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इस तरह लाखों कोरियाई लोगों की रगों में दौड़ रहा है अयोध्या का खून

News18Hindi
Updated: November 6, 2019, 6:00 PM IST
इस तरह लाखों कोरियाई लोगों की रगों में दौड़ रहा है अयोध्या का खून
कोरिया का पारंपरिक नृत्य

अयोध्या में पैदा हुई रानी सूरीरत्ना यानि हौ ह्वांग और राजा सूरों के वंशजों ने 7वीं सदी में कोरिया में विभिन्न राजघरानों की स्थापना भी की, जिन्हें ‘कारक राजवंश’ के नाम से जाना जाता है.

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  • Last Updated: November 6, 2019, 6:00 PM IST
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क्या आप इस बात पर विश्वास करेंगे कि कोरिया के बहुत ढेर सारे लोगों के अंदर अयोध्या का खून दौड़ रहा है.  इसकी एक सच्ची कहानी है. दरअसल अयोध्या का एक खास कनेक्शन दक्षिण कोरिया से है.  सैकड़ों साल पहले अयोध्या की एक राजकुमारी की शादी कोरियाई राजवंश में हुई थी. फिर वो वहां की महारानी बनीं. कहा जा सकता है कि इस वंश से जुड़े लाखों लोगों में भारतीय और अयोध्या का खून दौड़ रहा है.

अयोध्या की इस रानी का नाम सूरीरत्ना था. कोरिया में उन्हें हौ ह्वांग के नाम से जाना जाता है. राजकुमारी को श्रद्धांजलि देने एक खास वंश के सैकड़ों कोरियाई नागरिक अयोध्या आते हैं. मान्यता है कि 48सीई (कॉमन ईरा) वीं सदी में यानि 2000 साल पहले उनका विवाह कोरिया के गया राज्य के राजा किम सूरो से हुआ था.

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सपना देखने के बाद राजकुमारी पति की तलाश में निकल पड़ीं

कहा जाता है कि 16 साल की उम्र में सूरीरत्ना को सपना आया था कि समुद्र पार करने के बाद उन्हें पति मिलेगा. उन्होंने इस सपने के बारे में अपने माता-पिता को बताया. फिर अपने भाई के साथ पति की खोज में निकल गईं. कुछ मान्यताएं ये भी हैं कि ये सपना उनके पिता को आया था. जिसके बाद उन्होंने अपनी बेटी और बेटे के समुद्र से बताई गई दिशा में जाने की व्यवस्था की.

अयोध्या की राजकुमारी सूरीरत्ना जो कोरिया की महारानी बनी


नाव से समुद्र पार करने के बाद सूरीरत्ना कोरिया पहुंची. उपलब्ध जानकारी के अनुसार सुरीरत्ना दक्षिण कोरिया के किमहये राजवंश ‘ग्योंगासांग प्रांत’ के राजा सुरों से मिलीं. उन्हें अपने सपने के बारे में बताया और दोनों की शादी हो गई.
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अपने साथ ले गईं थीं अयोध्या का पत्थर 
शादी के बाद सूरीरत्ना का नाम बदल कर हौ ह्वांग रख दिया गया. कहा जाता है कि वो अपने साथ एक पत्थर भी लेकर गईं थीं. जिसे उनके निधन के बाद उनकी कब्र पर लगा दिया गया. ये कहानी काल्पनिक तो लग सकती है. लेकिन कई पुरातत्व अधिकारियों ने ऐसे सबूत दिए जिसे जाहिर हो गया कि अयोध्या और कोरिया की सभ्यताओं में काफी साम्य है. अयोध्या की कई परंपराएं वहां मनाई जाती हैं.

अयोध्या में महारानी का स्मारक


कारक राजवंश गोत्र को लाखों हैं कोरिया में
रानी सूरीरत्ना यानि हौ ह्वांग और राजा सूरों के वंशजों ने 7वीं सदी में कोरिया में विभिन्न राजघरानों की स्थापना भी की, जिन्हें ‘कारक राजवंश’ के नाम से जाना जाता है. बाद में इसी राजवंश के नाम पर कोरिया का नामाकरण हुआ था.

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कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति किम डेइ जंग एवं पूर्व प्रधानमंत्री हियो जियोंग एवं जोंग पिल किम इसी राजवंश से आते थे. दक्षिण कोरिया में स्वयं को इस गोत्र का मानने वाले तकरीबन 60 लाख कोरियार्इ लोग है, जो वर्तमान जनसंख्या का लगभग 10 प्रतिशत है. इस कारण अयोध्या और भारत से इनका खासा लगाव है. वैसे तो वहां की सभी रानियों को सम्मान दिया जाता है किन्तु रानी हौ ह्वांग को वहां सबसे अधिक माना जाता है.

सूरीरत्ना का मंदिर
पुरातत्विदों ने कुछ ऐसे पत्थर खोजे हैं, जिन पर दो मछलियां बनी हुई हैं. ये पत्थर साबित करते हैं कि कोरिया और अयोध्या के बीच सांस्कृतिक धरोहरों का संबंध था. कोरिया के गिमहे शहर की राजशाही कब्रों के डीएनए नमूनों से भी भारतीय और कोरियाई सभ्यताओं के संबंध को प्रमाणित किया जाता रहा है.यूपी सरकार ने दो साल पहले अयोध्या में इस राजकुमारी का मंदिर बनाने का प्रस्ताव पास किया था.

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दस्तावेजों में मिलता है जिक्र
13वीं सदी के कोरियाई दस्तावेजों में राजकुमारी सूरीरत्ना का जिक्र मिलता है. कोरिया के सांगुक यूसा नाम के दस्तावेजों में राजकुमारी सूरीरत्ना को कोरिया के गया राज्य के राजा सूरो की पत्नी बताया गया है. सांगुक युसा को बौद्ध भिक्षुओं के एक समूह ने एकत्रित किया था जो कि कोरिया के तीन साम्राज्यों से जुड़े तथ्यों पर आधारित है. इनमें बेजेके, सिला और गोगुरेयो साम्राज्य शामिल थे. आज के कोरिया का नाम इसी गोगुरेयो साम्राज्य से बना है.

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हर साल आते हैं कारक वंश के लोग 
राजकुमारी सूरीरत्ना को गया की पहली महारानी का सम्मान भी मिला था. दस्तावेज बताते हैं कि राजकुमारी की कब्र गिमहे शहर में है. इस पर लगा पत्थर वही है जो राजकुमारी अयोध्या से लेकर गईं थीं. कारक वंश के लोगों का एक समूह हर साल फ़रवरी मार्च के दौरान इस राजकुमारी की मातृभूमि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने अयोध्या आता है. कोरियार्इ दस्तावेजों के अनुसार 57 वर्ष की आयु में महारानी का देहांत हो गया था.

अयोध्या में स्मारक
अयोध्या में महारानी हौ का एक स्मारक भी है. संत तुलसीघाट के पास ये स्मारक एक छोटे पार्क में बनाया गया है.
अयोध्या के पूर्व राजपरिवार के सदस्य बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र यहां आने वाले कारक वंश के लोगों की मेहमाननवाज़ी करते रहे हैं.पिछले कुछ सालों में वो भी कई बार दक्षिण कोरिया जा चुके हैं. बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र 1999-2000 के दौरान कोरिया सरकार के मेहमान रह चुके हैं.

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First published: November 6, 2019, 5:53 PM IST
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