Explained: क्यों भारत की रूस से हथियार डील अमेरिका को भड़का रही है?

अमेरिकी दुश्मन रूस से डील करने पर भारत और अमेरिका के संबंध खराब हो सकते हैं- सांकेतिक फोटो (pixabay)

रूस से S-400 मिसाइल सिस्‍टम (S-400 missile system) की खरीदी के लिए भारत ने अरबों डॉलर की डील की. अमेरिका इसपर भारत से नाराजगी जता रहा है. वो तुर्की पर भी इसी सिस्टम की डील के चलते पाबंदी लगा चुका.

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    चीन और पाकिस्तान से बढ़ते तनाव के बीच भारत अपनी सेना को जल्द से जल्द अत्याधुनिक हथियारों से लैस कर रहा है. इसी कड़ी में उसने रूस से रूस निर्मित S-400 वायु रक्षा प्रणाली खरीदने के लिए 5 अरब डॉलर का सौदा किया. हालांकि नए अमेरिकी राष्ट्रपति भारत को रूस से हथियारों की खरीदी पर चेता रहे हैं. अंदेशा ये भी है कि अमेरिकी दुश्मन रूस से डील करने पर भारत और अमेरिका के संबंध खराब हो सकते हैं.

    अमेरिका और रूस के बीच शीत काल से चले आ रहे तनाव का असर दूसरे देशों पर भी पड़ने लगा है. हाल ही में अमेरिका ने रूस से हथियारों की खरीदी पर तुर्की को धमकाया और यहां तक कि उसपर कई तरह के प्रतिबंध भी लगा दिए. ये पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के आखिरी दिनों की बात है. हालांकि भारत भी तब रूस से ही हथियारों की डील कर रहा था लेकिन उसपर अमेरिका पहरा इतना कड़ा नहीं था. अब अमेरिका में नई सत्ता आने के साथ माना जा रहा है कि तुर्की के बाद हमारे देश पर भी अमेरिकी गाज गिर सकती है.

    भारत रूस से 5.4 अरब डॉलर में एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम ले रहा है (Photo- news18 Gujarati)


    ये सारा मामला एक खास हथियार S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम की खरीद से जुड़ा है. भारत रूस से 5.4 अरब डॉलर में एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम ले रहा है. इसकी वजह ये है कि चीन ने भी लद्दाख सीमा पर यही सिस्टम तैनात कर रखा है. चीन के दबाव में न आने के लिए भारत को जाहिर तौर पर इसकी जरूरत है. लेकिन अमेरिका इस सौदे में अड़ंगा डाल रहा है. बता दें कि वो पहले ही तुर्की पर रूस से इसी डील के चलते ‘काउंटरिंग अमेरिकाज एडवरसरीज थ्रू सैंक्शन्स एक्ट (CAATSA) की मदद से प्रतिबंध लगा चुका है.

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    दरअसल अमेरिका को डर है कि वो तुर्की इस सिस्टम का इस्तेमाल अमेरिका के खिलाफ करेगा. इस सिस्टम के जरिए अमेरिकी F-16 फाइटर जेट में टोह लेने का शक खुद पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति भी ट्रंप जता चुके थे. इस सिस्टम को स्टील्थ लड़ाकू विमानों के लिए खतरे की तरह देखा जाता है क्योंकि इससे वे गुप्त नहीं रह पाते हैं. बीते दिनों ऐसी रिपोर्ट्स भी आ रही थीं कि तुर्की सेना इस सिस्टम से अमेरिकी एफ-16 फाइटर प्लेन की टोह ले रही है.

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    अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन पर फिलहाल अर्थव्यवस्था को लेकर भारी दबाव है (Photo- goodfreephotos)


    आखिर ये S-400 सिस्टम क्या है, जिसे लेकर अमेरिका तुर्की पर इतना सख्त हुआ और किसलिए इस सिस्टम की जरूरत भारत को है? ये जमीन से हवा में वार करने वाला सिस्टम (SAM) है. इसे अपनी तरह का दुनिया का सबसे घातक सिस्टम माना जाता है, जो मध्यम से लंबी दूरी तक वार करता है. रूस के बनाए इस सिस्टम के बारे में माना जाता है कि ये अमेरिकी रक्षा प्रणाली से भी कहीं ऊपर के स्तर का है.

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    भारत की इस बेहतरीन सिस्टम की खरीदी के पीछे चीन काम करता है. दरअसल चीन ने भी साल 2015 में ही इसकी खरीदी के लिए रूस से सौदा किया और साल 2018 में इसकी डिलीवरी भी शुरू हो गई. ये चीन के लिए गेम-चेंजर की तरह माना गया, वहीं भारत के लिए ये खतरनाक हो सकता है. खासकर फिलहाल पूर्वी लद्दाख में जिस तरह के हालात बने हुए हैं, उसमें किसी चुनौती से इनकार नहीं किया जा सकता.

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    S-400 सिस्टम के जरिए अमेरिकी F-16 फाइटर जेट में टोह लेने का शक पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भी जता चुके थे


    वैसे अमेरिका का गुस्सा इस बात पर भी है कि देश रूस से हथियारों की खरीदी क्यों कर रहे हैं, जबकि अमेरिका भी हथियारों की सप्लाई कर सकता है. बता दें कि भारत और चीन के अलावा तुर्की ने तो सौदा किया ही, साथ ही इराक और कतर ने भी S-400 सिस्टम खरीदी में दिलचस्पी दिखाई है.

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    ऐसी डील्स से अमेरिकी हथियार लॉबी को तो सीधा नुकसान हो ही रहा है, साथ ही रूस के फायदे के चलते भी अमेरिका इस तरह की डील को नुकसान मान रहा है. बीते पांच सालों में दुनिया में बेचे गए कुल हथियारों का करीब एक तिहाई हिस्सा यानी करीब 34 फीसदी अकेले अमेरिका ने बेचे. इस देश से हथियार कम से कम 98 देशों को बेचे जाते हैं. इनमें बड़ा हिस्सा युद्ध विमानों का है. दूसरी ओर रूस दुनिया के 47 देशों को अपने हथियार बेचता है. जाहिर है कि अब मिसाइल सिस्टम की बिक्री बढ़ने पर रूस डील में अमेरिका से आगे हो सकता है.

    यही वजह है कि वो तुर्की पर भड़का हुआ है. साथ ही उन सारे देशों को भी धमका रहा है, जो रूस से रक्षा उपकरणों की डील में हैं.

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