नेता आखिर इतना झूठ क्यों बोलते हैं...

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बारे में कहा जाता है कि वो दुनिया में सबसे ज्यादा झूठ बोलने वाले नेता हैं. कुछ साल पहले नेताओं के झूठ बोलने की मनोवृत्ति पर एक किताब प्रकाशित हुई थी. इसका नाम था-"व्हाई लीडर्स लाई"

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: July 23, 2019, 9:44 PM IST
Sanjay Srivastava
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: July 23, 2019, 9:44 PM IST
कश्मीर मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इंटरनेशनल झूठ से पूरी दुनिया में खलबली मच गई है. उसके बाद लोग ये भी पूछने लगे हैं कि ये नेता इतना झूठ क्यों बोलते हैं. दरअसल इस झूठ का संबंध ट्रम्प के एक ऐसे बयान से है, जो ताल्लुक भारत और कश्मीर से रखता है. अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान आते ही जिस तरह भारत के विदेश मंत्रालय ने इसका सिरे से खंडन किया, उससे सोशल मीडिया पर ट्रंप अपने झूठ बोलने की आदत के चलते ट्रोल होने लगे.

दरअसल वाशिंगटन पहुंचे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ मुलाकात में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत ने कश्मीर मुद्दे पर उनसे मध्यस्थता की अपील की है. वो इसके लिए तैयार भी हैं. भारतीय विदेश मंत्रालय ने तुरंत अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे का खंडन किया. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ऐसी कोई अपील नहीं की है.

हालांकि ये कोई पहला मौका नहीं है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने झूठ बोला हो. इससे पहले भी वो कई बार सफेद झूठ बोल चुके हैं. अब तो ये कहा जाने लगा है कि वो अमेरिका के ऐसे राष्ट्रपति बन गए हैं, जिनके नाम झूठ बोलने का रिकॉर्ड बन गया है.

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क्या कहता है कि वाशिंगटन पोस्ट का फैक्ट चेक 
अमेरिकी अखबार "वॉशिंगटन पोस्ट" के फैक्ट चेकर्स डेटाबेस के अनुसार ट्रंप ने अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद से अबतक कम से कम 10 हजार से ज्यादा बार झूठ बोल चुके हैं. उन्होंने औसतन प्रतिदिन 12 बार झूठ बोला है.

अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद से ट्रंप दस हजार से ज्यादा बार झूठ बोल चुके हैं

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वॉशिंगटन पोस्ट के फैक्ट चेकर्स डेटाबेस का कहना है कि जब भी अमेरिका के राष्ट्रपति का कोई बयान संदिग्ध लगा तो उसकी पड़ताल की गई. पड़ताल के बाद ट्रंप के अधिकतर बयान झूठे पाए गए. वॉशिंगटन पोस्ट के फैक्ट चेकर्स डेटाबेस के मुताबिक़ खास बात ये भी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने कई झूठे दावों को कई बार दोहराया भी है.

दुनिया के ज्यादातर बड़े नेता झूठ बोलते रहे हैं
वैसे कहा जाता है कि दुनियाभर में सभी नेता समय-समय पर जरूरत के अनुसार झूठ बोलने के लिए चर्चित होते रहे हैं. उसमें चाहे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन हों या फिर दूसरे देशों के राष्ट्रप्रमुख-सभी के झूठे बयान उन्हें फंसाते रहे हैं.

कुछ समय पहले एक चर्चित किताब भी नेताओं की झूठ बोलने की प्रवृत्ति पर लिखी गई थी. इस किताब का नाम है व्हाई लीडर्स लाई (Why Leaders Lie: The Truth About Lying in International Politics). ये किताब अमेरिका के जाने माने पत्रकार जॉन मीरसीमर ने लिखी है.

अमेरिकी पत्रकार जॉन जे मीरसीमर की चर्चित किताब-व्हाई लीडर्स लाई, इस किताब में उन्होंने दुनिया के ऐसी बातों का खूब जिक्र किया है. इसके मनोविज्ञान को जानने से लेकर तह तक जाने का भी प्रयास किया है


वर्ष 2011 में ये किताब जब प्रकाशित हुई तो खासी चर्चाओं में रही. इसे बेस्ट सेलर किताबों में शुमार किया गया. ये किताब नेताओं के झूठ बोलने की आदतों की पड़ताल करती है. इसका कहना है कि दुनियाभर में तानाशाह शासकों की तुलना में लोकतांत्रिक देशों के राष्ट्रप्रमुख ज्यादा झूठ बोलते हैं. खासकर अपनी ही जनता के सामने वो ऐसा करते हैं, क्योंकि कई बार उन्हें लगता है कि देश के लिए यही ठीक रहेगा. शायद इसलिए भी देश के लोग उनकी हर बात पचा जाते हैं.

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रूजवेल्ट ने झूठ बोलकर देश को वर्ल्ड वार में झोंका था
अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रेंक रूजवेल्ट के बारे में कहा जाता है कि अमेरिकी जनता के नहीं चाहने के बाद भी उन्होंने झूठ बोलकर अमेरिका को अगस्त 1941 में दूसरे विश्व युद्ध में झोंक दिया. क्योंकि उन्हें लगता था कि ऐसा करना अमेरिका के हित में होगा.

किताब कहती है कि मौजूदा और अतीत के कुछ तानाशाहों मसलन मोहम्मद गद्दाफी, होस्नी मुबारक और सद्दाम हुसैन ने अगर अपनी जनता को भरमाने के लिए ऐसा बोला तो उनसे कहीं ज्यादा झूठ जिमी कार्टर, जार्ज डब्ल्यू बुश और बराक ओबामा जैसे नेताओं ने बोले. हालांकि किताब ये भी कहती है कि लोकतांत्रिक देशों के राष्ट्रप्रमुख तानाशाहों की तुलना में ज्यादा झूठ बोलते नजर आए हैं.

80 के दशक में अमेरिकी राष्ट्रपति के झूठ ने इराक को तबाह कर दिया. सद्दाम हुसैन को तो पूरे परिवार के साथ ही खत्म कर दिया गया


क्या क्या झूठ बोलकर जनता को भरमाते हैं
गद्दाफी के खिलाफ जब शुरुआत में विद्रोह हुआ तो उसे दबाने के बाद उन्होंने सत्ता पर रहने के लिए ये झूठ बोला कि लीबिया की जनता अब भी उनसे प्यार करती है. जो लोग फायरिंग कर रहे हैं, वो दरअसल खुशियां मना रहे हैं.

उसी तरह हुस्नी मुबारक अपने खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान ये कहकर मिस्र पर शासन करते रहे कि ये लोग बेईमान विदेशी एजेंट्स हैं, जिनसे देश को खतरा है. लेकिन ऐसा ही कुछ अपने अपने तरीकों से जिमी कार्टर से लेकर बुश तक ने किया. किताब कहती है कि ये नेता आपस में जितना झूठ नहीं बोलते, उससे ज्यादा झूठ जनता के सामने बोलते हैं. खासकर यूरोपीय लोकतांत्रिक देशों में ऐसा बहुत होता है.

आमतौर पर राष्ट्रप्रमुख अपने झूठ के सहारे विदेशी हमले या विदेशी साजिश का डर सबसे ज्यादा दिखाते हैं


विदेशी डर का झूठ तो थोक में बोला जाता है 
आमतौर पर वो बार बार विदेशी डर का झूठ खूब बोलकर उनका डर दिखाते हैं, इससे उन्हें फायदा भी मिलता है. कोल्ड वार के दिनों में सोवियत संघ के प्रमुख निकिता ख्रुश्चेव बार बार अपने देश को ये डर दिखाते थे कि अमेरिका उनपर अपनी मिसाइलों से पहले हमला कर सकता है. उसी तरह जब अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर से 80 के दशक के दौरान ये पूछा गया कि क्या वो ईरान के होस्टेज अमेरिकी दूतावास को छुड़ाने के लिए कोई तैयारी कर रहे हैं. तो उन्होंने साफ झूठ बोल दिया कि वो ऐसा कुछ नहीं करने जा रहे.

