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कुछ धर्म क्यों हमेशा करते हैं प्याज खाने से परहेज की बात

प्य़ाज के दाम बेशक आसमान छू रहे हैं लेकिन हिंदू और जैन धर्म में प्याज खाने से परहेज की बात पर जोर दिया गया है

प्य़ाज के दाम बेशक आसमान छू रहे हैं लेकिन हिंदू और जैन धर्म में प्याज खाने से परहेज की बात पर जोर दिया गया है

आखिर क्या वजह है कि हमारे यहां रसोई घरों में प्याज और लहसुन के आगमन को कभी अच्छी नजर से नहीं देखा गया. खासकर आयुर्वेद तो प्याज और लहसुन से दूर रहने की बात ज्यादा करता है.

  • News18Hindi
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    कई धर्म ऐसे हैं जिनमें लहसुन-प्याज खाने पर पाबंदी है. बहुत से रेस्टोरेंट और भोजनालय आपको मिल जाएंगे, जहां लिखा होगा- यहां लहसुन-प्याज से खाना नहीं बनता. कुछ लोग ऐसे मिल जाएंगे, जो पूरे तौर पर अपने खाने में प्यार-लहसुन से परहेज करते हैं. अब जबकि देश में फिर प्याज की कीमतें फिर आसमान छू रही हैं. इसको लेकर कोहराम मचा हुआ है तो ऐसे में ये जानना जरूरी है कि कुछ धर्मों में इससे परहेज की बात क्यों की गई है.

    खासकर हिंदू और जैन धर्म में प्याज और लहसुन के निषेध की बात की गई है. हिंदुओं में भी वैष्णव लोग आमतौर पर इससे दूर रहते हैं. किसी भी पूजा-पाठ की भोजन सामग्री में इसका इस्तेमाल कतई नहीं होता. जैन धर्म तो किसी भी जड़ वाले खाने से परहेज की बात करता है.

    एक मशहूर शेफ और लेखक कूरमा दास ना तो प्याज खाते हैं और ना ही लहसुन. वो कहते हैं, "मैं कृष्ण भक्त हूं और भक्ति योग करता हूं, इसलिए ना तो लहसुन खाता हूं और ना ही प्याज. भगवान कृष्ण के भक्त इन दोनों से परहेज करते हैं." ऐसा क्यों. इसका एक लंबा उत्तर है.

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    प्याज आयुर्वेद के अनुसार क्या है
    प्याज और लहसुन दोनों बॉटनी के अनुसार ऐलीएशस (हिन्दी में इसे लशुनी) परिवार के सदस्य हैं-प्याज की कई किस्मे हैं, वो सब इसी से ताल्लुक रखती हैं. आयुर्वेद के अनुसार, हमारा खाना तीन वर्गों में रखा जाता है-सात्विक, राजसिक और तामसिक.

    प्याज और लहसुन और इस परिवार की अन्य वनस्पतियां राजसिक और तामसिक खाने के तौर पर वर्गीकृत की गई हैं


    खाना हमारी अच्छाई, लालसाओं, और जहालत पर असर डालते हैं. प्याज और लहसुन और इस परिवार की अन्य वनस्पतियां राजसिक और तामसिक खाने के तौर पर वर्गीकृत की गई हैं, मतलब ये हुआ कि वो हमारी लालसाओं और अज्ञानता को बढाती हैं.

    सात्विक खाने में प्याज से करते हैं परहेज 
    ये भी कहा गया है कि जो लोग शुद्ध सात्विक और सादगी से रहते हैं और वैष्णव लोग-जो भगवान विष्णु, राम और कृष्ण को मानते हैं-वो हमेशा अपने खाने को सात्विक ही रखते हैं.

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    सात्विक खाने में ताजे फल, सब्जियों, जड़ी-बूटियों और दुग्ध उत्पाद, अनाज और फलीदार भोजन पर जोर दिया जाता है. इसीलिए वैष्णव लोग हमेशा राजसिक और तामसिक खाने से दूर रहते हैं. प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करते. अगर वो ऐसा करते हैं तो वो भगवान भक्त होने योग्य नहीं होते.

    अगर इसका सेवन किया जाए तो क्योंकि वो शरीर की चेतना जागृत करने के काम में बाधा पेश करते हैं. दिमाग को एकाग्न नहीं होने देते.


    क्या है वजह 
    आयुर्वेद के अनुसार, प्याज और लहसुन से दूर होने की उसकी सबसे बड़ी वजह ध्यान और भक्ति के लिए अहितकर होना है. अगर इसका सेवन किया जाए तो क्योंकि वो शरीर की चेतना जागृत करने के काम में बाधा पेश करते हैं. दिमाग को एकाग्न नहीं होने देते.

    पाश्चात्य चिकित्सा की कुछ शाखाएं प्याज के लशुनी परिवार को स्वास्थ्य के लिहाज से लाभदायक मानती. लहसुन के बहुत से गुण गिनाए जाते हैं. उसे नेचुरल एंटीबॉयोटिक माना जाता है, लेकिन अब भी जो नए अध्ययन हो रहे हैं, उसमें लहसुन और प्याज खाने को अब भी बहुत अच्छी दृष्टि से नहीं देखा जा रहा है.
    लहसुन के बारे में माना जाता है कि उसको कच्चा खाने से हानिकारक बाटूलिज्म बैक्टीरिया आपके शरीर में जगह बना सकता है और इससे घातक बीमारियां हो सकती हैं. रोमन कवि होरास ने लिखा भी है कि लहसुन को हैमलाक (एक विष का पौधा) से ज्यादा नुकसानदेह है.

    प्याज के शास्त्रीय एवं मानस शास्त्रीय प्रयोग हो चुके हैं. प्याज के छिलके निकालते समय अंदर की गंध मन को विचलित कर देती है


    नर्व सिस्टम पर असर डालती है
    प्याज और लहसुन को आध्यात्मिक लोग आमतौर नहीं खाते क्योंकि वो आपके नर्व सिस्टम पर असर डालते हैं. आयुर्वेद का कहना है कि लहसुन सेक्स पॉवर क्षति की सूरत में टॉनिक की तरह होता है, जो कामोत्तेजक का काम करता है.

    प्याज के शास्त्रीय एवं मानस शास्त्रीय प्रयोग हो चुके हैं. प्याज के छिलके निकालते समय अंदर की गंध मन को विचलित कर देती है. आंखों से पानी आना इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है. प्याज के सेवन का असर रक्त में रहने तक मन में काम वासनात्मक विकार मंडराते रहते हैं. प्याज चबाने के कुछ समय पश्चात् वीर्य की सघनता कम होती है और गतिमानता बढ़ जाती है. परिणामस्वरूप वासना में वृद्धि होती है. बरसात के दिनों में प्याज खाने से अपच एवं अजीर्ण आदि उदर विकार उत्पन्न हो जाते हैं.
    पवित्र रसोईघर में प्याज-लहसुन का प्रयोग अपवित्र माना जाता है. ये पूजा-पाठ में पूरी तरह प्रतिबंधित है. धार्मिक अनुष्ठान-व्रत आदि मौकों पर भोजन में लहसुन-प्याज का इस्तेमाल नहीं किया जाता.



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