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अयोध्या केस: राजीव धवन को जमीयत ने क्यों हटाया, गुस्से में फाड़ा था राम मंदिर का नक्शा

News18Hindi
Updated: December 3, 2019, 3:22 PM IST
अयोध्या केस: राजीव धवन को जमीयत ने क्यों हटाया, गुस्से में फाड़ा था राम मंदिर का नक्शा
राजीव धवन ने फेसबुक पर लिखा- 'बाबरी केस के वकील (एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड) एजाज मकबूल ने मुझे बर्खास्त कर दिया है

राजीव धवन (Rajeev Dhavan) ने लिखा है- कहा जा रहा है कि मुझे केस से इसलिए हटा दिया गया है, क्योंकि मेरी तबीयत ठीक नहीं है. ये बिल्कुल बकवास है.'

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  • Last Updated: December 3, 2019, 3:22 PM IST
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अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद (Ayodhya Ram Janmboomi Case) में सुन्नी वक्फ बोर्ड समेत मुस्लिम पक्ष की ओर से जिरह करने वाले सीनियर वकील राजीव धवन को केस से हटा दिया गया है. राजीव धवन ने खुद फेसबुक पर पोस्ट लिखकर इसकी जानकारी दी है. सीनियर वकील राजीव धवन ने फेसबुक पर लिखा- 'बाबरी केस के वकील (एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड) एजाज मकबूल ने मुझे बर्खास्त कर दिया है, ये जमीयत का मुकदमा देख रहे हैं. जमीयत को ये हक है कि वो मुझे केस से हटा सकते हैं, लेकिन मुझे बिना आपत्ति के हटाया गया. अब मैं डाली गई पुनर्विचार याचिका में शामिल नहीं हूं.' धवन ने आगे लिखा, 'कहा जा रहा है कि मुझे केस से इसलिए हटा दिया गया है, क्योंकि मेरी तबीयत ठीक नहीं है. ये बिल्कुल बकवास है.'

अयोध्या केस में पुनर्विचार याचिका दाखिल
सोमवार को अयोध्या रामजन्मभूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में पहली पुनर्विचार याचिका दाखिल हुई. इस पुनर्विचार याचिका (Review Petition) को मौलाना सैय्यद अशद राशिदी (Maulana Syed Ashhad Rashidi) ने दाखिल किया है. राशिदी अयोध्या भूमि विवाद के पक्षकार एम सिद्दीक के कानूनी वारिस है. इस याचिका में उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के 9 नवंबर के फैसले में भारी खामियां हैं. इसलिए इसमें पुनर्विचार की जरूरत है.

वकील एजाज मकबूल की 217 पेज की याचिका में 217वें पेज पर कहा गया है, "माननीय न्यायालय ने राहत देने में गलती की है जो कि बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) को ध्वस्त करने आदेश जैसा है." माननीय कोर्ट ने हिंदू पक्ष को जमीन देकर 1934, 1949 और 1992 के दौरान हुए अपराधों को पुरस्कार देने की गलती की है. वह भी ऐसे में जब वह (कोर्ट) स्वयं कह चुका है कि यह कार्य गैरकानूनी थे.



गुस्से में फाड़ा था नक्शा
राम जन्मभूमि- बाबरी मस्जिद (Ram Mandir-Babri Masjid) सुनवाई पर आखिरकार 16 अक्टूबर को विराम लगा था. 40 दिनों तक लगातार सुनवाई हुई थी. सुनवाई के दौरान रोजाना तीखी बहसें होती रहीं. आखिरी रोज हिंदू महासभा (Hindu Mahasabha) के वकील विकास सिंह ने जन्मभूमि का नक्शा पेश किया जिसे तुरंत ही मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन (Rajiv Dhawan) ने फाड़ दिया.Ayodhya Verdict, supreme court, ram mandir, babri masjid, ram janam bhoomi, babri masjid land dispute, निर्मोही अखाड़ा, Nirmohi Akhara, ram mandir land dispute, CJI Ranjan Gogoi, ayodhya dispute, अयोध्या फैसला, सर्वोच्च न्यायालय, राम मंदिर बाबरी मस्जिद, राम जन्म भूमि, रामलला विराजमान, Ram lalla Virajman, देवकीनंदन अग्रवाल, Devkinandan Agarwal, बाबरी मस्जिद भूमि विवाद, राम मंदिर भूमि विवाद, CJI रंजन गोगोई, अयोध्या विवाद, Ayodhya Case, Ayodhya Dispute, Ram Janmabhoomi, Supreme Court on Ayodhya Case, अयोध्या मामला, अयोध्या विवाद, राम जन्मभूमि, अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट

नाराज हो गए थे CJI
इसके बाद कोर्टरूम में सीजेआई रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi) का गुस्सा भड़क उठा. नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि कोर्ट में ऐसा हो तो हम यहां से चले जाएंगे. दरअसल सारा मामला कुछ ऐसा है कि वकील विकास सिंह के नक्शा दिए जाने पर आपत्ति जताते हुए मुस्लिम पक्षकार धवन ने बेंच से पूछा कि इसका क्या करना चाहिए. बेंच ने जवाब में कहा कि आप चाहें तो इसके टुकड़े कर सकते हैं. इसे चीफ जस्टिस की हामी मानते हुए धवन ने नक्शा फाड़ दिया, जिससे मामले ने तूल पकड़ लिया.

पूर्व CJI दीपक मिश्रा से हुई थी बहस
ये पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी दिल्ली-केन्द्र विवाद मामले में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के साथ कोर्ट रूम में हुई तकरार को लेकर धवन ने वकालत छोड़ने की घोषणा कर दी थी. 74 साल (तब) के धवन ने 11 दिसंबर 2017 को प्रधान न्यायाधीश को एक पत्र लिखकर सूचित किया था कि उन्होंने अदालत में वकालत नहीं करने का निर्णय किया है.

मुस्लिम संगठनों की पैरवी पर हाथ में लिया था केस
मुस्लिम संगठनों की कोशिश के बाद धवन ने हाईकोर्ट में राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर मुस्लिम संगठन की पैरवी से दोबारा शुरुआत की.

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इलाहाबाद से हुई पढ़ाई
धारदार तर्कों और हाजिरजवाबी की वजह से पहले भी चर्चा में रह चुके धवन का जन्म 4 अगस्त 1946 में अविभाजित भारत में हुआ. शुरुआती पढ़ाई इलाहाबाद से हुई. आगे की पढ़ाई के लिए वो नैनीताल और फिर कैंब्रिज विश्वविद्यालय और लंदन विश्वविद्यालय गए, जहां उच्चशिक्षा हासिल की.

बेहतरीन डिबेटर
वकालत में अपने पैनेपन के लिए ख्यात धवन कॉलेज के वक्त में खासे कलाप्रेमी रहे. वो नाटकों के काफी शौकीन थे और बताया जाता है कि कानून की पढ़ाई के दौरान धवन ने कई नाटक डायरेक्ट किए. शेक्सपियर उन्हें खासतौर पर प्रिय रहे. फॉरेन डिग्री हासिल करने के दौरान धवन अनेकों वाद-विवाद प्रतियोगिताओं के विजेता रहे. यहां तक कि कैंब्रिज में पढ़ाई के दौरान वे स्टूडेंट यूनियन के प्रेसिडेंट भी रहे और छात्र राजनीति में हाथ आजमाया.

कपिल सिब्बल के अंडर शुरू की प्रैक्टिस
साल 1992 में राजीव धवन ने जानेमाने वकील कपिल सिब्बल के अंडर में वकालत की प्रैक्टिस शुरू की. तुरंत ही उन्हें मंडल (1992) और बाबरी मस्जिद (1994) में पैनी दलीलों के लिए जाना जाने लगा. इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील के तौर पर जाने जाने लगे और फिर तो कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ते ही गए. राजीव धवन के पिता शांति स्वरूप धवन भी पेशे से वकील ही थे. बाद में जज बने शांति स्वरूप धवन ब्रिटेन में भारत के राजदूत, पश्चिम बंगाल के गवर्नर और लॉ कमीशन के सदस्य रह चुके हैं. इन्हीं की सोहबत और घर में वकालत और राजनैतिक माहौल की वजह से धवन की भी वकालत के पेशे में रुचि की शुरुआत हुई.

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ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट और इंटरनेशनल कमीशन ऑफ ज्यूरिस्ट के कमिश्नर राजीव धवन की अपनी एक वेबसाइट है, जिसमें उनकी लिखी किताबों का जिक्र मिलता है. वेबसाइट के अनुसार वह अब तक 25 से ज्यादा किताबें लिख चुके हैं, साथ ही टीवी प्रोग्राम में होस्ट भी रहते रहे हैं.
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First published: December 3, 2019, 2:58 PM IST
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