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Explainer : क्यों नहीं मिली गोटबाया को मालदीव, सिंगापुर और अमेरिका में राजनीतिक शरण

Explainer : क्यों नहीं मिली गोटबाया को मालदीव, सिंगापुर और अमेरिका में राजनीतिक शरण

श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे. (फाइल फोटो)

श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे. (फाइल फोटो)

काफी अटकलों के बाद श्रीलंका के राष्ट्रपति पद से गोटबाया राजपक्षे ने इस्तीफा तो दे दिया लेकिन अब भी उन्हें उन तीन -चार देशों में राजनीतिक शरण नहीं मिल पाई है, जहां वह चाहते थे. वैसे माना जा रहा है कि किसी भी देश में कम से कम गोटबाया के लिए राजनीतिक शरण मिलनी इतनी आसान नहीं होगी. आखिर क्या वजहें हैं गोटबाया को फिलहाल कोई देश शरण देने का इच्छुक नहीं लगता.

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हाइलाइट्स

गोटबाया पर अगर मानवाधिकार के गंभीर मामले हैं तो भ्रष्टाचार के भी
जब श्रीलंका में हजारों तमिल मारे गए तो उस अभियान की भी असली कमान उन्हीं के हाथ में थी
अगर अमेरिका ने उन्हें शरण देने से इनकार किया है तो यूरोप में कहीं भी वह शायद शरण पा सकें

श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने पहले अमेरिका से राजनीतिक शरण लेने के लिए अनुरोध किया लेकिन इसे ठुकरा दिया गया. इसके बाद उन्होंने मालदीव और सिंगापुर से ये बात की, वहां भी बात नहीं बनी. अब आखिर राजपक्षे को कहां राजनीतिक शरण मिल सकती है.

ये भी बड़ा सवाल है कि अमेरिका, मालदीव, सिंगापुर ने उन्हें राजनीतिक शरण क्यों नहीं दी. किसी देश में राजनीतिक शरण पाने के लिए क्या जरूरी होता है. दरअसल गोटबाया पर अगर मानवाधिकार के गंभीर मामले हैं तो भ्रष्टाचार के भी. दूसरे उनसे ना केवल तमिल बहुत ज्यादा नाराज हैं बल्कि अब उन्होंने अपने देश के बहुसंख्यक सिंहली लोगों को भी बुरी तरह नाराज किया हुआ है.

जिस भी देश में तमिल और सिंहली अच्छी खासी तादाद में होंगे वहां गोटबाया को राजनीतिक शरण देने का मतलब है कि कानून और व्यवस्था को लेकर गंभीर स्थिति देश में पैदा कर लेना.

सवाल – मालदीव के शीर्ष नेताओं से बहुत अच्छी जान पहचान के बाद भी गोटबाया को वहां शरण क्यों नहीं मिली?
– मालदीव में बड़े पैमाने पर अगर श्रीलंकाई रहते हैं और नौकरी कर रहे हैं तो बड़े पैमाने पर तमिल भी रहते हैं. जैसे ही उन्हें गोटबाया के मालदीव आने और उन्हें शरण देने संबंधी खबरें मिलीं तो उन्होंने नाराजगी जाहिर करनी शुरू कर दी. मालदीव एक तरह से श्रीलंका का पड़ोसी देश है. दोनों देशों के संबंध लंबे समय से अच्छे रहे हैं. दोनों एक दूसरे पर निर्भर भी करते हैं.
जाहिर सी बात है कि मालदीव ना तो श्रीलंका की नाराजगी लेना चाहेगा और ना ही देश में रहने वाले श्रीलंकाई लोगों की. फिर लिट्टे के खिलाफ जिस तरह से महिंदा राजपक्षे ने निर्ममता दिखाई थी, तब उनके सैन्य सलाहकार का काम गोटबाया ही देख रहे थे. माना जाता है कि इस पूरे अभियान के पीछे असली रणनीति और बुद्धि उन्हीं की थी.
इसी वजह से जब मालदीव में मौजूदा सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की जाने लगी तो उसे तुरंत गोटबाया को शरण नहीं देने का फैसला लेना पड़ा. इसके बाद ही राजपक्षे ने फिर सिंगापुर का रुख किया.

सवाल – सिंगापुर ने गोटबाया को क्यों राजनीति शरण देने से फिलहाल मना कर दिया. उनकी यात्रा को वहां प्राइवेट यात्रा क्यों कहा जा रहा है?
– माना जाता है कि राजपक्षे की बातचीत पिछले कुछ समय से कई देशों से राजनीतिक शरण देने के बारे में चल रही थी. तब शायद सिंगापुर ने उन्हें आशाजनक संकेत दिये थे. राजपक्षे लगातार सिंगापुर के विदेश मंत्रालय और वहां के शीर्ष नेताओं से संपर्क में थे लेकिन सिंगापुर में भी वही संकट है. एक तो वहां काफी सिंहली रहते हैं दूसरे तमिल आबादी वहां की दूसरी बड़ी आबादी है.
तमिलों में जिस तरह उन्हें लेकर नाराजगी है, उससे बाद सिंगापुर खुद नहीं चाहेगा कि उसके देश में राजपक्षे को लेकर कोई उत्पात या हंगामे की स्थितियां बनें. फिर गोटबाया को उन्हें अभूतपूर्व सुरक्षा देनी होगी.
वैसे खबरें बताती हैं कि राजपक्षे परिवार की लंबी चौड़ी संपत्ति सिंगापुर में है. इसी वजह से गोटबाया वहां उसमें आराम से रहना चाहते हैं लेकिन उन्हें फिलहाल तो इसकी अनुमति नहीं मिली है. अभी वो बस वहां एक टूरिस्ट की तरह रह सकते हैं. हो सकता है कि सिंगापुर उन्हें शरण दे दे लेकिन उसमें समय भी लग सकता है और वहां की सरकार के लिए ये किसी जोखिम से कम नहीं होगा.

सवाल – तो अब वह सिंगापुर से कहां के लिए उड़ेंगे?
– माना जा रहा है कि वह मध्य पूर्व की ओर जा सकते हैं. दरअसल कोलंबो से पहले वह दुबई जाने का ही प्लान बना रहे थे लेकिन आब्रजन अफसरों द्वारा पासपोर्ट में ऐसा करने से मना करने के बाद वह वहां नहीं जा पाए. अब सिंगापुर से जरूर वह वहां जा सकते हैं. हालांकि सिंगापुर में वह जब तक रहेंगे सुरक्षित रहेंगे और उन्हें किसी भी देश से राजनीतिक शरण मांगने के लिए पर्याप्त समय भी मिल जाएगा.

श्रीलंका में भी लोगों के दिमाग में यही सवाल है कि गोटबाया के लिए अगर सिंगापुर भी ट्रांजिट प्वाइंट ही तो वह अंतिम तौर पर आखिर किधर जाएंगे. अगर वह मध्य पूर्व नहीं जाते तो क्या दक्षिण एशिया के किसी महफूज द्वीप में रहेंगे, जहां पहले से उनकी प्रापर्टी शायद हो सकती है या फिर वह और कहीं लंबा जाएंगे.

सवाल – अभी वह क्या लंबे समय तक सिंगापुर में रह सकते हैं?
शायद वह ऐसा कर सकते हैं क्योंकि वहां उनकी सुरक्षित महलनुमा प्रापर्टी है और सिंगापुर सरकार के उनके वहां लंबे समय तक टिकने पर भी कोई एतराज नहीं होना चाहिए. वैसे जब तक वह वहां रहेंगे वहां की सरकार के लिए सिरदर्द बना ही रहेगा.

सवाल – गोटबाया को कहीं भी राजनीतिक शरण मिलना इतना आसान क्यों नहीं?
– क्योंकि वह युद्ध अपराधी हैं. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की मानवाधिकार हनन की बातों को ठुकरा दिया और उन पर देश को रसातल पहुंचाने का भी आरोप है. जो भी देश उन्हें शरण देगा वो अंतरराष्ट्रीय आलोचना का भी शिकार बनेगा. लिहाजा कोई देश ऐसा नहीं करना चाहेगा. गाटबाया के ही रक्षा सचिव होने के दौरान तमिलों का जनसंहार हुआ और 10,000 से ज्यादा तमिल मारे गए.

सवाल – अमेरिका ने क्या इसी वजह से उन्हें शरण नहीं दी?
– बिल्कुल उनके युद्ध अपराधी होने और मानवाधिकार हनन के लिए चलते अमेरिका उन्हें शायद ही कभी राजनीतिक शरण दे. अगर अमेरिका उन्हें शरण नहीं देगा तो यूरोप और ब्रिटेन जैसे देशों के दरवाजे भी उनके लिए बंद हो जाएंगे.

सवाल – ऐसे में क्या चीन उन्हें शरण देगा?
– चीन राजनीतिक शरण से मना नहीं करता, बशर्ते उसकी शर्तें पूरी होती हों. चूंकि राजपक्षे परिवार चीन के बहुत करीब रहा है तो गोटबाया को वहां शरण मिल सकती है लेकिन वहां शरण लेने का सबसे बड़ा खतरा यही है कि इसके बाद उनके हाथ पैर बंध जाएंगे, क्योंकि तब उनको चीन के कड़े कानूनों का ना केवल पूरी तरह पालन करना होगा बल्कि उन्हें अपने तरीके से रहने की बहुत आजादी नहीं मिलने वाली.

सवाल – कोई भी देश किसी नेता को राजनीतिक शरण देने के बाद क्या नहीं चाहता?
– कोई भी देश राजनीतिक शरण देने वाले नेता से कोई भी ऐसी हरकत की उम्मीद नहीं करता कि उसे आंतरिक और बाहरी मामलों में कोई दिक्कत हो. आमतौर पर हर देश यही चाहता है कि उसके देश में रह रहा राजनीतिक शरणार्थी शांति से रहे और किसी भी तरह के राजनीतिक या हिंसक कार्यकलाप में शामिल नहीं हो. वहां से बैठकर किसी भी देश के लिए साजिश भी नहीं करे.

Tags: Maldives, Singapore, Sri lanka, Srilanka

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