क्या है वो क्रोकर मछली, जो लाखों में बिकती है?

पाकिस्तान में क्रोकर प्रजाति की मछली 7 लाख 80 हजार रुपए में बिकी (Photo- pxhere)

पाकिस्तान में क्रोकर प्रजाति की मछली 7 लाख 80 हजार रुपए में बिकी (Photo- pxhere)

लार्ज यलो क्रोकर मछली मेडिसिन की दुनिया में काफी पूछ-परख (Large Yellow Croaker fish medicinal benefits) रखती है. कैंसर और स्वाद-गंध न आना, जैसी बीमारियों से लेकर सर्जरी में लगने वाले टांकों में भी इसका उपयोग होता है.

  • Share this:

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में 26 किलो वजनी मछली के बहुत ऊंची कीमत पर बिकने की चर्चा है. क्रोकर प्रजाति की ये मछली 7 लाख 80 हजार रुपए में बिकी. ग्वादर जिले में पकड़ी गई ये मछली वजनी होती हैं और कई खूबियों के कारण काफी महंगी भी. कुछ सालों पर एक और क्रोकर मछली लगभग 17 लाख रुपए में बिकी थी.

बहुत से औषधीय गुण होते हैं 

दरअसल क्रोकर मछली अपने औषधीय गुणों के कारण इतनी महंगी होती है. वैसे तो बहुत-सी मछलियां कई तरह के प्रोटीन और दूसरे गुणों से भरपूर होती हैं, लेकिन क्रोकर मछली की बात ही कुछ और है. इसके शरीर में पाए जाने वाले एयर ब्लैडर का सर्जरी में इस्तेमाल होता है. इससे वो टांके बनाए जाते हैं, जो सर्जरी के बाद काम आते हैं. ये इंसानी शरीर में आसानी से घुल जाते हैं और किसी तरह का साइड इफैक्ट नहीं देते. खासकर हार्ट सर्जरी जैसे मुश्किल काम में इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता रहा है.

large yellow croaker expensive fish
बहुत-सी मछलियां कई तरह के प्रोटीन और दूसरे गुणों से भरपूर होती हैं, लेकिन क्रोकर मछली की बात ही कुछ और है (Photo- pixabay)

डिलीवरी के बाद भी दी जाती है 

इसके अलावा मछली में कई तरह के पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं, जैसे प्रोटीन, विटामिन और माइक्रोइलेमेंट्स. इनके साथ इस मछली के मांस का उपयोग एम्नीशिया (गंध-स्वाद न आना), अनिद्रा, थकान और थक्कर आने जैसी समस्याओं में होता है. साथ ही डिलीवरी के बाद प्रसूता को इसका मांस देने से काफी जल्दी रिकवरी होती है.

शोध में साबित हो चुकी खूबियां 



नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) की एक रिसर्च बताती है कि लार्ज यलो क्रोकर मछली मेडिसिन की दुनिया में काफी पूछ-परख रखती है. रिसर्च के अनुसार ये शरीर में अतिरिक्त कोशिकाओं का निर्माण रोककर कैंसर से बचाने वाली साबित हो चुकी है. इससे शरीर में लगी चोट और संक्रमण का इलाज भी हो पाता है.

ये भी पढ़ें: Explained: आखिर क्यों China में करोड़ों लड़के शादी नहीं कर पा रहे?

मुश्किल है मछलियों को पकड़ पाना 

आमतौर पर चीन और दक्षिणी पीला सागर में मिलने वाली इन मछलियों की जितनी मांग है, इन्हें पकड़ना उतना ही मुश्किल है. इसकी एक वजह तो ये है कि ये मछली अपने ब्रीडिंग सीजन के दौरान ऊपर की ओर आती है, जो केवल दो महीने का ही होता है. यानी 12 में से दो ही महीने इनके पकड़े जाने की संभावना होती है. ऐसे में मछुआरों को इनकी ताक में रहना होता है. कीमती होने की एक वजह ये भी है.

large yellow croaker expensive fish
चीन में सत्तर के दशक में लगभग 2 लाख टन कोक्रर मछली पकड़ी गई- सांकेतिक फोटो (pixabay)

विलुप्त हो रही हैं चीन की वजह से 

वैसे चीन में सत्तर के दशक में लगभग 2 लाख टन कोक्रर मछली पकड़ी गई और चीन समेत दूसरे देशों में बेची गई. इसके बाद से इसकी संख्या तेजी से घटी. इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) ने इसे विलुप्त हो रही मछलियों की श्रेणी में रेड लिस्ट में डाला.

ये भी पढ़ें: Explained: क्या है Islam Map जिसपर ऑस्ट्रियाई मुस्लिमों को गुस्सा आ गया?

प्रजनन बढ़ाने पर हो चुके शोध लेकिन नाकामयाब 

मछलियों की संख्या कम होने के कारण इससे मेडिसिन तैयार करने वाले देश, जैसे चीन, ताइवान, दक्षिण कोरिया और हांगकांग परेशान हो उठे. ये देश अब ऐसी कोशिश कर रहे हैं कि किसी तरह ज्यादा मछलियों का पालन हो सके. ब्रिटेन की एक्वाफीड नामक वेबसाइट के मुताबिक दक्षिण कोरिया और ताइवान ने इसकी ब्रीडिंग पर शोध भी किए लेकिन वे ज्यादा कामयाब नहीं हो सके.

मछलियों की संख्या घटने के बाद भी चीन बची-खुची क्रोकर मछलियों को भी अपने काम में ला रहा है. यही कारण है कि साल 2018 में इस देश ने लगभग 39 200 टन लार्ज यलो क्रोकर मछलियों का निर्यात किया था. मछलियों के लिए वहां खास कोल्ड चेन तकनीक बनाई गई है, जिसकी वजह से मछलियां पकड़े जाने के बाद उन्हें महीनों-सालों रखना आसान हो गया.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज