लाइव टीवी

सवाल-जवाब: आशंका के बाद भी जापान में क्यों नहीं हुआ कोरोना विस्फोट

News18Hindi
Updated: March 23, 2020, 6:08 PM IST
सवाल-जवाब: आशंका के बाद भी जापान में क्यों नहीं हुआ कोरोना विस्फोट
चीन के बाद कोरोना वायरस का इंफेक्शन सबसे पहले जापान पहुंचा था, लेकिन जापान में स्थिति नियंत्रण में नजर आ रही है

चीन के बाद पहला कोरोना मरीज जापान में मिला था. जो वुहान से वहां 10 जनवरी के आसपास आया था. इसके बाद जापान उन तीन क्रिटिकल सप्ताह से गुजर चुका है जबकि कोरोना विस्फोटक रूप ले लेता है. वहां केवल 1000 संक्रमित मरीज हैं, जिनका इलाज चल रहा है. जापान ने ऐसा कैसे कर लिया. जानें सवाल-जवाब की शक्ल में-

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 23, 2020, 6:08 PM IST
  • Share this:
चीन में जब दिसंबर में कोरोना शुरुआती दौर में फैल रहा था तब चीन के बाहर जापान अकेला देश था, जिसका एक नागरिक 10-15 जनवरी के बीच कोरोना से संक्रमित होकर जापान लौटा. इसके बाद पूरी दुनिया में जो घटनाक्रम हुए उससे हर कोई मान रहा था कि जापान में भी कोरोना की सूनामी आएगी. इतने बड़े पैमाने में लोग कोरोना का शिकार होंगे कि बचाना मुश्किल हो जाएगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. बल्कि अब वो ऐसे देशों में है, जहां कोरोना ज्यादा कुछ नहीं कर पाया. हालांकि ये स्थिति हेल्थ एक्सपर्ट्स को उलझन में भी डाल रही है.

क्या ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि जापान ने भी कड़े कदम उठा लिए थे?
-नहीं बल्कि इसका उल्टा हुआ. चीन के उलट ना तो जापान ने आइसोलेशन के इंतजाम किए और ना ही यूरोप और अमेरिका की तरह उसने अपने लोगों को कोरंटीन में रहने के लिए मजबूर किया. जापान ने लॉकडाउन भी नहीं किया. अलबत्ता उसने स्कूल जरूर बंद किए लेकिन वहां लोगों की जिंदगी सामान्य तरीके से चलती रही.

तोक्यो तो हमेशा दुनिया का सबसे व्यस्त रहने वाला शहर है, क्या वहां कुछ पाबंदियां लगीं?



- ऐसा भी नहीं हुआ. तोक्यो में 3.2 करोड़ लोग रहते हैं. वहां भी बिजी ऑफिस में ट्रेनों में भीड़ होती रही और रेस्तरां भी खुले रहे.

तो जापान सरकार ने इसे कैसे काबू किया?
- जापान सरकार ने बहुत तेजी से उन क्लस्टर्स की पहचान की, जहां कोरोना प्रभावित लोग थे और वो जिन लोगों के संपर्क में आए थे. उसने इन पर नजर रखी और उनकी टेस्टिंग की. जापान में कोरोना टेस्टिंग केवल उन्हीं लोगों की हो रही है, जिसमें इसके लक्षण दीख रहे हैं या कुछ संकेत मिल रहे हैं. सबको टेस्ट की प्रक्रिया से नहीं गुुजारा जा रहा. हालांकि उसके द्वारा शुरू में धीमेपन और लिमिटेड टेस्टिंग की आलोचना भी हुई.

जापान के लिए सबसे टेस्टिंग टाइम क्या था?
- जब जापान के बंदरगाह पर डायमंड प्रिंसेस नाम का जहाज आकर लगा. ये चीन से चला था. इस जहाज में हर पांच में एक शख्स कोरोना से इंफेक्टेड था. योकोहामा में ये जहाज शुरू में खड़ा रहा. उस पर जापान कोई फैसला ले नहीं पा रहा था लेकिन बाद में इसके लोगों को योकोहामा में कोरेंटीन किया गया.

अब जापान में स्थिति क्या है?
- जापान में 22 मार्च तक 1000 लोग कोरोना से संक्रमित थे. इसमें 50 की मृत्यु हो गई लेकिन उन्होंने तीन क्रिटिकल हफ्तों में बखूबी इस पर काबू किया, अन्यथा उनकी हालत भी इटली, स्पेन, अमेरिका और यूरोप के दूसरे देशों की तरह हो गई होती. जबकि इसकी आशंका इसलिए ज्यादा थी, क्योंकि कोरोना चीन के बाद सबसे पहले जापान ही पहुंचा था. हालांकि कुछ लोगो को आशंका है कि जापान में कुछ क्लस्टर्स पर तो बहुत अच्छी तरह फोकस किया गया लेकिन वहां अब भी खतरा बना हुआ है.

जापान ने जनवरी में और क्या कदम उठा लिए थे?
उसने जनवरी के दूसरे हफ्ते से ही आफिसों में हैंड सेनेटाइजर अनिवार्य कर दिए थे. इनका इस्तेमाल शुरू हो गया था. आफिसों में सेनेटाइजर्स स्टोर कर लिए गए थे. मास्क की बिक्री तेज हो गई थी और लोगों ने पब्लिक हेल्थ सिस्टम को प्रोटेक्ट करने के लिए जरूरी कदमों को स्वीकार करना भी शुरू कर दिया था. इससे संक्रमण का जो उठान तेज होता वो ठहर गया. हालांकि जापान इस मामले में किस्मत वाला रहा क्योंकि बहुत ज्यादा संक्रमित लोग जापान नहीं पहुंचे.

क्या जापान ने इसको पहले स्टेज से आगे ही नहीं जाने दिया?
- ये कहा जा सकता है. क्योंकि 09 मार्च को जापान सरकार ने एक रिपोर्ट जारी की. जिसमें सरकार द्वारी नियुक्त पैनल ने कहा जापान में 80 फीसदी केस ऐसे थे, जिसमें इंफेक्शन को एक व्यक्ति से दूसरे में जाने ही नहीं दिया गया. लिहाजा संक्रमण की चैन बन ही नहीं पाई. बहुत से इंफेक्शन क्लस्टर्स की पहचान शुरुआती स्टेज में ही कर ली गई.

क्या इसमें जापान के कल्चर का भी कोई योगदान है?
हां. जापान में हाथ मिलाने या गले मिलना बहुत कम होता है. उनका कल्चर भी इसमें विश्वास नहीं रखता. साथ ही हाथ साफ रखने में भी वो यूरोप से आगे हैं.

जापान में अस्पतालों की क्या स्थिति है?
- जी7 देशों में जापान अकेला ऐसा देश है, जहां 1000 बेड वाले कई अस्पताल हैं. ये क्षमता अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा के पास भी नहीं है. वर्ल्ड बैंक का डाटा भी इसकी तस्दीक करता है.

क्या जापान में स्कूल अब फिर से खुलने वाले हैं?
- जापान से आ रहीं रिपोर्ट्स यही कह रही हैं. वहां सरकार फिर से स्कूल खोलने की घोषणा कर सकती है. वहां रेलवे स्टेशनों और महत्वपूर्ण जगहों पर भीड़ दिखने लगी है.

ये भी पढ़ें 
सामने आई कोरोना वायरस की सबसे बड़ी कमजोरी, इन 15 तरीकों से होगा बचाव
सबसे बड़ी बुजुर्ग आबादी वाले जापान का हाल क्यों इटली सरीखा नहीं हुआ
कोरोना के इलाज में ये है ट्रंप की पसंदीदा दवा, दुनियाभर में हो रही है लोकप्रिय
कोरोना वायरस से मरने वालों का नहीं हो पा रहा है अंतिम संस्कार, वेटिंग लिस्ट में हैं लाशें

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नॉलेज से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: March 23, 2020, 6:08 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर