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सबसे बड़ी बुजुर्ग आबादी वाले जापान का हाल क्यों इटली सरीखा नहीं हुआ

News18Hindi
Updated: March 23, 2020, 1:10 PM IST
सबसे बड़ी बुजुर्ग आबादी वाले जापान का हाल क्यों इटली सरीखा नहीं हुआ
जापान में कोरोना का पहला मामला 15 जनवरी को मिला था. अब उनका तीन हफ्ते का क्रिटिकल पीरियड पूरा हो चुका है

जापान में कोरोना का पहला मरीज 10-15 जनवरी के बाद मिला था. इसके बाद से वहां अब वो क्रिटिकल पीरियड भी बीत चुका है जब उन्होंने माना था कि हमारे यहां कोरोना बड़े पैमान पर फैलेगा, आखिर जापान ने खुद को कैसे बचा लिया

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  • Last Updated: March 23, 2020, 1:10 PM IST
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जापान में कोरोना वायरस (Corona Virus in Japan) के 900 कन्फर्म मरीज हैं. ये मामले वहां पिछले दो महीने से कहीं ज्यादा समय में रिकॉर्ड किए गए. पहला मामला 10 से 15 जनवरी के बीच तब रिकॉर्ड हुआ था जबकि एक जापानी वुहान से यात्रा करके लौटा था. इसके बाद से उन्होंने कोरोना को पूरी तरह कंट्रोल कर लिया है. वहां अब स्कूल फिर से खुलने वाले हैं. पार्कों में भीड़ दिखने लगी है. उन्होंने ये कैसे कर लिया.

इटली में पहला मामला जापान के बाद 23 जनवरी को पता चला था. अब इटली में 59,000 से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं जबकि 5400 से ज्यादा लोगों की मौत के शिकार. इटली में कोरोना के ज्यादातर मामले लोंबार्डी क्षेत्र में हो रहे हैं. ये इटली का उत्तरी इलाका है. हालांकि अब तो ये पूरे इटली में फैलने लगा है. पूरे इटली में लोगों को कोरेंटीन किया जा चुका है.
अमेरिका में कई शहरों में लाकडाउन हो चुका है. लोगों को घरों में सीमित किया जा चुका है. सरकार ने कई तरह के कदम उठाए हैं. वहीं जापान में तोक्यो की ओर देखिए. वहां पाबंदियों का ऐसा कोई आलम नहीं है. हां खेलों के इवेंट जरूर रोके गए हैं. स्कूल और कुछ बड़े मनोरंजन स्थलों को छोड़ दें तो जापान में सबकुछ सामान्य है.
जापान का सबसे प्रमुख अखबार जापान टाइम्स ने इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट छापी है. बकौल उसके जापान में कोई कोरेंटीन नहीं है. कुछ भी जबरदस्ती बंद नहीं कराया गया है. बार और रेस्तरां खुले हैं. यहां तक की क्लब भी खुले हैं. हां, रेस्तरां और होटल्स में भीड़ जरूर कम है लेकिन लोग नजर आ रहे हैं. अगर आप किराए की कार लेकर देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक जाना चाहें तो कोई रोक नहीं. इसका मतलब ये है कि वहां कोरोना के बावजूद कोई आपको रोकने वाला नहीं है.



जापान को कोरोना विस्फोट का डर था 
जापान को डर था कि कहीं उसके यहां बड़ी आबादी कोरोना वायरस से बीमार नहीं हो जाएं. जापान ने कैसे खुद को कोरोना फैलाव से बचाया. जिस देश में ये आशंका जाहिर की जा रही थी कि वो कोरोना से बुरी तरह प्रभावित हो सकता, वहां ये कैसे नहीं हुआ.

जापान ने भी शुरू में कोरोना को फैलने से बचाने के लिए पहले सब कुछ बंद किया. चीन से लगातार नजदीक संपर्क बनाया. चीन के वुहान शहर से ही ये बीमारी पूरी दुनिया में फैल रही है. चीन में अमूमन लोग छोटे अपार्टमेंट में रहते हैं. ट्रेनों में वो ठूंस-ठूंस कर भरे जाते हैं. हालांकि वहां के लोग इसे लेकर शिकायत भी करते रहे. तोक्यो की आबादी भी कम नहीं. यहां 3.8 करोड़ लोग रहते हैं. ये लगातार व्यस्त रहने वाला शहर है.

जापान में इटली से कहीं ज्यादा बुजुर्ग रहते हैं
वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन के अनुसार, वो वजह जिससे इटली बुरी तरह प्रभावित हुआ, वो थी वहां वृद्ध लोगों की बहुतायत. यूरोप में सबसे ज्यादा औसत बुजुर्ग लोग वहीं रहते हैं. वहां दुनिया की दूसरी बड़ी बुजुर्ग आबादी है. कोरोना ने उन पर सबसे ज्यादा असर दिखाया, उनकी प्रतिरोधक क्षमता इतनी मजबूत नहीं थी. इस मामले में जापान उनसे आगे ही है. जापान में दुनिया की सबसे बड़ी बुजुर्ग जनसंख्या है.

जापान में इस समय चेरी खिलने का मौसम है, ये सीजन वहां उत्सव का मौसम होता है. कोरोना वायरस का डर अब जापान में खत्म हो गया है और पार्कों में भीड़ दिखने लगी है


चीन की तरह जापान में स्मोकर्स बहुत हैं 
चीन में मौतों के पीछे एक कॉमन फैक्टर स्मोकिंग था-वो लोग इस वजह से पहले ही अपने फेफड़ों को प्रभावित कर चुके थे. निमोनिया के प्रति संवेदनशील हो चुके थे. लेकिन जापान भी हालात ऐसी ही है. 2017 में जापान को जी7 देशों में सबसे ज्यादा स्मोक करने वाला देश माना गया था.
और तो और जापान ने चीन की तरह अपने लोगों पर बहुत कड़े पाबंदी वाले कदम नहीं उठाए. इसने उस तरह कोरेंटाइन भी नहीं लादा, जैसा कि चीन में किया गया.
ज्यादातर पर्यटक अब भी जापान की यात्रा कर सकते हैं. प्रभावित देशों के लोग भी वहां पूरी तरह बैन नहीं हैं. उन्हें बस स्वैच्छिक तौर पर 14 दिनों के लिए खुद आइसोलेशन में जाने को कहा जा रहा है.

क्या जापान ने मामलों को दबा दिया 
अब आप कहेंगे तो आखिर वो कौन सी बात है, जिससे जापान बचा रह गया. वहां कोरोना के इतने कम नंबर कैसे हैं. हालांकि कुछ लोग कहते हैं कि ये संभव नहीं कि जापान में कम मामले होंगे बल्कि यहां लोगों के क्लिनिकल टेस्ट कम लिये गए. ये भी कहा गया कि ओलंपिक के मद्देनजर सरकार खुद कोरोना के मामलों को कम बता रही हो ताकि खेल समय पर हो सकें.

जापान में सबके टेस्ट नहीं हुए
दक्षिण कोरिया में बड़े पैमाने पर लोगों की टेस्टिंग हुई और वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन भी टेस्ट पर लगातार जोर दे रहा है लेकिन जापान की पॉलिसी यही है कि टेस्ट केवल उन्हीं का होगा, जिनमें कोरोना के लक्षण दिख रहे हैं और जो लोग पॉजिटिव टेस्ट वाले लोगों के संपर्क में आए हैं. हालांकि जो भी लोग पॉजिटिव आए वो छोटे छोटे ग्रुप में खुद को आइसोलेट कर रहे हैं.
अब जापान में ऐसे टेस्ट भी उपलब्ध हो रहे हैं जहां 10-15 मिनट में रिजल्ट उपलब्ध हो जा रहे हैं लेकिन तकनीक बेहतरी के बाद भी जापान इस नीति पर टिका हुआ है कि टेस्ट उन्हीं का लिया जाएगा, जिसके अंदर वाकई इसके लक्षण नजर आएंगे, उसमें ये शर्त भी है कि कोई शख्स चार या ज्यादा दिनों से बीमार हो.

तो क्या जापान ने कोरोना मामले को दबाने की साजिश की है
इस सबको लेकर लोग तीन ही बातें कह रहे हैं, या तो साजिश, या अच्छा भाग्य और दक्षता. साजिश का मतलब ये है कि जापान इसे बड़े पैमाने पर दबाने की कोशिश कर रहा हो. लोग अपने घरों में मर रहे हों, उनका टेस्ट नहीं हो रहा हो, इलाज भी नहीं दिया जा रहा हो या अस्पतालों में मरने के गलत रिकॉर्ड रखे जा रहे हों. लेकिन जापान में डॉक्टरों के लिए ऐसा कर पाना मुश्किल होगा.

क्या जापान का भाग्य बेहतर है 
क्या जापान का भाग्य बेहतर है. अगर ये बात कहें तो ये कहना भी मुश्किल है.जिस तरह ये बीमारी पूरी दुनिया में फैल रही है, उससे जापान बच सकता है. दरअसल जापान में कोरोना वायरस के बहुत पहले से लोग हमेशा मास्क लगाते रहे हैं, खासकर जो बीमार होते हैं वो तुरंत मास्क में आ जाते हैं. बुजुर्ग कहीं ज्यादा आइसोलेशन में रहते हैं. जापान पहले से सोशल डिस्टेंसिंग और सेल्फ-आइसोलेशन का ख्याल रखता आय़ा है.

क्या दक्षता बेहतर रही 
और तीसरी बात है दक्षता. इसमें कोई शक नहीं कि जापान ने हमेशा जहां जरूरत है, वहां पूरे प्रयास किए हैं. कोई कसर नहीं छोड़ी. जहां टेस्टिंग की जरूरत हैं, वहां मुस्तैदी दिखाई गई. पहले ही ज्यादा मौजूदगी वाले लोगों के बड़े इवेंट बंद कर दिए. प्राइवेट कंपनियों ने भी सरकार के साथ बेहतर तालमेल दिखाया.

अब जापान में तीन हफ्ते का संक्रमण काल खत्म हो चुका है
जापान का दो-तीन हफ्ते का संक्रमण का गंभीर अब खत्म हो गया है. इसे फरवरी के अंतिम सप्ताह तक माना गया था. अब कुछ स्कूल खोल दिए जाएंगे. अब अगर आप जापान के भीड़भाड़ वाले शिंजोकु स्टेशन या फिर शिबुया क्रासिंग पर जाएंगे तो वहां भीड़ पाएंगे.
जापान के कॉलम लेखक आस्कर ब्वाएंद कहते हैं, हम अब तीन दिनों के सप्ताहांत का आनंद ले रहे हैं. हमारे यहां हनामी यानि चेरी के फूलने का सीजन शुरू हो रहा है, जब लोग बड़ी संख्या में पिकनिक में जाते हैं. पेड़ों के ईर्द गिर्द पार्टीज होती हैं. ऐसे में तोक्यो का शिंजुको गेयोन पार्क भरा होता है. लोग वहां फूलों के साथ लगातार तस्वीरें लेने में बिजी दिखते हैं.
हालांकि आधिकारिक तौर पर हनामी इवेंट्स को बैन कर दिया गया है लेकिन ये हमारे कल्चर का इतना अभिन्न हिस्सा है कि हैरानी होगी कि लोग इसको कैसे मानेंगे.

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First published: March 23, 2020, 12:53 PM IST
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