चंद्रयान-2 की सफल लॉन्चिंग से भारत हो जाएगा सबसे मजबूत, होंगे ये फायदे

जानिए चंद्रयान 2 से क्या मिलेगा भारत को, अंतरिक्ष महाशक्ति बनने के बाद भारते को क्या फायदे होंगे?

News18Hindi
Updated: July 23, 2019, 12:05 AM IST
चंद्रयान-2 की सफल लॉन्चिंग से भारत हो जाएगा सबसे मजबूत, होंगे ये फायदे
चंद्रयान 2 से क्या मिलेगा भारत को, अंतरिक्ष महाशक्ति बनने के बाद भारते को क्या फायदे होंगे
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Updated: July 23, 2019, 12:05 AM IST
अंतरिक्ष की दुनिया में सोमवार को भारत ने एक नया इतिहास रचा है. 'मिशन मून' के तहत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान यानी ISRO ने दोपहर 2.43 मिनट पर चंद्रयान-2 की सफलतापूर्वक लॉन्चिंग की. चांद पर कदम रखने वाला ये हिंदुस्तान का दूसरा सबसे बड़ा मिशन होगा. चंद्रयान-2 भारत का चांद का दूसरा मिशन है. भारत चांद पर अपना मिशन तब भेज रहा है जब अपोलो 11 के चांद मिशन की 50वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है.

भारत ऐसा करने वाला चौथा देश बन जाएगा

चांद पर अपने यान को उतारने वाला भारत चौथा देश बन जाएगा. इससे पहले अमेरिका, रूस और चीन ऐसा कर चुके हैं. इल मिशन में लैंडर का नाम विक्रम है और रोवर का नाम प्रज्ञान है. विक्रम भारत के इसरो के पहले प्रमुख विक्रम साराभाई के नाम पर दिया गया है. सबसे बड़ा सवाल कि लैंडर और रोवर क्या है? लैंडर वो है जिस वाहन के जरिए चंद्रयान चांद पर पहुंचेगा, और रोवर का मतलब जो चांद पर पहुंचने के बाद वहां की स्थिति पर अध्ययन करेगा.

चंद्रयान-2 1.4 टन का लैंडर विक्रम साथ ले जा रहा है, 27-किलोग्राम के रोवर 'प्रज्ञान' को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर दो क्रेटरों के बीच ऊंची सतह पर उतारेगा. उतरने के बाद 'प्रज्ञान' चांद की मिट्टी का रासायनिक विश्लेषण करेगा. जबकि 'विक्रम' चंद्रमा की झीलों को मापेगा और दूसरी चीजों के अलावा लूनर क्रस्ट में खुदाई भी करेगा.

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर आज तक कोई यान नहीं उतरा है. चंद्रयान-2 ऐसा करने वाला पहला यान बनेगा. साल 2009 में चंद्रयान-1 के जरिए चंद्रमा की सतह पर पानी के अणुओं की उपस्थिति का पता लगाने के बाद से भारत ने वहां पानी की खोज लगातार जारी रखी है. ये मिशन इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि चांद पर पानी का पता लगाने के बाद ही वहां जिवन की संभावनाओं को बल मिलेगा.

पानी की खोज, मनुष्य के रहने की संभावना तलाश की जाएगी

इसरो प्रमुख के. सिवन ने बताया, मिशन का लक्ष्य पानी की उपस्थिति को खोजने के अलावा शुरुआती सौर मंडल के 'फॉसिल रिकॉर्ड' को भी खोजा जाएगा, जिसके जरिए यह जानने में भी मदद मिल सकेगी कि हमारे सौरमंडल, उसके ग्रहों और उनके उपग्रहों का निर्माण किस तरह से हुआ था.
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अतंरिक्ष के क्षेत्र में भारत महाशक्ति बनकर उभर रहा है.

2022 तक चांद पर अपने अंतरिक्ष यात्री उतारेगा भारत!

इसरो 2022 तक चांद पर अंतरिक्ष यात्री को भेजने के मकसद से काम कर रहा है. ये योजना भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. अंतरिक्ष में छिपे तमाम रहस्‍यों का पता लगाने के लिए इसरो ने भी कमर कस ली है. चंद्रयान-2 के बाद भारत अपना गगनयान अंतरिक्ष भेजेगा. गगनयान मिशन भारत के कितना खास है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसरो पहली बार अंतरिक्षयात्री को भेजेगा. गगनयान मिशन को साल 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य बनाया गया है. ऐसा माना जा रहा है कि भारत उसी बीच अपने अंतरिक्ष यात्री को चांद पर भेज सकता है.

पीएम नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले से दिए गए अपने संबोधन में कहा था कि 2022 तक गगनयान लेकर कोई भारतीय अंतरिक्ष में जाएगा. इसके बाद भारत वर्ष 2029 तक अपना स्‍पेस स्‍टेशन स्‍थापित करेगा. इसरो के प्रमुख के. सिवन के मुता‍बिक भारत अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की योजना बना रहा है और इस महत्वाकांक्षी योजना के पूरा होने पर देश ज्यादा मानव मिशन अंतरिक्ष में भेजने में सक्षम होगा. अतंरिक्ष मिशन को स्पष्ट करते हुए सिवन ने कहा कि यह मिशन गगनयान कार्यक्रम का विस्तार होगा. भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का वजन करीब 20 टन होने की संभावना है.

अंतरिक्ष महाशक्ति बनने के बाद भारते को क्या फायदे होंगे

चांद पर उतरकर अंतरिक्ष महाशक्ति बनने की चाहत दुनिया के कई देशों की है. बड़े देश एक ऐसी 'स्‍पेस रेस' की ओर कदम बढ़ा चुके हैं, जिसके अगले 200 साल तक जारी रहने के आसार हैं. कोल्‍ड वॉर के बाद इस रेस के खिलाड़ी ज्‍यादा ताकतवर और अत्‍याधुनिक तकनीकों से लैस हैं. 21वीं सदी की इस स्‍पेस रेस में अमेरिका और रूस जैसे परंपरागत महाशक्ति के साथ-साथ चीन और भारत जैसे नए उभरते महाशक्ति भी मैदान में हैं. जो इस मुकाबले को और भी ज्‍यादा रोचक बना रहे हैं. इसी क्रम में भारत ने आज अपने अंतरिक्ष यान चंद्रयान-2 को सफलतापूर्वक लॉन्‍च कर अपना पहला कदम बढ़ा दिया है. इसके साथ ही भारत के लिए अंतरिक्ष में उम्मीदों के कई दरवाजे खुल गए हैं.

इस मिशन के बाद भारत को कमर्शियल उपग्रहों और ऑरबिटिंग की डील हासिल हो पाएगी. भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपनी ताकत आजमा सकेगा. जिसकी मदद से हमें दूसरे देशों के उपग्रहों के अंतरिक्ष में भेजने के करार हासिल हो पाएंगे. वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस मिशन से मिलने वाला जियो-स्ट्रैटेजिक फायदा भले ही ज़्यादा नहीं है, लेकिन भारत का कम खर्च वाला यह मॉडल दूसरे देशों को आकर्षित करता है.

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First published: July 22, 2019, 7:00 PM IST
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