2 साल से बाढ़ के पानी में क्यों डूब रहा है केरल

2 साल से बाढ़ के पानी में क्यों डूब रहा है केरल
जानें कब और कहां होगी बारिश

केरल (Kerala) में बाढ़ (Flood) ने भयानक तबाही मचाई है. पिछले साल भी यहां भयानक बाढ़ आई थी, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे. सवाल उठता है कि केरल में पिछले 2 वर्षों से बाढ़ से इतनी भयानक तबाही क्यों आ रही है...

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 10, 2019, 3:30 PM IST
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महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल (Kerala) में बाढ़ (Flood) ने भयानक तबाही मचाई है. बड़े स्तर पर राहत और बचाव के काम चल रहे हैं लेकिन हालात काफी खराब हैं. केरल में बारिश और बाढ़ से 45 लोगों की मौत हो चुकी है. एक लाख से अधिक लोगों को राहत कैंप में पहुंचाया गया है. मल्लपुरम में अब तक 10 और वायनाड में 9 लोगों की मौत हुई है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक छोड़कर 11 अगस्त को वायनाड के दौरे पर जा रहे हैं.

केरल के मल्लपुरम में भूस्खलन के बाद 30 परिवार लापता हो गए हैं. बाढ़ की वजह से कई ट्रेनों को रद्द किया गया है. सीएम पिनराई विजयन ने बाढ़ से प्रभावित इलाकों का दौरा किया है. उन्होंने कहा है कि 15 अगस्त को तेज बारिश का अनुमान है, जिसकी वजह से समुद्र में तेज लहरें उठ सकती हैं. केरल में पिछले साल भी इसी तरह की बाढ़ आई थी. सवाल है कि केरल पिछले 2 वर्षों से बाढ़ में क्यों डूब रहा है.

पिछले साल सरकार को हुआ था 20 हजार करोड़ का नुकसान



केरल में पिछली बार हुई बारिश की तबाही के बाद कहा गया था कि ऐसी तबाही यहां 94 साल पहले हुई थी. पिछले कुछ दशकों में केरल में बाढ़ की बात सुनी भी नहीं गई. लेकिन पिछले साल यहां के 80 फीसदे इलाके बाढ़ के पानी में डूब गए. करीब 11 दिनों तक लगातार बारिश हुई थी.
बारिश और बाढ़ की चपेट में आकर सैकड़ों लोग मारे गए थे. बाढ़ ने करीब 40 लाख लोगों को प्रभावित किया था. सरकार को इससे निपटने के लिए 20 हजार करोड़ रुपए खर्च करने पड़े थे. ये रकम राज्य की जीडीपी का करीब 15 फीसदी है.

why kerala has worst floods and heavy rains in last two years
पिछले साल केरल सरकार को बाढ़ की वजह से 20 हजार करोड़ का नुकसान हुआ था


केरल में आमतौर पर 3,000 एमएम बारिश होती है. लेकिन पिछले 2 साल से औसत से ज्यादा बारिश हो रही है. आमतौर पर केरल में जून जुलाई में मॉनसून की तेज बारिश होती है. इसके पीछे दक्षिण पश्चिम मॉनसून की मजबूती का हाथ होता है. इसके बाद उसकी त्रीवता कम हो जाती है. लेकिन पिछले 2 साल से अगस्त में भी जोरदार बारिश हो रही है. पिछले साल 8 से 16 अगस्त के बीच जोरदार बारिश हुई. इस दौरान राज्य के सभी 14 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई.

बाढ़ से आपदा प्रबंधन ठीक से निपट नहीं पा रही

केरल में बाढ़ की चिंताजनक हालत है और आपदा प्रबंधन इससे ठीक तरह से निपट नहीं पा रही है. भारत में बाढ़ का पूर्वानुमान केंद्रीय जल आयोग लगाती है. केरल में बाढ़ का पूर्वानुमान लगाने का तंत्र नहीं है. बाढ़ की पहले से जानकारी नहीं मिल पाती इसलिए लोग अपने बचाव के लिए कुछ नहीं कर पाते.

ज्यादा बारिश की वजह से बांधों के फाटक खोलने पड़ जा रहे हैं, इसलिए निचले इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन के मामलों में तेजी आई है. पिछले 2 वर्षों से ऐसा ही हो रहा है. पिछले साल 39 बांध जुलाई की बारिश में ही 85 से 100 फीसदी तक भर गए थे. अगस्त में हुई तेज बारिश की वजह से बांधों को खोलना पड़ गया था, जिसकी वजह से केरल के निचले इलाके डूब गए थे.

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केरल में अब तक बारिश और बाढ़ से 45 लोग मारे गए हैं


विशेषज्ञ बताते हैं कि पिछले साल बांध का पानी धीरे-धीरे छोड़ा जाता तो उतनी दिक्कत नहीं आती. पिछले कुछ वर्षों में कई बांध बारिश के दिनों में पूरा भर भी नहीं पाते थे. लेकिन पिछले 2 वर्षों में इनमें बारिश के दिनों में पूरा पानी भऱ जाता है. मजबूर बांध के फाटक खोलने पड़ते हैं.

पिछले 50 वर्षों के बारिश के आंकड़े से औसत बारिश का आंकड़ा निकाला जाता है. देश में हर साल औसतन 118 सेंटीमीटर बारिश होती है. लेकिन केरल में 292 सेंटीमीटर की औसत बारिश होती है. यानी पूरे देश के औसत के लिहाज से ढाई गुना. पिछले 2 वर्षों से अगस्त में होने वाली बारिश में तेजी आई है, जो केरल को बाढ़ के पानी में डुबो रहा है.

केरल में एक तो पिछले 2 वर्षों से ज्यादा बारिश हो रही है. उस पर बांधों के खराब प्रबंधन ने हालात और बुरे किए हैं.

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