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वायुसेना के लिए कैसे मददगार होगी GSAT-7A सैटेलाइट?

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर

दुनिया में करीब 320 मिलिट्री सैटेलाइट्स हैं जो धरती का चक्कर लगा रहे हैं. हालांकि इनमें से आधे अमेरिका के हैं. भारतीय सेनाओं के पास मात्र 13 सैटेलाइट्स हैं.

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    आंध्रप्रदेश स्थित श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से इसरो GSAT- 7A सैटेलाइट को दोपहर 4 बजकर 10 मिनट पर लॉन्च करने वाला है. इसे पृथ्वी के जियो ऑर्बिट (कक्षा) में स्थापित किया जाना है. इस सैटेलाइट के कक्षा में स्थापित हो जाने से सबसे ज्यादा फायदा भारतीय वायुसेना को होने वाला है. जानिए क्या होंगी इस सैटेलाइट की खासियतें?

    भारतीय वायुसेना के लिए क्यों खास है GSAT-7A?
    इस कम्युनिकेशन सैटेलाइट के जरिए भारतीय वायुसेना अपने सारे रेडार स्टेशनों को आपस में जोड़ सकेगी. इतना ही नहीं इसके जरिए सारे एयरबेस और अवाक्स स्पेसक्राफ्ट भी आपस में आसानी से बातचीत कर सकेंगे. ये अवाक्स विमान हवाई चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली का ही हिस्सा होते हैं. अवाक्स को आसमान में आंख भी कहा जाता है. यह 400 वर्गकिमी एरिया में दुश्मन की हरकत पर नज़र रख सकने वाला सिस्टम है.

    इतना ही नहीं इस सैटेलाइट के जरिए ड्रोन से जुड़े ऑपरेशन में भी मदद मिलेगी. यह ऐसे होगा कि जिन ऑपरेशन को वर्तमान में वायुसेना को जमीन से संचालित करना पड़ता है, उन्हें वे सीधे सैटेलाइट से संचालित कर सकेगा.

    इससे अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV) यानी ड्रोन के संचालन में वायुसेना को मदद मिलेगी. भारत इस सैटेलाइट की लॉन्चिंग ऐसे वक्त में कर रहा है जब वह अमेरिका के सैन्य ड्रोन प्रीडेटर-बी या सी गार्डियन ड्रोन की खरीद कर रहा है. ये बहुत ऊंचाई पर स्थिरता से उड़ने वाले ड्रोन विमान हैं. और इन्हें सैटेलाइट के जरिए कंट्रोल किया जाता है. साथ ही यह ड्रोन बहुत दूरी से ही दुश्मन पर वार कर सकते हैं.

    क्या होंगे GSAT- 7A के फीचर्स?
    इस सैटेलाइट को तैयार करने में करीब 500 से 800 करोड़ रुपये का खर्च आया है. एक खास बात यह होगी कि इसमें कक्षा बदलने के लिए भी सिस्टम होगा. इसे ऊर्जा देंगे इसमें लगे चार सोलर पैनल, जो 3.3 किलोवॉट बिजली पैदा करने में सक्षम होंगे.

    इसरो अभी तक केवल भारतीय सेना के लिए कितने सैटेलाइट कर चुका है लॉन्च?
    इससे पहले इसरो GSAT-7 भी लॉन्च कर चुका है. इसे 'रुक्मणी' भी कहा गया था. सितंबर, 2013 में लॉन्च किए गए इस सैटेलाइट से भारतीय नौसेना को भारतीय समुद्री क्षेत्र में भारतीय पोतों को 2000 नौटिकल मील के क्षेत्र की गतिविधियों की जानकारी दे सकता था. भारतीय वायुसेना को जल्द ही GSAT-7C भी मिलने की उम्मीद है. जिससे इसके नेटवर्किंग और मजबूत होगी.



    अभी भारतीय सेनाओं के पास कुल 13 उपग्रह हैं. इनमें से ज्यादातर रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट हैं. जिन्हें धरती की करीबी कक्षा में स्थापित किया गया है. हाल ही में भारतीय सेना को पाकिस्तान में किए सर्जिकल स्ट्राइक और आतंकी ठिकानों को नष्ट करने में भी इन सैटेलाइट से मदद मिली थी.

    फिलहाल दुनिया में कितनी मिलिट्री सैटेलाइट्स हैं?
    वर्तमान में दुनिया में करीब 320 मिलिट्री सैटेलाइट्स हैं, जो धरती का चक्कर लगा रहे हैं. हालांकि इनमें से आधे अमेरिका के हैं. इसके बाद सबसे ज्यादा मिलिट्री सैटेलाइट वाले देशों में रूस और चीन का नंबर आता है. हालांकि आज के दौर में चीन, भारत के कट्टर प्रतिद्वंदियों में से एक है.

    चीन ने अंतरिक्ष में युद्ध रणनीति के मामले में काफी तरक्की कर ली है. चीन ने अपने ASAT हथियारों का प्रयोग भी जनवरी, 2017 में कर चुका है. ये एंटी-सैटेलाइट हथियार हैं, जो कम ऊंचाई के सैटेलाइट्स के खिलाफ काम करते हैं.

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