पर पीटा गया. उसी गांव के कुछ लोगों ने उसे घोड़ी से उतरने पर मज़बूर किया.

सवर्णों ने बारात नहीं निकलने दी
मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के माहिदपुर के करीब गुराड़िया गांव में कुछ सवर्णों ने दलित समाज के दूल्हे को अपने क्षेत्र से बारात ले जाने से इंकार कर दिया था. सवर्ण समाज के लोगों का कहना था कि घोड़े पर चढ़कर बारात केवल हम निकाल सकते हैं. इसके बाद दोनों पक्षों में झड़प हुई. मामला पुलिस थाने तक भी पहुंचा.

ऐसे फरमान भी
इस विवाद के तुरंत बाद उज्जैन जिले के महिदपुर एसडीएम का फरमान और सुर्खियों का विषय बना. फरमान में एसडीएम ने सरपंच और पंचायत सचिव को निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्र में होने वाली किसी भी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़े वर्ग से जुड़े किसी व्यक्ति की बारात निकालने से तीन दिन पहले थाने में उसकी जानकारी दें. साथ ही उसकी लिखित स्वीकृति भी लें.

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घोड़ी पर चढ़ने से रोकने की 38 घटनाएं 

पिछले दिनों राजस्थान विधानसभा में खुद सरकार की तरफ से यह जानकारी उपलब्ध कराई गई कि तीन साल में दलित दूल्हों को घोड़ी पर चढ़ने से रोकने की 38 घटनाएं संज्ञान में आई हैं. करीब दो साल पहले मध्य प्रदेश में एक दलित दूल्हे का हेलमेट लगाए फोटो चर्चा में आया था. उसकी वजह भी घोड़ी पर चढ़कर बारात आना था. विरोध कर रही भीड़ ने पहले उसकी घोड़ी छीन ली, फिर पथराव शुरू कर दिया. दूल्हे को घायल होने से बचाने के लिए पुलिस को उसके लिए हेलमेट का बंदोबस्त करना पड़ा.

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अलग तस्वीर
हालांकि पिछले कुछ महीनों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलितों की शादी धूमधाम से हुई. बारात भी निकली. दूल्हा घोड़ी पर भी चढ़ा. बैंड भी बजा लेकिन सबकुछ शांतिपूर्ण तरीके से हो गया. मई में शामली के छोटे से गांव बिरालसी के एक दलित के घर शादी थी. खूब रौनक और तड़क-भड़क के साथ शादी संपन्न हुई. मुजफ्फरनगर के सूरज बैंड वालों के यहां से शादी वाला बैंड गया. बारातियों ने जमकर डांस भी किया.बिना किसी हीलहुज्जत शांतिपूर्ण तरीके से शादी संपन्न हो गई.

मुजफ्फरनगर में दलितों की शादी के लिए बैंड बाजे आराम से बुक होते हैं और शादी में बजाए भी जाते हैं


एक और सुहानी शादी
मुजफ्फरनगर में चरथावल में पिछले साल जुलाई में एक गांव दलित समुदाय की सुरेंदरी देवी ने बेटी की शादी की. चरथावल के घिस्सूखेड़ा से बारात आई थी. दूल्हा सन्नी घोड़े पर सवार होकर आया था. गाजे-बाजे के साथ. सुरेंदरी देवी ने बताया, ‘ शादी में बढ़िया खाना-पीना और खूब गाना-बजाना हुआ था. सारे गांव ने मदद की थी. किसी तरह की दिक्कत नहीं हुई थी.’

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लेकिन बारातघर बंटे हैं
मुजफ्फरनगर में सोनटा गांव के दलितों की बारात रविदास मंदिर में रुकती है. वहीं बारातियों के खाने-पीने का इंतजाम होता है. जबकि बाकी जातियों के लिए एक अलग बारातघर है. गांव के मुकेश जैन का कहना है, ‘दलित अपनी शादियों में नॉनवेज बनाते हैं. जबकि दूसरी जाति की शादियों में नॉनवेज बिल्कुल नहीं बनता. इसलिए दलित शादियों में बारात रुकने की व्यवस्था रविदास मंदिर में है. अगर कोई दलित अपनी शादी में नॉनवेज नहीं बनाता तो हमें दूसरा बारातघर उन्हें इस्तेमाल करने देने में कोई आपत्ति नहीं.’
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