क्यों दमदार दिखती है भारतीय क्रिकेट टीम की बॉडी लेंग्वेज

जिसने भी दो दशक पहले की भारतीय क्रिकेट टीम को देखा होगा, वो कहेगा अब हम कहीं अधिक कांफिडेंट लगते हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि हम अच्छा प्रदर्शन भी कर रहे हैं और धन के लिहाज से मजबूत पोजिशन में हैं. हमारी ताकत भी वर्ल्ड क्रिकेट में बढ़ी है

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: June 17, 2019, 1:58 PM IST
क्यों दमदार दिखती है भारतीय क्रिकेट टीम की बॉडी लेंग्वेज
टीम इंडिया जब मैदान में घुसती है तो उसकी बॉडी लेंग्वेज वाकई देखते बनती है
Sanjay Srivastava
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: June 17, 2019, 1:58 PM IST
भारत और पाकिस्तान का बहुप्रतीक्षित मुकाबला हो चुका है. भारत ने 89 रनों से चिर प्रतिद्वंदी पाकिस्तान को बुरी तरह पटखनी दी है. खेल का कोई ऐसा डिपार्टमेंट नहीं था, जिसमें पाकिस्तान की टीम ने असर छोड़ा हो. रविवार को मैनचेस्टर में हुए मुकाबले के पहले और खत्म होने के बाद सारे एक्सपर्ट और कमेंटेटर ये कहते सुने गए कि टीम इंडिया और पाकिस्तानी टीम की बॉडी लेंग्वेज में जमीन आसमान का अंतर था.
दो दशक पहले भारत में ही क्रिकेट प्रेमी कहा करते थे कि आस्ट्रेलियाई टीम जब मैदान पर आती है तो उनकी बॉडी लेंग्वेज किसी टाइगर की तरह होती है-कांफिडेंट, चपल और फिट. उसकी तुलना में भारतीय क्रिकेटरों को ढीला ढाला कहा जाता था.
लेकिन अब सबकुछ बदल गया है. अब टीम इंडिया की बॉडी लेंग्वेज किसी भी तुलना में बीस ही लगती है और बॉडी लेंग्वेज में खास बात तभी आती है, जब आप सफल हो रहे हों और आपने खुद को सफल होने लायक बना लिया हो. वो कौन सी बातें हैं, जिसने भारतीय टीम की चाल और ढाल बदल दी है.

डेढ़ दशकों में दो वर्ल्ड कप जीतना

2007 में भारतीय टीम ने जब वेस्टइंडीज के वर्ल्ड कप में बहुत बुरी पराजय का सामना किया तो उसके बाद उसने खुद को पूरी तरह बदल डाला. इस बीच वर्ष 2007 में ही हुए टी20 वर्ल्ड कप में चैंपियन बनने से जहां भारत में एक जमाने की क्रिकेट के लिए दरवाजा खुला, वहीं 2011 में महेंद्र सिंह धौनी की अगुवाई में भारत ने मुंबई में वन-डे क्रिकेट के वर्ल्ड कप को जिस शानदार अंदाज में जीता, उसने भारत में सबकुछ बदल दिया. इन दोनों जीत के साथ ही भारत ने लगातार टेस्ट और वन-डे क्रिकेट में अपनी टॉप रैकिंग भी बनाए रखी. इससे भारत में क्रिकेट का ढांचा और मजबूत हुआ.

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आईसीसी में कंट्रोल
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एक जमाना था जब 1987 का वर्ल्ड कप भारत में कराने के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने आईसीसी को जो गारंटी मनी दी, वो उसने उधार लेकर दी थी. लेकिन उस वर्ल्ड कप और प्रसारण अधिकारों से आने वाले धन ने बीसीसीआई के अधिकारियों को सीखा दिया कि क्रिकेट से पैसा कैसे कमाना चाहिए.

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फिर भारत में आए आर्थिक उदारीकरण ने क्रिकेट को सबसे ज्यादा फायदा पहुंचाया. जो बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत आईं उन्होंने क्रिकेट में जमकर पैसा लगाया. नतीजा ये हुआ कि आईसीसी के पास सबसे ज्यादा पैसा भारत से पहुंचने लगा.

इससे बीसीसीआई को आईसीसी में ना केवल रूतबा हासिल हुआ बल्कि एक खास कंट्रोल भी मिला. अब कभी भारतीय क्रिकेटर अतीत की तरह आईसीसी के भेदभाव के शिकार नहीं हो पाते.

भारतीय क्रिकेटरों के पास अब बेशुमार पैसा है, बेहतर प्रदर्शन, अच्छा पैसा और उम्दा फिटनेस ने टीम के खिलाड़ियों की चाल-ढाल को बदल डाला है


भारतीय क्रिकेटरों को मिलने वाला बेशुमार पैसा
एक जमाना था जब भारतीय क्रिकेटरों को बहुत कम धन हर मैच को खेलने की एवज में मिलता था. 70 और 80 के दशक क्रिकेटरों को इतना कम पैसा मिलता था कि वो ना केवल आर्थिक असुरक्षा का जीवन जीते थे बल्कि पैसा कमाने के लिए इंग्लिश काउंटी क्रिकेट से लेकर एड कामर्शियल करार की तलाश में रहते थे लेकिन वहां भी वो मामूली धन ही पाते थे लेकिन अब स्थितियां एकदम बदल गई हैं.

