• Home
  • »
  • News
  • »
  • knowledge
  • »
  • विरोध प्रदर्शन के दौरान क्यों रोकी जाती हैं इंटरनेट सेवाएं, जानें इससे जुड़े नियम कानून

विरोध प्रदर्शन के दौरान क्यों रोकी जाती हैं इंटरनेट सेवाएं, जानें इससे जुड़े नियम कानून

हिंसक प्रदर्शन और दंगे की स्थिति में इंटरनेट सेवाएं रोक दी जाती हैं.

हिंसक प्रदर्शन और दंगे की स्थिति में इंटरनेट सेवाएं रोक दी जाती हैं.

दंगा या हिंसक विरोध प्रदर्शन (Violent Protest) में कोई भी अफवाह (rumours) बड़ी तेजी से फैलती है. अक्सर उन इलाकों में एसएमएस या वॉट्सऐप मैसेज के जरिए तेजी से अफवाह फैलती है और लोग विरोध में सड़क पर उतर जाते हैं.

  • Share this:
    नागरिकता संशोधन एक्ट (Citizenship Amendment Act) के खिलाफ लोगों का गुस्सा कम नहीं हो रहा है. देश के कई इलाकों में हिंसक विरोध प्रदर्शन (Violent Protest) हो रहे हैं. इन विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए देश के कई हिस्सों में धारा 144 (Section 144) लगाई गई है. उन इलाकों में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है.

    यूपी के करीब 21 जिलों में इंटरनेट शटडाउन किया गया है. असम में हिंसा फैली तो वहां 10 दिनों तक इंटरनेट बंद कर दिया गया. मेंगलुरु के हिंसक प्रदर्शन में 2 लोगों की मौत के बाद वहां भी इंटरनेट शटडाउन कर दिया गया. यहां तक कि दिल्ली में गुरुवार को हुए विरोध प्रदर्शन के बाद राजधानी में भी इंटरनेट सेवाएं रोक दी गईं.

    बिहार और गुजरात के विरोध प्रदर्शन वाले इलाकों में इंटरनेट सेवा रोकी गई. जहां भी हिंसक विरोध प्रदर्शन की खबर आती है, पुलिस प्रशासन सबसे पहले वहां इंटरनेट सेवा रोकने का काम करती है. सवाल है कि आखिर ऐसा क्यों और किस कानून के आधार पर होता है.

    किस कानून के तहत होता है इंटरनेट शटडाउन
    दंगा या हिंसक विरोध प्रदर्शन में कोई भी अफवाह बड़ी तेजी से फैलती है. अक्सर उन इलाकों में एसएमएस या वॉट्सऐप मैसेज के जरिए तेजी से अफवाह फैलती है और लोग विरोध में सड़क पर उतर जाते हैं. प्रशासन उन अफवाहों को रोकने के लिए इंटरनेट शटडाउन करती है. आजकल सबसे ज्यादा वॉट्सऐप के जरिए अफवाह फैल रही है. इसलिए प्रशासन हिंसक विरोध प्रदर्शन या दंगे की स्थिति में सबसे पहले एहतियाती कदम के तौर पर इंटरनेट सेवाएं रोक देती है.

    why internet services are stopped during violent protests know rule and regulation
    अफवाह फैलने से रोकने के लिए इंटरनेट शटडाउन किया जाता है


    संचार के किसी भी माध्यम पर रोक के लिए टेलीकॉम सर्विस (पब्लिक इमरजेंसी या पब्लिक सेफ्टी) नियम, 2017 की मदद ली जाती है. किसी भी तरह के टेलीकम्यूनिकेशन सर्विस (इसमें वॉयस, मोबाइल इंटरनेट, एसएमएस, लैंडलाइन, फिक्स्ड ब्रॉडबैंड आदि सेवाएं भी शामिल हैं) को रोकने के लिए टेलीकॉम सर्विस (पब्लिक इमरजेंसी या पब्लिक सेफ्टी) नियम, 2017 के नियमों का सहारा लिया जाता है. इसके नियम इंडियन टेलीग्राफ एक्ट 1885 से लिए गए हैं. इंडियन टेलीग्राफ एक्ट 1885 के सेक्शन 5(2) में ये प्रावधान है कि देश की एकता और अखंडता का नुकसान होने से रोकने के लिए संचार माध्यमों पर रोक लगाई जा सकती है.

    इंटरनेट शटडाउन को लेकर हैं सख्त दिशा-निर्देश
    हालांकि हर बार इसी नियम का ही सहारा नहीं लिया जाता है. आजकल धारा 144 के हवाले से संचार के माध्यमों पर रोक लगाई जाती है. धारा 144 के जरिए ही इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगाई जाती है. यूपी में 31 जनवरी तक के लिए धारा 144 लागू है. इसी के हवाले से राज्य के 21 जिलो में इंटरनेट शटडाउन किया गया है. आमतौर पर डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट धारा 144 लागू करने और इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगाने का आदेश जारी करते हैं.

    why internet services are stopped during violent protests know rule and regulation
    यूपी के 21 जिलों में इंटरनेट शटडाउन है


    दिल्ली में गुरुवार को इंटरनेट शटडाउन का आदेश डिप्टी पुलिस कमिश्नर ने दिया था. दिल्ली के डिप्टी पुलिस कमिश्नर ने इंटरनेट सेवा प्रदान करने वाली हर टेलीकम्यूनिकेशन कंपनी को आदेश जारी किया कि वो इंटरनेट सेवाओं को रोक दें. दिल्ली में इंटरनेट सेवाएं रोकने के कम ही मौके सामने आए हैं. दिल्ली में इंटरनेट सेवा बंद करने के पीछे कोई कानूनी वजह नहीं बताई गई.

    पुलिस इस तरह के आदेश नहीं जारी कर सकती. क्योंकि इंटरनेट शटडाउन के फैसले का अधिकार पुलिस के पास नहीं है. दिल्ली केंद्र शासित राज्य है. इसलिए इस तरह के अधिकार गृहमंत्रालय के पास हैं. लेकिन कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए डिप्टी कमिश्नर ने ऐसे आदेश जारी किए.

    2017 के नियमों के मुताबिक टेलीकम्यूनिकेशन सर्विस को सस्पेंड करने का फैसला भारत सरकार में गृहमंत्रालय के सचिव ले सकते हैं. इसी तरह से राज्यों में गृह विभाग के सचिव इस तरह के फैसले ले सकते हैं. नियमों के मुताबिक अगर योग्य अधिकारी के द्वारा इंटरनेट शटडाउन का फैसला नहीं आता है तो ऐसे हालात में 24 घंटे से ज्यादा वक्त के लिए इंटरनेट सेवा बंद नहीं की जा सकती. साथ ही इंटरनेट सेवा बंद रखने की वाजिब वजह भी लिखित तौर पर रिव्यू कमिटी को सौंपनी होगी.

    ये भी पढ़ें: 

    आप सोच भी नहीं सकते इंटरनेट शटडाउन से कितना बड़ा होता है नुकसान
    क्या सरकार के पास है दंगाइयों की संपत्ति जब्त करने का अधिकार, जानें कानून
    कभी बीजेपी की तारीफों के पुल बांधा करते थे इतिहासकार रामचंद्र गुहा
    तो क्या फिर सच साबित होगी डोनाल्ड ट्रंप को लेकर प्रोफेसर की भविष्यवाणी

     

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज