दुनिया में जहां भी कोरोना की वैक्सीन बनेगी, उसका रिश्ता हैदराबाद से क्यों होगा

दुनिया में जहां भी कोरोना की वैक्सीन बनेगी, उसका रिश्ता हैदराबाद से क्यों होगा
दुनिया की तमाम वो लैब्स और कंपनियां जो कोरोना की वैक्सीन विकसित कर रही हैं, उन्होंने उसके बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए हैदराबाद की कंपनियां से बात की हुई है

दुनियाभर में जहां कहीं भी कोरोना की वैक्सीन (developing covid vaccine) विकसित की जा रही हैं, उन सभी में ज्यादातर के उत्पादन का काम हैदराबाद में होगा. इस शहर को वर्ल्ड वैक्सीन कैपिटल (World Vaccine Capital) कहा जाने लगा है. ये वैक्सीन विकसित करने की प्रक्रिया के किसी ना किसी चरण में दुनियाभर की लैब्स के साथ सहयोग कर रहा है. जानिए इसके बारे में

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 14, 2020, 4:01 PM IST
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पिछले कुछ दिनों में ये खबरें आईं हैं कि तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद किस तरह दुनिया की वैक्सीन कैपिटल बन गई है. दुनियाभर में जितनी भी टॉप लैब्स या शीर्ष फार्मा कंपनियां होंगी, सबका कोई ना कोई रिश्ता हैदराबाद से है, जो दुनियाभर की दवाओं और वैक्सीन उत्पादन के विशालकाय हब के तौर पर उभरा है. माना जा रहा है दुनियाभर में कहीं भी कोरोना वैक्सीन विकसित हो जाए लेकिन उसका बड़े पैमाने पर उत्पादन हैदराबाद की कंपनियां ही करेंगी.

दुनियाभर की 60 फीसदी वैक्सीन का उत्पादन भारत में होता है और भारत में हैदराबाद में. वैसे तो तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में 2500 से ज्यादा फार्मा कंपनियां हैं लेकिन उनमें सबसे बड़ी और शीर्ष कंपनियां हैदराबाद में हैं, जो रिसर्च एंड डेवलपमेंट से लेकर क्लिनिकल ट्रायल और बड़े पैमाने पर उत्पादन में सक्रिय हैं.

हैदराबाद की टॉप फार्मा कंपनियां की बड़े पैमाने की उत्पादन क्षमता का लोहा विदेशी कंपनियां भी मानती हैं, इसीलिए कोरोना वैक्सीन विकसित करने में लगी हुई दुनिया की तकरीबन सभी कंपनियों ने उसके प्रोडक्शन के लिए हैदराबाद की कंपनियों से बातचीत की हुई है. माना जा रहा है कि रूस में विकसित हुई कोरोना वैक्सीन स्पुतनिक वी का उत्पादन भी यहां की कोई कंपनी शुरू करने वाली है.



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ये कहा जा रहा है कि दुनियाभर में जहां कहीं भी कोई वैक्सीन विकसित की जा रही है तो उसकी सारी प्रक्रिया में किसी ना किसी भूमिका में हैदराबाद जरूर है. साथ ही हैदराबाद की कुछ कंपनियां खुद भी अपनी वैक्सीन विकसित करने की दौड़ में हैं.

उच्च गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता से लैस कंपनियां
अगर आप हैदराबाद जाएं तो आपको वहां हर कोने में अपने कर्मचारियों लाने - ले जाने वाली उन बड़ी फार्मा कंपनियों की बसें दिख जाएंगीं, जो हैदराबाद के बाहरी इलाकों में फैली हुई हैं. ये सभी कंपनियां आमतौर पर ऊंचे मानकों और गुणवत्ता वाले उत्पादन क्षमता से लैस हैं. दुनियाभर में अब माना जाने लगा है कि केवल भारत और चीन की दवा कंपनियां ही उत्पादन क्षमता में सबसे आगे हैं.

hyderabad
हैदराबाद में इस समय दुनियाभर की ऐसी शीर्ष फार्मा कंपनियां या बॉयोटेक कंपनियां हैं, जिनकी धाक दुनियाभर में है.


दुनियाभर की लैब्स और फार्मा कंपनियों से टाईअप
हैदराबाद की कंपनी भारत बॉयोटेक की कोरोना वैक्सीन कोवाक्सिन की खासी चर्चाएं हम सुनते रहे हैं. ये वैक्सीन ट्रायल चरण में है. उसका उत्पादन खुद भारत बॉयोटेक करेगी. जानसन एंड जानसन एडी6 कोरोना2 तो फ्लू जेस कोरोफ्लू बनाने की तैयारी में है. सनोफी की वैक्सीन भी विकास के चरण में है. इन सभी के साथ हैदराबाद की कंपनियों के डोज उत्पादन के टाईअप हैं.

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उन सभी की कोरोना वैक्सीन हैदराबाद में ही बनेगी
सनोफी अगर 2021 के पहले हाफ तक वैक्सीन बना देती है तो उसका उत्पादन हैदराबाद की शांता बॉयोटेक्निक्स में होगा. शांता का अधिग्रहण सनोफी ने 2009 में किया था. वही हैदराबाद की एक और कंपनी बॉयोलॉजिकल ई लिमिटेड का टाईअब बेमलर कॉलेज ऑफ मेडिसिन टैक्सास से है, जो खुद वैक्सीन विकसित कर रही है. उसका उत्पादन भी यहीं होगा.

दुनियाभर में जहां कहीं भी कोरोना की वैक्सीन विकसित हो रही हैं, उनके तमाम प्रोसेस में कहीं ना कहीं हैदराबाद का भी सहयोग होगा


भारत-चीन की फार्मा कंपनियों की उत्पादन क्षमता दुनिया में सबसे ज्यादा
दरअसल दुनियाभर में जहां भी कोरोना की वैक्सीन विकसित करने का काम चल रहा है, वो लैब्स एकेडमिक लैब या गैर वैक्सीन कंपनियां हैं, जिनके पास पर्याप्त संरचना नहीं है. ना तो उनके पास क्लिनिकल ट्रायल की संरचना है और ना ही उत्पादन क्षमता, लिहाजा उन्हें इसके लिए भारत या चीन की कंपनियों की मदद लेनी होगी. मौजूदा माहौल में दुनिया की शीर्ष कंपनियां भारत को ज्यादा मुफीद पा रही हैं.

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हैदराबाद की एक जानी फार्मा कंपनी अरविंदो फार्मा ने अमेरिका की रिसर्च एंड डेवलपमेंट कंपनी का अधिग्रहण किया हुआ है, जहां वो वैक्सीन विकसित कर रही है.

1.6 बिलियन डालर की इंडस्ट्री
हैदराबाद फार्मा कंपनियों के बारे में जानकारी देने वाली राष्ट्रीय औषधि एवं शिक्षा अनुसंधान परिषद यानि नाईपर हैदराबाद की साइट इस बारे में काफी कुछ कहती है.

world vaccine capital
हैदराबाद को देश का बल्क ड्रग्स कैपिटल तो कहा ही जाता था लेकिन अब उसे वर्ल्ड वैक्सीन कैपिटल भी कहा जाने लगा है.


बकौल इसके हैदराबाद देश का फार्मा हब है. फार्मा सेक्टर में बडे़ पैमाने पर ड्रग्स के उत्पादन में ये पहले नंबर और फार्मूलेशन में तीसरे नंबर पर. देश की 40 फीसदी बल्क ड्रग्स यर्हीं बनती हैं तो 50 फीसदी बल्क ड्रग्स का निर्यात भी यही शहर करता है. यहां की फार्मा सेक्टर कंपनियों की कीमत करीब 1.6 बिलियन डॉलर की है जबकि हर साल 500 मिलियन डॉलर का निर्यात होता है.

हैदराबाद की बड़ी दवा कंपनियां
हैदराबाद की बड़ी दवा कंपनियों में डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज, अरविंदो फार्मास्यूटिकल्स, माईलान, नोवार्टिस, निकोलस पीरामल, दीवी लैब्स, नाटको फार्मा, ग्लैंड फार्मास्यूटिकल्स आदि शामिल हैं. साथ एक्टिव फार्मास्यूटिकल्स इंग्रेडिएंट (एपीआई) यूनिट्स हैं, जो तेजी से बढ़ रही हैं. हैदराबाद में भारत बॉयोटेक, बॉयोलॉजिकल ई लिमिटेड, शांता बॉयोटेक, इंडियन इम्युनोलॉजिकल्स, ग्लोबियन बॉयो जैसी वैक्सीन निर्माता कंपनियां हैं.

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क्लिनिकल ट्रायल सेक्टर भी 
हैदराबाद में क्लिनिकल ट्रायल सेक्टर भी तेजी से बढ़ रहा है, इसमें भी कई कंपनियों ने बहुत तेजी से अपने पैर पसारे हैं.

हैदराबाद फार्मा कंपनियों की तरक्की का राज
हैदराबाद फार्मा हब के साथ बल्क ड्रग्स के तौर पर दो वजहों से उभरा है. पहला यहां एक जमाने में इंडियन ड्र्ग्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड (आईडीपीएल) की स्थापना से और दूसरा यहां के लोगों के एंटरप्राइज नेचर के साथ पर्याप्त संख्या टैलेंट पूल होने से. आईडीपीएल की स्थापना यहां 1961में हुई थी, जिससे इस शहर को ड्रग्स मैन्युफैक्चरिंग में एक माहौल मिला. उसके बाद यहां धीरे धीरे फार्मा कंपनियां खुलती चली गईं.
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