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कमलम: अमेरिकी ड्रैगन फ्रूट के लिए संस्कृत नाम क्यों? जानिए प्रपोज़ल और कवायद

ड्रैगन फ्रूट.
ड्रैगन फ्रूट.

हैपीनेस और इम्यूनिटी (Immunity Booster) बढ़ाने वाले इस फल का पुराना नाता वियतनाम (Vietnam) से रहा है. लोग समझते हैं कि शायद यह चीन का फल (Chinese Fruit) हो लेकिन ऐसा नहीं है. यह भी जानिए कि नाम बदलने के पीछे भाजपा के सीएम ने क्या सफाई दी और क्यों?

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 21, 2021, 5:28 PM IST
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गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी (Gujarat CM Vijay Rupani) का कहना है कि ड्रैगन फ्रूट का नाम भारत में ‘कमलम’ रखना चाहिए क्योंकि अमेरिकी नाम एक तो अच्छा नहीं लगता और इस फल की पत्तियों और नोकों को देखकर कमल के फूल (Lotus) की याद आ ही जाती है. दक्षिण और मध्य अमेरिका (USA) में पाए जाने वाले देसी जंगली कैक्टस प्रजाति के इस फल को अमेरिकी पिटाया (Pitaya) भी कहते हैं. अब भारत में इसका नया नामकरण करने की कवायद हो रही है तो यह अपने आप में ही दिलचस्प बात है कि ऐसा क्यों हो रहा है!

जिस तरह कीवी फल होता है, तकरीबन वैसे ही फील वाला फल ड्रैगन फ्रूट है, बस इसका रंग अलग है. यानी कीवी आपको जिस तरह हरे रंग में दिखता है, ड्रैगन फ्रूट सफेद या लाल रंग का होगता है और पीले रंग का पिटाया भी होता है, लेकिन यह कम मिलता है. इस फल का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर देश वियतनाम है. यह फैक्ट ज़रूरी है कि वियतनामी इसे 19वीं सदी से ‘थान्ह लोंग’ कहते रहे, जिसका मतलब ‘ड्रैगन आइ’ होता है. यहीं से इसका अंग्रेज़ी में नाम ‘ड्रैगन फ्रूट’ प्रचलित हुआ.

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कहां होता है ये फल और कैसे खाते हैं?
ड्रैगन फ्रूट को लैटिन अमेरिका में भी उगाया जाता है. इसके अलावा थाईलैंड, ताईवान, चीन, ऑस्ट्रेलिया, इज़रायल और श्रीलंका के साथ ही भारत में भी उगाया जाता है. 1990 के दशक से भारत के कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, महाराष्अ्र, गुजरात, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और अंडमान में उगाया जा रहा है. इसके लिए शुष्क मिट्टी मुफीद होती है.

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स्वास्थ्य के लिए बेहद उपयोगी ड्रैगन फ्रूट को सुपरफूड कहा जाता है.


इसे आप बीच से आधा काटकर सीधे भी खा सकते हैं. या फिर इसके किनारे काटकर और चमड़े जैसा छिलका निकालकर इसका सफेद गूदा खा सकते हैं. ड्रैगन फ्रूट को स्मूदी या शेक बनाकर भी खाया जाता है. सलाद, केक और टाको जैसे व्यंजनों में भी इसका उपयोग होता है.



कितना हेल्दी है ये फल?
इस फल को सेहत के लिए बेहद उपयोगी बताया जाता है. इम्यून सिस्टम को मज़बूत करने के अलावा इस फल में एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर अच्छी मात्रा में होता है. इस फल के सवेन से ब्लड शुगर लेवल कम होता है. विटामिन सी के साथ ही खनिजों के भंडार के रूप में इसे सुपरफूड भी कहा जाता है. यही नहीं, इस फल के सवेन से शरीर में सेरोटॉनिन बनता है, जिसे ‘हैपीनेस केमिकल’ कहते हैं.

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क्यों बदला जा रहा है नाम?
इस आइडिया के पीछे कहानी यह है कि 2020 में 26 जुलाई को मन की बात कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी ने गुजरात स्थित कच्छ के किसानों की तारीफ इसलिए की थी वो ड्रैगन फ्रूट को उगाने के लिए देसी तरीकों का सहारा ले रहे थे और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की तरफ कदम बढ़ा रहे थे. इसके बाद 6 अगस्त को गुजरात वन विभाग के एक अधिकारी राम कुमार ने इस फल का नाम बदलकर कमलम रखे जाने का प्रस्ताव कृषि रिसर्च की भारतीय परिषद को भेजा था.

प्रस्ताव में कहा गया कि नए नाम से इसकी लोकप्रियता में इजाफा होगा और आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत इसके उत्पादन को बढ़ाने के रास्ते खुलेंगे. लेकिन इसके अलावा इस नाम के पीछे क्य कोई और एंगल भी है?

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क्या है भाजपा के साथ कनेक्शन?
भाजपा के चुनाव चिन्ह के बारे में आप जाते हैं. लेकिन सीधे तौर पर इस फल का लेना देना चुनाव चिह्न के सज्ञथ नहीं है. हालांकि गांधीनगर स्थित कोबा में भाजपा के मुख्यालय का नाम भी ‘कमलम’ है. यह इत्तेफाक है या फिर कोई तालमेल बिठाने की कोशिश? इस पर सफाई देते हुए रूपाणी ने कहा कि ‘दुनिया भर में इसे ड्रैगन फ्रूट के नाम से जाना जाता है? लेकिन इसके नाम से लोग इसे चीन का फल समझते हैं. ‘गुजरात सरकार इसका नाम बदलकर कमलम रखना चाहती है क्योंकि यह कमल के फूल जैसा दिखता है.’

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ड्रैगन फ्रूट का नाम बदले जाने के गुजरात के प्रस्ताव पर केंद्रीय विभाग विचार कर रहा है.


वहीं आईसीएआरर का कहना है कि गुजरात सरकार के प्रस्ताव को केंद्रीय कृषि मंत्रालय को भेज दिया गया है. बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव को पहले बॉटैनिकल सर्वे ऑफ इंडिया की मंज़ूरी की ज़रूरत होगी. हालांकि एक अधिकारी के हवाले से यह भी कहा गया चूंकि ड्रैगन फ्रूट भारतीय प्रजाति का फल नहीं है इसलिए इसके नये नामकरण को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी वैधानिक पहलू देखने होंगे.
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