क्यों अमेरिका की धमकियों को हवा में उड़ाकर ईरान पलटकर देता है चेतावनी

क्यों अमेरिका की धमकियों को हवा में उड़ाकर ईरान पलटकर देता है चेतावनी
ईरान में सुलेमानी की शवयात्रा में भारी भीड़ और लाल झंडे का मतलब युद्ध का ऐलान

पिछले कुछ महीनों से अमेरिका और ईरान के संबंधों में जबरदस्त तनाव है. अमेरिका ने जिस तरह ड्रोन हमले में ईरान में ड्रोन हमला करके उनके जनरल सुलेमानी को मारा, उसके बाद ईरान ने पलटकर उसके इराक बेस पर मिसाइल दागीं, उसके बाद माना जा रहा है कि दोनों देशों का तनाव तीसरे विश्व युद्ध की हालत बना सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 8, 2020, 9:23 PM IST
  • Share this:
आखिर क्या वजह है कि अमेरिका (United State of America) की हर कार्रवाई का ईरान (Iran) उतना ही पुरजोर जवाब देता है बल्कि अमेरिका की चेतावनियों की परवाह नहीं करते हुए उल्टे अमेरिका को चुनौती भी देता रहा है. अक्सर ईरानी नेता और उच्च सैन्य अधिकारी ये कहते हुए कि वो अमेरिका से नहीं डरते बल्कि अमेरिका को अंदाजा नहीं है कि वो युद्ध होने पर किस तरह अमेरिका को ईंट का जवाब पत्थर से देंगे.

हालांकि ये सभी को मालूम है कि अमेरिकी सैन्य संसाधनों और ताकत के सामने ईरान कहीं ठहरता ही नहीं फिर भी आखिर क्यों ईरान की भाषा दुनिया के इस सबसे ताकतवर मुल्क के खिलाफ बेहद आक्रामक है?

मुश्किल से चार दिन पहले अमेरिका ने ड्रोन के जरिए तेहरान एयरपोर्ट के बाहर ईरान की एलीट कुद्स सेना के कमांडर जनरल सुलेमानी को मार गिराया. इसके बाद ट्रंप ने ट्वीट करते हुए चेतावनी दी कि ईरान हमारे इस हमले से सीख ले लें, अन्यथा हम उसकी 52 जगहों को तबाह कर देंगे. लेकिन इसकी परवाह किए बगैर ईरान ने 7 जनवरी की रात अपनी बैलेस्टिक मिसाइलों से इराक में अमेरिकी सेनाओं के दो बड़े सैन्य अड्डों पर हमला कर दिया. इसके साथ ही ईरान ने साफ कर दिया कि वो अमेरिका से दबने वाला नहीं है.



ईरान ने हमले के बाद दावा किया कि इराक़ में अमेरिकी छावनी " एनुल असद " में ईरान के मिसाइली हमले में कम से कम 80 आतंकवादी अमेरिकी सैनिक मारे गये और 200 से अधिक घायल हुए हैं. ईरान ने इससे पहले ही घोषणा कर दी थी कि वो अमेरिकी सेना और पेंटागन को अब आतंकवादी मानता है.
ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने इसके बाद अपने भाषण में अमेरिका को चेतावनी दी कि अभी तो हमने अमेरिका को एक तमांचा भर लगाया गया है, अभी बहुत कुछ बाकी है. आखिर कौन सी बातें हैं, जिसके चलते ईरान झुकने से ज्यादा मुकाबला करने को तैयार है. हम यहां पर ईरान की ताकत का अंदाज का आंकलन करने की कोशिश करते हैं.

परमाणु हथियारों की क्षमता विकसित कर ली 
ये माना जा रहा है कि पिछले कुछ महीनों में ईरान ने परमाणु हथियार विकसित करने की क्षमता हासिल कर ली है. अमेरिका से परमाणु संधि टूटने के बाद से वो लगातार ज्यादा यूरेनियम का संवर्धन करता रहा है. 08 जनवरी को ये रिपोर्ट्स भी आईं कि ईरान के परमाणु संयत्र के निकट भूकंप का झटका महसूस किया गया है. जानकारों ने अनुमान लगाया कि ये झटका दरअसल ईरान के परमाणु परीक्षण से उपजा था.

इसे लेकर मतभेद हैं कि ईरान के पास परमाणु क्षमता है या नहीं. लेकिन ये अटकलें काफी समय से हैं कि रूस और उत्तर कोरिया की मदद से ईरान ये क्षमता विकसित कर चुका है. उसके पास परमाणु हथियारों का बड़ा जखीरा है. उसके बढ़े हुए आत्मविश्वास की एक बड़ी वजह ये भी है. शायद अमेरिका भी इस बात को जानता है.

नया गुप्त हथियार 
पिछले दिनों इस बात की काफी चर्चा थी कि रूस की मदद से ईरान ने नई जेनरेशन का एक ऐसा इलैक्ट्रॉनिक हथियार विकसित कर लिया है, जिसकी संहारक क्षमता खासी ज्यादा है. ऐसे हथियार अब तक गिने-चुने देशों के पास ही हैं.

ईरान का बैलेस्टिक मिसाइल्स से इराक में अमेरिकी बेस पर हमला


बैलेस्टिक मिसाइल और ड्रोन हैं बड़ी ताकत
हालांकि ईरान की सबसे बड़ी ताकत उसकी बैलेस्टिक मिसाइल्स और ड्रोन हैं. ईरान के कम दूरी से लेकर 2000 किलोमीटर दूर तक मार करने वाली मिसाइल्स हैं. इन्हीं जरिए उसने इराक में अमेरिकी बेस पर हमला किया है. इस मिसाइलें एंटी टैंक से लेकर एंटी एयरक्राफ्ट तक हैं. जिनका निशाना बेहद अचूक है.

ड्रोन के मामले में तो ईरान को बहुत आगे बताया जाता है. माना जाता है कि ईरान ने टोही ड्रोन से लेकर मिसाइल क्षमता से लैस ड्रोन की खेप हैं. माना जाता है कि मौजूदा समय में ईरान के पास 2000 से ज्यादा ड्रोन हैं. उसमें से बड़ी मात्रा ऐसे ड्रोन की है जो ना केवल लंबी दूरी की यात्रा बगैर रुके पूरी कर सकती हैं बल्कि अपने मिसाइल से लैस होकर बड़े हमलों को अंजाम भी दे सकती हैं.

करीब दो महीने पहले सऊदी अरब की सीमा पर अरेमाको तेल संयत्र पर 50 ड्रोन के जरिए हमला किया गया था. इन ड्रोन के बारे में बताया गया कि 1200 किलोमीटर दूर से आए थे. दूर बैठकर इन्हें नियंत्रित किया जा रहा था. हालांकि ईरान ने इस हमले में अपना हाथ होने से इनकार किया था लेकिन माना गया कि ये हमला ईरान ने ही कराया था.

हाल के बरसों में ईरान ने खासतौर पर ड्रोन विमानों का एक बड़ा बेड़ा तैयार किया है. उसके ज्यादातर हमले अब इन्हीं के जरिए अंजाम दिये जा रहे हैं


छोटे हमले और बड़ी तबाहियों की रणनीति
इसके अलावा ईरान गुरिल्ला वार में या यों कहिए छोटे-छोटे हमले करके बड़ी तबाहियां मचाने में काफी पारंगत हो चुका है. उसकी कुद्स सेना को इसमें पारंगत माना जाता है. सुलेमानी इस कुद्स सेना के ही सर्वोच्च सेनापति थे. उन्होंने इस सेना को ईरान से बाहर आपरेशन के लिए काफी मजबूत बना दिया था. कुद्स सेना के जरिए ही ईरान पड़ोसी देश इराक समेत कई खाड़ी के देशों में विद्रोहियों को हवा देता रहता है.

दुनियाभर के 20 करोड़ शिया भी बनते हैं ताकत
अब सबसे आखिरी बात. दुनियाभर में कुल मिलाकर 20 करोड़ शिया बताए जाते हैं, जिनके लिए ईरान ही उनकी धार्मिक सत्ता और धार्मिक लीडर है. वो उसी से कई तरह के आदेश लेते हैं. दुनियाभर में फैले ये शिया मुसलमान आमतौर पर प्रभावशाली स्थितियों में हैं. जब ईरान के खिलाफ कुछ होता है, वो इसके खिलाफ एकजुट हो जाते हैं, इसका असर भी पड़ता है.

ये भी पढ़ें
कभी ईरान में था इस शाही परिवार का राज, जानिए अब अमेरिका में किस हाल में
क्या अब एसी शुरू करने के बाद तापमान 24 डिग्री से कम नहीं कर सकते
दुनिया के 20 करोड़ शिया मानते हैं ईरान को अपना नेता, अमेरिका को महंगी पड़ सकती है जंग
जब 444 दिनों तक ईरान के चंगुल में छटपटाता रहा था अमेरिका
ईरान से लड़ाई में अमेरिका का दोस्त इजरायल तक क्यों नहीं दे रहा ट्रंप का साथ
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading