जानिए, क्यों एथेंस में 200 सालों तक कोई मस्जिद नहीं बन सकी

एथेंस में हाल ही में पहली आधिकारिक मस्जिद खुली- सांकेतिक फोटो (pxhere)
एथेंस में हाल ही में पहली आधिकारिक मस्जिद खुली- सांकेतिक फोटो (pxhere)

अच्छी-खासी मुस्लिम आबादी होने के बाद भी एथेंस ने मस्जिद निर्माण पर रोक लगा रखी थी. वहां हाल ही में पहली आधिकारिक मस्जिद (first official mosque in Athens, Greece) बनी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 8, 2020, 3:52 PM IST
  • Share this:
ग्रीस की राजधानी एथेंस में सीरिया, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के मुस्लिम बड़ी संख्या में हैं, इसके बाद भी लगभग 200 सालों तक यहां कोई मस्जिद नहीं थी. साल 1833 के बाद पहली बार हाल ही में यहां शुक्रवार की नमाज के लिए एक मस्जिद औपचारिक तौर पर खुली. वैसे एथेंस किसी यूरोपियन देश की अकेली राजधानी है, जो मुस्लिमों के धार्मिक स्थल को लेकर इतनी सख्त रही. जानिए, क्या है इसकी वजह.

इतिहास काफी पुराना है
1832 में ग्रीस को उस्मानी साम्राज्य, जिसे अंग्रेजी में ऑटोमन एंपायर भी कहते हैं, से आजादी मिली. कट्टरपंथी शासन में काफी दमन झेल चुके इस यूरोपियन हिस्से ने तय किया कि किसी धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा नहीं मिलेगा. इसके बाद से किसी भी सरकार ने औपचारिक मस्जिद के निर्माण की बात नहीं की.

ग्रीक चर्च मस्जिदों को लेकर अपना डर भी जताते रहे - सांकेतिक फोटो (Pixabay)

कितनी है आबादी


हालांकि इसी बीच मिडिल ईस्ट में लगातार राजनैतिक और आर्थिक अस्थिरता के बीच मुस्लिम आबादी वहां से भागकर यूरोपियन यूनियन की शरण में आने लगी. ग्रीस यूरोप का एंट्री पॉइंट था. इस वजह से धीरे-धीरे यहां मुस्लिमों की जनसंख्या बढ़ती चली गई. फिलहाल ग्रीस की कुल आबादी 1.07 करोड़ के आसपास है, ये साल 2019 की गणना है. इसमें मुसलमानों की आबादी लगभग 2 प्रतिशत है. ये एक बड़ी आबादी है.

ये भी पढ़ें: ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी से महिला का समानार्थी 'बिच' शब्द हटा, जानिए, क्यों हुए बदलाव

इसके बाद भी ग्रीस में मस्जिदों पर लंबा बैन लगा रहा. इसकी वजह मुस्लिम शासन के दौरान ऑर्थोडॉक्स कैथोलिक लोगों पर हिंसा और धर्म बदलने का दबाव था. यही वजह है कि ग्रीस और खासकर वहां की राजधानी में लोगों के भीतर मुस्लिमों को लेकर गुस्सा बना रहा.

ये भी पढ़ें: गूगल ने डूडल के जरिए महान मराठी लेखक पीएल देशपांडे को किया याद 

क्यों लगा इतना वक्त
बाद में उदारवादी धर्मनिरपेक्ष शासन आने के बाद वहां मस्जिदें बनाने के प्रयास शुरू हुए. सइस बारे में संसद में बिल भी लाया जाना था लेकिन ये कोशिश नाकाम रही. मस्जिद के निर्माण में कई चीजें बाधा बनीं. इसमें लाल फीताशाही से लेकर वित्तीय संकट, ऑर्थोडॉक्स ईसाईयों की बहुलता, देश में मजबूत हो रहे धुर दक्षिणपंथियों का विरोध और मस्जिद के निर्माण के लिए मंजूरी हासिल करने में देरी तक शामिल हैं.

अस्थिरता के बीच मुस्लिम आबादी भागकर यूरोपियन यूनियन की शरण में आने लगी- सांकेतिक फोटो (pxhere)


अनौपचारिक इमारतों में जमा होकर नमाज पढ़ते
इसके साथ ही लगातार ग्रीक चर्च मस्जिदों को लेकर अपना डर भी जताते रहे. इस बीच सबसे ज्यादा एथेंस में रह रहे मुसलमान प्रभावित हुए. किसी धार्मिक मौके पर वे नमाज पढ़ने के लिए कहां जाएंगे? कोई मस्जिद तो नहीं थी, लिहाजा वे अनौपचारिक इमारतों में इबादत या किसी चर्चा के लिए इकट्ठा हुआ करते. अब तक यही चला आ रहा था.

ये भी पढ़ें: क्यों पाकिस्तानी जनता दोस्त China से कोरोना वैक्सीन लेते हुए डर रही है? 

मस्जिद जैसा स्थापत्य नहीं दिखता 
अब एथेंस में पहली औपचारिक मस्जिद खुली तो है लेकिन उसे लेकर मुस्लिमों में काफी असंतोष है. सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक मस्जिद का स्थापत्य किसी भी तरह से मस्जिद जैसा नहीं, बल्कि किसी आम इमारत की तरह है. आयताकार स्ट्रक्चर में न तो कोई गुंबद है और न ही कोई मीनार है. वहीं दूसरे यूरोपियन शहरों में एक से बढ़कर एक खूबसूरत मस्जिदें दिखाई देती हैं.

6 नवंबर को एथेंस में पहली बार आधिकारिक मस्जिद में नमाज हुई- सांकेतिक फोटो


इस देश में मस्जिद पर बैन है
ग्रीस में तो तब भी हाल बेहतर हैं, स्वोवाकिया में मुस्लिमों की धार्मिक आजादी और सीमित है. यहां मुस्लिमों को मस्जिद बनाने की अनुमति नहीं है. दरअसल नवंबर 2016 को स्लोवाकिया ने एक कानून पास करके इस्लाम को आधिकारिक धर्म का दर्जा देने पर रोक लगा दी, यानी इस्लाम को स्लोवाकिया में एक धर्म के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा. इस बात को लेकर यूरोपियन यूनियन ने स्लोवाकिया की कई बार आलोचना भी की लेकिन देश का स्टैंड एकदम साफ है. 2014 के आसपास जब सीरिया में आईएसआईएस के आतंक के कारण लोग भागकर यूरोप में शरण ले रहे थे, तब भी स्लोवाकिया ने अपने यहां मुस्लिमों को शरण देने से साफ मना कर दिया था.

ये भी पढ़ें: वो बीमारी, जिसके कारण रूस में पुतिन का दौर बीतने के कयास लग रहे हैं? 

यूरोप में बढ़ रहा इस्लामोफोबिया
इस बीच यूरोप के कई देश इस्लामिक कट्टरता के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं. इनमें सबसे आगे फ्रांस है, जो एक कानून के तहत इस्लामिक अलगाववाद को खत्म करने की योजना बना रहा है. फ्रांस अकेला नहीं, जो इस्लामिक कट्टरता के खिलाफ बोल रहा है. स्कैंडिनेवियाई देशों जैसे डेनमार्क, स्वीडन और नॉर्वे में भी यही हाल है. वहां तेजी से लोग इस्लामोफोबिया की गिरफ्त में आ रहे हैं, जिसकी वजह यूरोप में बढ़े आतंकी हमलों को माना जा रहा है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज