जानिए लैंसेट रिपोर्ट ने रूसी वैक्सीन को क्यों माना है असरदार

जानिए लैंसेट रिपोर्ट ने रूसी वैक्सीन को क्यों माना है असरदार
कोविड-19 (Covid-19) के लिए रूसी वैक्सीन (Russian Vaccine) की पहले दो चरणों की रिपोर्ट प्रकाशित हुई है जिसमें इसे सफल बताया गया है. (फोटो- AFP)

रूसी वैक्सीन (Russian Vaccine) के ट्रायल की रिपोर्ट (Report) लैंसेट (Lancet) जर्नल में प्रकाशित ही है जिसमें शोधकर्ताओं ने वैक्सीन के प्रभाव (Efficacy) पर काफी संतोष जताया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 5, 2020, 4:02 PM IST
  • Share this:
पिछले महीने ही रूस (Russia) ने कोविड-19 (Covid-19) की अपनी खोजी वैक्सीन (Vaccinie) की सफलता की घोषणा की थी. स्पूतनिक V (Sputnik) नाम की इस वैक्सीन के अंतिम नतीजों से पहले ही रूसी सरकार की इस घोषणा पर पूरी दुनिया में आलोचना झेलनी पड़ी थी. जबकि रूसी सरकार ने उस समय कहा था कि इसकी और भी लोगों पर परीक्षण (Trails) चल रहे हैं. हाल ही में यह वैक्सीन एक बार फिर से चर्चा में हैं क्योंकि एक प्रमुख शोध जर्नल की रिपोर्ट में इस वैक्सीन को शुरुआती तौर पर सुरक्षित और सफल बताया गया है.

पहले दो चरणों के नतीजे
यह रिपोर्ट शुक्रवार को लैंसेट जर्नल (Lancet) में प्रकाशित हुई है. रूस ने इस वैक्सीन की घोषणा इसके तीसरे दौर के शुरू होने से पहले ही कर दी थी जबकि पहले दो दौरों के नतीजे तब घोषित भी नहीं हुए थे. लैंसेट ने हाल ही में इस वैक्सीन के ट्रायल के पहले दो चरणों की नतीजे प्रकाशित किए हैं.

क्या कहते हैं शोधकर्ता
इस वैक्सीन को बनानेवालों का कहना है कि यह वैक्सीन सुरक्षित है और इसने सभी दूसरे दौर में जांचे गए सभी 76 लोगों ने मजबूत प्रतिरोधी प्रतिक्रिया दिखाई है. वहीं लेखकों ने यह पाया है कि भागीदारों पर केवल 42 दिन तक नजर रखी गई थी और अध्ययन के नमूने छोटे थे और इसमें कोई प्लेसेबो या कंट्रोल वैक्सीन का उपयोग नहीं किया गया था.



लेकिन यह बात स्पष्ट नहीं अभी
ट्रयल के एक हिस्से में केवल पुरुषों और वह भी 20 से 30 साल की उम्र के लोगो को शामिल किया जाता है, इसलिए यह अभी साफ नहीं है कि यह वैक्सीन बुजुर्गों पर कितनी कारगर है जो कोविड-19 बीमारी के मामले में ज्यादा जोखिम में रहते हैं. पिछले महीने रूसी वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि उन्होंने तीसरे चरण के ट्रायल शुरू कर दिए हैं जिसमें उन्होंने 40 हजार प्रतिभागियं को शामिल किया है. इसके नतीजे नवंबर तक सार्वजनिक होने की बात की गई थी.

Russia, Covid-19 vaccine
रूस (Russia) ने पिछले महीने बिना पहले दो चरणों की रिपोर्ट जारी किए ही वैक्सीन (Vaccine) की औपचारिक घोषणा कर दी थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


कैसी है प्रतिक्रिया
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ इस वैक्सीन की प्रभावोत्पादकता को लेकर सावधानी बरतने का चुनाव करत दिख रहे हैं, तो वहीं वैक्सीन को विकसित करने वाले रूसी शोधकर्ताओं ने रिपोर्ट के साथ कुछ बड़े दावे किए हैं. रूस की यह वैक्सीन रूस के गामालेया रिसर्च इंस्टीट्यूट ने बनाई है. यह पहली बार है कि इंसानों पर हुए किसी ट्रायल के पहले और दूसरे चरण के अध्ययन के विस्तानर से जानकारी दी गई है जिसमें वैक्सीन की सुरक्षा और प्रतिरोधी प्रतिक्रिया पैदा करने की क्षमता को जांचा गया  है.

Hong Kong में 142 दिन बाद फिर पॉजिटिव पाया गया कोरोना मरीज, जानिए इसके मायने

क्या है रिपोर्ट में
लैंसेट की रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने कहा है कि वैक्सीन के दो भाग चुने हुए प्रतिभागियों को 21 दिन के अलग अलग समय पर दी गई थी. उन्होंने यह जांचा कि क्या इससे शरीर में सुरक्षा देने वाली एंटीबॉडी बनती हैं या नहीं. इसके अलावा उन्होंने यह भी जांचा कि इससे वायरस को मार पाने वाली कोशिकाएं बन रही हैं या नहीं. वैज्ञानिकों का दावा था कि दोनों ही उद्देश्य सफल रहे और इसमें कोई बहुत विपरीत प्रतिक्रिया या स्थिति बनने क रिपोर्ट नहीं मिली.

यह शिकायतें भी मिलीं
28 से 50 प्रतिशत प्रतिभागियों ने इंजेक्शन लगने के बाद सिर, मासपेशियों और जोड़ों में दर्द की शिकायत की, लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि जो भी लक्षण दिखाई दिए वे केवल हलके और मामूली किस्म के थे और कोई गंभीर मामला सामने नहीं आया.

vaccine, Russia
रूस (Russia) की वैक्सीन (Vaccine) के पश्चिमी देश के कई विशेषज्ञ संदेह की नजर से देख रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


अन्य देशों से चल रही है बातचीत
द हिंदू की रपोर्ट में एक विशेषज्ञ ने बताया कि इस तरह की प्रतिक्रिया किसी वैक्सीन में आमतौर पर होती हैं और नतीजे तीसरे चरण के ट्रायल के  लिए उत्साहजनक माने जा सकते हैं. गौरतलब है कि रूस से कई देशों का संपर्क है जो इस वैक्सीन के अगले ट्रायल तक में रुचि रखते हैं. रूस का दावा है कि इस मामले में कई देशों से औपचारिक स्तर तक पर बातचीत चल रही है.

कोरोना वायरस को नाक से बाहर नहीं निकलने देगा यह स्प्रे, अमेरिकी शोध का दावा

वहीं कई पश्चिमी विशेषज्ञ इस वैक्सीन की कारगरता पर सवाल उठाते हैं. इसमें सबसे अहम पहलू परीक्षण की व्यापकता का है. केवल दो ही अस्पतालों के नियंत्रित  हालातों में वैक्सीन का परीक्षण किया गया है. कई विशेषज्ञों का शुरू से यह मानना है कि इस मामले में काफी जल्दबाजी दिखाई जा रही है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading