आफिसों में ऊंची हील के जूते पहनने पर नाराज जापानी महिलाएं क्यों चला रही हैं #KuToo

जापान में आफिस में महिलाओं के लिए मेकअप करके आना और हाई हील के जूते पहनना अनिवार्य है, लेकिन ऊंची हील से महिलाओं के स्वास्थ्य पर खराब असर पड़ रहा है.

News18Hindi
Updated: June 11, 2019, 1:20 PM IST
आफिसों में ऊंची हील के जूते पहनने पर नाराज जापानी महिलाएं क्यों चला रही हैं #KuToo
जापान में #MeToo की तरह चल रहा है #KuToo
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Updated: June 11, 2019, 1:20 PM IST
जापान में इन दिनों कामकाजी महिलाएं गुस्से में हैं. वो वर्कप्लेस पर ऊंची हील के जूते पहनकर जाने के नियम के खिलाफ अभियान चला रही हैं. इसे जापान में लोगों का समर्थन तो मिल रहा है लेकिन सरकार ने जरूर इस पर अनुकूल रुख नहीं दिखाया है.
लंबे समय से जापान में काम की जगह पर जापानी महिलाओं को मेकअप करने के साथ ऊंची हील के जूते पहनकर जाना होता है. ये उनके लिए अनिवार्य है. लेकिन ऊंची हील से महिलाओं के स्वास्थ्य पर खराब असर पड़ रहा है. वो कई बार इसे लेकर विरोध कर चुकी हैं लेकिन इसका कोई असर नहीं पड़ा. इस बार इसे खासा समर्थन मिल रहा है.



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क्यों इसे कहा जा रहा है #KuToo

दरअसल इसकी शुरुआत 32 साल की एक अभिनेत्री और लेखिका यूमि इशिकावा ने की. उन्होंने हाल ही में करीब 20 हजार लोगों के हस्ताक्षर वाली एक याचिका सरकार को सौंपी. इसके बाद ही जापान में कामकाजी महिलाएं भी इसे लेकर मुखर हो उठीं. जापानी भाषा में जूतों के लिए शब्द है कुत्सु और दर्द को कहते हैं कुत्सू. इसी शब्द को #MeToo की तर्ज पर #KuToo नाम दिया गया है यानी कूटू.
जापान सरकार को सौंपी याचिका को कुछ समय पहले ऑनलाइन शुरू किया गया था. ये विरोध खासकर उन कंपनियों के खिलाफ था जिन्होंने महिला स्टाफ के लिए हील वाले जूते पहनना अनिवार्य किया हुआ है.

जापान के आफिसों में महिलाओं के लिए हाई हील के जूते पहनना और मेकअप करके आना अनिवार्य है.

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क्या कहा संसदीय समिति ने
विरोध ज्यादा होने के बाद जापान सरकार ने एक संसदीय समिति गठित की. जिसने ये तो मान लिया कर्मचारियों की सेहत और सुरक्षा तो जरूरी है लेकिन कुछ पेशों में ऊंची एड़ी के जूते पहनना जरूरी है. हालांकि जापान के मंत्री ताकुमी नेमोटो ने #KuToo का समर्थन किया है. जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि वो अभी याचिका पर विचार कर रहा है.

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जापान में लैंगिक असमानता ज्यादा
हालांकि जापान में लंबे समय से लोग इस तरह की लैंगिक असमानता की शिकायत करते आ रहे हैं. लैंगिक बराबरी सूची के अनुसार दुनिया के 149 देशों में जापान 110वें नंबर पर आता है. यानी जापान में महिलाओं और पुरुषों के बीच कई स्तर पर भेदभाव बहुत ज्यादा है.

लैंगिक समानता के मामले में जापान का रिकॉर्ड बहुत खराब है.


पुरुषों के लिए क्या है कोड
जापान में पुरुषों के लिए तो ऊंची एड़ी के जूते पहनने का कोई नियम नहीं है. ज्यादातर शर्ट, टाई के साथ सूट पहनते हैं. गर्म महीनों के लिए कई दफ्तरों में "कूल" ड्रेसकोड है, जिसमें पुरुष छोटी बांह के कपड़े पहन सकते हैं. तब टाई पहनना अनिवार्य नहीं होता. यही नहीं वो दफ्तर के भीतर अपने बाहर वाले जूते बदल कर सैंडल या स्लिपर जैसे आरामदायक फुटवियर पहन लेते हैं.

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अमेरिका और कई देशों में हो चुका है विरोध
अमेरिका, कनाडा और यूरोप की महिलाओं ने भी समय-समय पर कार्यस्थल पर ड्रेस, मेकअप और हाई हील के जूतों की अनिवार्यता का विरोध किया है. 2016 में ब्रिटेन में ऊंची एड़ी वाले जूतों को लेकर नौकरी से निकाले जाने के बाद निकोला थॉर्प नाम की महिला ने इसके खिलाफ अभियान चलाया था. उनकी याचिका को पचास हजार से भी ज्यादा लोगों ने हस्ताक्षर कर समर्थन दिया था. समर्थन मिलने के बावजूद सरकार ने इस बारे में कंपनियों को रोकने के लिए कोई कानून नहीं बनाया.

स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है
हाई हील की सैंडिल और जूते पहनकर चलने वाली महिलाओं के शरीर में अक्सर दर्द की शिकायत बनी रहती है. खासकर हिप और स्पाइन हिस्सों पर. जानिए हाई हील का नियमित इस्तेमाल हेल्थ पर क्या खराब असर डालता है

हाई हील के जूते और सेंडिल्स स्वास्थ्य पर बहुत खराब असर डालती हैं


1. स्पाइन - हाई हील की सैंडिल पहनने से स्पाइन के डिस्टर्ब होने का डर बना रहता है.
2. घुटने - घुटनों पर बहुत दबाव पड़ता है. जिसकी वजह से हाई हील पहनने वालों को अक्सर घुटने में दर्द की शिकायत हो जाती है.
3. वजन में असंतुलन - वजन का संतुलन बिगड़ जाता है. सभी ज्वाइंट्स और हड्डियों पर खराब असर पड़ता है.
4. पोश्चर पर असर - पैरों पर दबाव बढ़ जाता है. शरीर के संतुलन पर असर होता है और इससे आप अजीबोगरीब तरीके से खड़े होने लगते हैं. पोश्चर बिगड़ जाता है.
5. पीठ दर्द- स्पाइन पर असर पड़ता है. पीठ दर्द हमेशा रहने वाला दर्द बन जाता है.

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