3 राजधानियां बनाकर अमरावती की 'प्रतिष्ठा' कम करना चाहते हैं जगनमोहन!

कहा जा रहा है कि जगन मोहन रेड्डी का ये फैसला अमरावती की प्रतिष्ठा कम करने के लिए लिया गया है. हालांकि खुद जगन ने इसे बकवास बताया है.

चंद्रबाबू नायडू ने जगनमोहन सरकार के इस फैसले की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार का यह तुगलकी फैसला है. उन्होंने पूछा कि सीएम जगनमोहन खुद कहां रहेंगे?

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    आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) की विधानसभा ने राज्य में तीन राजधानियों (3 Capitals) का प्रस्ताव पारित कर दिया है. अब राज्य में तीन राजधानियों का रास्ता साफ हो गया है. लेकिन सुनने में यह बात आम भारतीय को थोड़ी अजीब लगती है. क्योंकि दो राजधानियों की बातें आम हिंदुस्तानी ने जम्मू और कश्मीर और महाराष्ट्र को लेकर सुनी हैं लेकिन तीन राजधानियां! अब आंध्र प्रदेश की तीन राजधानियां होंगी-विशाखापत्तनम, कुरनूल और अमरावती. विशाखापत्तनम राज्य की कार्यकारी राजधानी होगी, कुरनूल न्यायिक राजधानी होगी, वहीं अमरावती में विधानसभा होगी. आलोचकों का कहना है कि जगनमोहन रेड्डी की सरकार ने अब अमरावती की 'कीमत' कम कर दी है. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री तेलुगु देशम पार्टी के नेता चंद्र बाबू नायडू ने कहा है कि जगनमोहन सरकार उनकी सरकार द्वारा किए गए कामों को कम करके दिखाना चाहती है.

    गौरतलब है कि वर्तमान जगनमोहन सरकार कई ऐसे फैसले ले रही है जिनके जरिए नायडू सरकार के निर्णयों को पलटा जा रहा है. इसी वजह से इन निर्णय पर भी कोई बड़ी प्रतिक्रिया नहीं हो रही है. लेकिन अमरावती के किसानों ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई है. इसका वाजिब कारण ये है कि पूर्ववर्ती सरकार ने किसानों को जमीन के बदले कम्पंसेशन देने की बात कही थी. अमरावती को राजधानी बनाने के लिए बड़े स्तर पर जमीनों का अधिग्रहण किया गया था.

    राज्य में तीन राजधानियां बनाने के पीछे जगनमोहन सरकार का तर्क है कि इससे राज्य के कई शहरों का विकास होगा और समान रूप से समृद्धि आएगी. लेकिन यह तर्क बहुत सारे लोगों के गले नहीं उतर रहा है. आंध्र प्रदेश का आकार तेलंगाना के बंट जाने के बाद पहले से छोटा हो गया है.

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    चंद्रबाबू नायडू ने अमरावती को राजधानी बनाया था.


    एक सबसे तेज असर ये देखने को मिल सकता है कि इन तीनों शहरों में जमीन की कीमतें तेजी के साथ बढ़ जाएं. आलोचकों का कहना है कि इससे भू-माफिया को फायदा हो सकता है. सरकार को इसके बजाए लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए काम करना चाहिए. राज्य में महज एक राजधानी से भी काम चल सकता है.

    आलोचकों का कहना है कि तीन जगहों से सरकारी तंत्र को चलाने का मतलब अनावश्यक रूप से खर्च में बढ़ोतरी करना है. इसके अलावा बड़े स्तर पर दस्तावेज भी इधर-उधर करने पड़ेंगे जिसमें काफी खर्च आएगा. आंध्र में किसानों की स्थिति पर चिंतित लोगों का कहना है कि सरकार के नए निर्णय का खर्च आम लोगों को ही उठाना पड़ेगा. राज्य पहले से ही आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रहा है.

    क्या कहते हैं चंद्रबाबू
    चंद्रबाबू नायडू ने जगनमोहन सरकार के इस फैसले की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने कहा है कि जगनमोहन सरकार का यह तुगलकी फैसला है. उन्होंने कहा कि सीएम जगनमोहन खुद कहां रहेंगे? वो इन तीन राजधानियों में अपना घर कहां बनाएंगे या हर जगह बनाएंगे? उन्होंने कहा कि सत्ता के विकेंद्रीकरण का मतलब ये नहीं होता कि कई राजधानियां बना दी जाएं. उन्होंने कहा, 'तुगलक का राज इससे बेहतर था. तुगलक भी जगनमोहन रेड्डी से समझदार था'.

    तीन राजधानियां बनाने के निर्णय को लेकर अमरावती के किसानों में गुस्सा है. किसानों ने जिले में कई बार रैलियां की हैं.
    तीन राजधानियां बनाने के निर्णय को लेकर अमरावती के किसानों में गुस्सा है. किसानों ने जिले में कई बार रैलियां की हैं.


    अमरावती में है गुस्सा
    जब से सीएम जगनमोहन रेड्डी ने तीन राजधानियों की चर्चा की है अमरावती में किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है. अमरावती के लोग लगातार 3 राजधानी बनाने का विरोध कर रहे हैं. बीती 5 जनवरी को जिले के किसानों ने बड़ा आंदोलन कर पूरा शहर ठप कर दिया था. वहीं भारतीय जनता पार्टी ने जगन सरकार को सलाह दी थी कि राजधानी न बदली जाए.

    हालांकि सीएम जगनमोहन रेड्डी ने अमरावती के किसानों को भरोसा दिलाया है कि उन्हें किसी भी तरह हानि नहीं होने दी जाएगी. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि तीन राजधानियों के निर्णय से अमरावती की प्रतिष्ठा कम होने जैसी कोई बात नहीं है.

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