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आखिर क्यों सिख सैनिकों से खौफ खाते हैं चीनी सेना के जवान, जानिए पूरी कहानी

क्यों चीनी सैनिक भारत के सिख सैनिकों से खौफ खाते हैं. (फाइल फोटो)

क्यों चीनी सैनिक भारत के सिख सैनिकों से खौफ खाते हैं. (फाइल फोटो)

एक सच ये भी है कि खुद चीनी सैनिक (PLA Soldiers) भारत के सिख सैनिकों (Sikh Soldiers) से खौफ खाते हैं. कह सकते हैं कि सिख सैनिक उनके लिए एक हौवा की तरह हैं. जानिए क्या है ये 120 साल पुरानी कहानी जो आज भी चीनियों के दिमाग में बसी है.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. भारत और चीन (India-China) के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line Of Actual Control-LAC) पर माहौल बेहद तनावपूर्ण है. कहा जा रहा है कि हालात 1962 के युद्ध के बाद सबसे खराब स्थिति में हैं. इसी बीच खबर आई कि चीनी सैनिक LAC पर अपनी तरफ पंजाबी गाने चला रहे हैं. माना जा रहा है कि ऐसा मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है. लेकिन एक सच ये भी है कि खुद चीनी सैनिक भारत के सिख सैनिकों से खौफ खाते हैं. कह सकते हैं कि सिख सैनिक उनके लिए एक हौवा की तरह हैं.

    चीन का बॉक्सर विद्रोह जिसे दबाने बीजिंग गए थे सिख सैनिक
    तकरीबन 120 साल पहले सन् 1900 में ब्रिटिश सरकार की सेना ने एक दल को चीन के बॉक्सर विद्रोह को दबाने के लिए भेजा था. इस सेना में 8 देशों के सैनिक शामिल थे. सैनिकों के इस दल में बड़ी संख्या पंजाब और सिख रेजिमेंट के जवानों की भी थी. उस वक्त बॉक्सर विद्रोह चीन के किसानों और मजदूरों ने किया था. बॉक्सर विद्रोहियों ने बीजिंग में 400 से ज्यादा विदेशियों को बंधक बनाकर रखा हुआ था. लेकिन जब 20 हजार सैनिकों की ब्रिटिश आर्मी, जिसमें सिख जवान भी शामिल थे, बीजिंग पहुंची तो उसने इस विद्रोह कुचल कर रख दिया.

    जीत के बाद रूसी और फ्रांसीसी सैनिकों ने बीजिंग में की थी लूटपाट
    इस विद्रोह में जीत के बाद ब्रिटिश आर्मी में शामिल रूसी और फ्रांसीसी ट्रूप्स ने बीजिंग में आम लोगों की हत्याएं शुरू कर दीं और महिलाओं के साथ बलात्कार किए. इसी दौरान लूट भी की गई. इसमें एक लॉफिंग बुद्धा भी लूटा गया जो लद्दाख के चुशुल ब्रिगेड हेडक्वार्टर की मेस में 1995 तक रखा हुआ था. 1995 में भारतीय सेना ने इसे बीजिंग के टेंपल ऑफ हेवन (Temple of Heaven) को दे दिया था.

    आज भी सिख सैनिकों का मनोवैज्ञानिक असर है चीनी सैनिकों के दिमाग में
    हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट में ऑस्ट्रेलियन पत्रकार निवेल मैक्सवेल के हवाले से लिखा गया है कि चीनी नेतृत्व में 1900 में हुई उस करारी शिकस्त को बदले के तौर पर इस्तेमाल किया. अपनी किताब India’s China War में उन्होंने 1962 के युद्ध के पीछे भी इसे एक कारण के तौर पर गिना है. कहा जाता है कि सन् 1900 में ब्रिटिश आर्मी का हिस्सा रहे सिख सैनिकों की यादें आज भी चीनी सैनिकों को डराती हैं. और शायद यही वजह है कि अब वो मनोवैज्ञानिक तरीके भी सीमा पर इस्तेमाल कर रहे हैं. शायद खुद को दिलासा देने के लिए!

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