वर्ल्ड क्रिकेट में सबसे ज्यादा पैसा भारतीय क्रिकेटर कमाते हैं. फिर उनके पीछे हमेशा मंहगे कामर्शियल करार के लिए बड़े बड़े ब्रांड्स लाइन लगाए रहते हैं. अब घरेलू क्रिकेट में खेलने वाला क्रिकेटर भी लाखों-करोड़ों कमा लेता है, भारतीय क्रिकेटरों के पास आए बेशुमार धन, स्टेटस और पोजिशन उन्हें एक नये कांफिडेंस से लबालब कर दिया है.

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आईपीएल ने बदली तस्वीर
सही बात ये भी है कि वर्ष 2008 में भारत में इंडियन प्रीमियर लीग की शुरुआत भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी गेम चेंजर साबित हुई. इससे दो बातें हुईं. एक तो इसने भारतीय क्रिकेटरों को बहुत कंपटीटीव और फिट बना दिया तो दूसरी बात ये रही कि इस लीग ने उन्हें बहुत पैसा दिया.

अब भारतीय क्रिकेटर लगातार खेलते हैं. इसके लिए खुद को बहुत ज्यादा फिट रखने पर ध्यान देते हैं. बेहतर फिटनेस से निश्चित तौर पर उनका प्रदर्शन भी बढिया हो रहा है.

फिटनेस लेवल पर कमाल
डेढ़ दो दशक पहले तक जो भारतीय क्रिकेटर होते थे, वो अपनी फिटनेस पर बहुत ध्यान नहीं देते थे. हमारे देश में फिटनेस से जुड़े अच्छे जिम और उपकरण के साथ ट्रेनर भी मौजूद नहीं थे.

नई जेनरेशन के जो भी क्रिकेटर अब टीम में आ रहे हैं या भारतीय घरेलू क्रिकेट में खेलते हैं, वो अपनी फिटनेस पर बहुत ध्यान देते हैं. उन्हें फिटनेस के महत्व का अंदाज बहुत अच्छी तरह पता चल गया है. पहले भारतीय क्रिकेटर फील्डिंग में फिसड्डी माने जाते थे. अब इसका उल्टा हो गया है. फिर जिम में घंटों बिताने के कारण उनकी बैटिंग और बॉलिंग की क्षमता भी बढ़ गई है. बेहतर फिटनेस आपको ज्यादा परफेक्ट बनाती है.

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उम्दा प्रदर्शन
90 के दशक से भारतीय क्रिकेट बदलनी शुरू हुई. पहले हम टेस्ट क्रिकेट में सौरव गांगुली की कप्तान में दुनिया की नंबर एक टीम बने, फिर वन-डे में झंडा लहराया. इसके बाद टी20 में भी टीम इंडिया का दबदबा दिखने लगा.

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अब टीम इंडिया चाहे घरेलू सीरीज हो फिर विदेशी धरती पर खेले जाने वाले मैच, उनमें उसका प्रदर्शन बेहतर रहता है. इसका असर भी बॉडी लेंग्वेज में पड़ता है. बॉडी लेंग्वेज और सफलता का चोली दामन का रिश्ता होता है. इसमें कोई शक नहीं कि भारतीय टीम में इस समय जो क्रिकेटर हैं, उनमें कई दुनिया के दिग्गज क्रिकेटर माने जाते हैं, उसमें कप्तान विराट कोहली, महेंद्र सिंह धौनी, रोहित शर्मा, शिखर धवन, बुमराह, भुवनेश्वर, चहल आदि शामिल हैं.

अगर आप जीत रहे हों, टीम में दमदार खिलाड़ी हों और किसी आपके रिकॉर्डस असरदार हों तो इसका असर भी बॉडी लेंग्वेज में दिखने ही लगता है


असरदार रिकॉर्ड
अगर हम किसी टीम के खिलाफ बार बार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हों तो हमारे उम्दा रिकार्ड भी खुद ब खुद वो कांफिडेंस देते हैं कि चाल-ढाल यानि बॉडी लेंग्वेज बदल जाती है. वर्ल्ड कप क्रिकेट में खेल रही भारतीय क्रिकेट टीम ने पिछले चार सालों में शानदार प्रदर्शन किया है. फिर पाकिस्तान की टीम को हम वर्ल्ड कप में छह बार हरा चुके थे. खिलाड़ियों से लेकर टीम का बेहतर रिकॉर्ड खुद बॉडी लेंग्वेज को उम्दा बना देते हैं.

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First published: June 17, 2019, 1:54 PM IST
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