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इराक के खिलाफ युद्ध के लिए भी बुश ने बोला था झूठ
इसी तरह इराक के खिलाफ लड़ाई छेड़ने और सद्दाम हुसैन को ठिकाने लगाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश ने बार बार झूठ बोला कि इराक के पास खतरनाक रासायनिक हथियार हैं. उन्होंने सद्दाम के खंडन को सिरे से खारिज कर बार बार वही बात कही, जो वो कहना चाहते थे.

नतीजा ये हुआ कि इराक के खिलाफ खाड़ी में युद्ध छेड़ा गया. इराक इस लड़ाई में तबाह हो गया. सद्दाम और उनके परिवार को मौत के घाट उतार दिया गया. लेकिन बुश की अपनी लोकप्रियता उनके देश में इससे खासी बढ़ गई.

आमतौर पर देशों के राष्ट्रप्रमुख या दिग्गज नेता पांच तरह के झूठ बोला करते हैं


कितनी तरह के झूठ बोलते हैं नेता
इस किताब दुनियाभर के तमाम देशों के कुटिल झूठ के किस्सों और हकीकत को बयां किया है. किताब कहती है कि आमतौर पर नेता पांच तरह के झूठ बोलते हैं, पहला- दूसरे देश के प्रति डर दिखाकर जनता को अपने पीछे लाने के लिए झूठ, दूसरा- भय से बोला गया झूठ, तीसरा- रणनीति के तौर पर खुद के फायदे के लिए बोला गया झूठ, चौथा-राष्ट्रवाद के जरिए अपनी ओर माहौल मोड़ने के लिए बोला गया झूठ और आखिरी झूठ आमतौर पर हल्का फुल्का होता है, जैसा हर कोई करता है.

कई बार पता ही नहीं लगता कि क्या सच और क्या झूठ
मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति क्यों इतना झूठ बोलते हैं, इसके बारे में यही कहा जा सकता है, संभव है कि ये उनकी आदत में शुमार हो गया हो, उन्हें ये लगता हो कि वो जो कह रहे हैं, वही सही है. अन्यथा नेता आमतौर जनता को भड़काने और अपने फायदे के लिए झूठ का धडल्ले से इस्तेमाल करते हैं. उन्हें इसका फायदा भी मिलता है. हालांकि राजनीति में झूठ और सच इस तरह तर्कों की कसौटी पर चढ़ा दिये जाते हैं कि उनके बीच की महीन रेखा का कई बार पता ही नहीं चलता.

बिजनेस लीडर्स भी बोलते हैं झूठ
फोर्ब्स मैगजीन की एक रिपोर्ट कहती है कि अच्छे खासे नेता झूठ बोलते हैं. इसी रिपोर्ट में कहा गया कि सिलिकान वैली के बड़े बड़े बिजनेस लीडर्स ने भी इसका सहारा लिया है. लैरी एलिसन और स्टीव जॉब्स जैसे दिग्गजों ने अक्सर झूठ बोलकर ग्राहकों को भरमाया है. भारतीय राजनीति में अक्सर हम ये सुनते हैं कि सियासी दल आपस में और एक-दूसरे के नेताओं पर झूठ बोलने का आरोप लगाते रहे हैं.

हालांकि कुछ लोग झूठ को कला कहते हैं तो कुछ इसे स्वतंत्रता का एक एक्ट मानते हैं. झूठ और सच को लेकर प्राचीन काल से लेकर अब तक बहुत सी बातें कही जाती रही हैं लेकिन ये भी हकीकत ये भी है कि कुछ झूठ तब सच लगने लगते हैं, जब वो बार बार जोरशोर से कहे जाते हैं.

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First published: July 23, 2019, 9:44 PM IST
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