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ब्रिटेन में वायरस बेकाबू है, क्या इस बीच 26 जनवरी को मुनासिब होगा "नमस्ते लंदन"?

पहले कोरोना संक्रमित हो चुके ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन.

फ्रांस, स्विटज़रलैंड, तुर्की, एस्टोनिया, बेल्जियम और नीदरलैंड्स समेत भारत जैसे कई देशों ने ब्रिटेन की उड़ानों को (Flights to and from Britain Cancelled) रद्द किया. ब्रिटेन में कोरोना के नए खतरे के मद्देनज़र सवाल यह है कि 'नमस्ते जॉनसन' जैसी पहल खतरनाक साबित नहीं होगी?

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    जिस तरह 'नमस्ते ट्रंप' के बाद भारत में Covid-19 का प्रकोप बढ़ गया था, क्या उसी तरह 'नमस्ते जॉनसन' (Namaste Johnson) के आयोजन से भारत के सामने दूसरी बार वैसा ही संकट खड़ा हो सकता है? यह सवाल और इस पर चर्चा सोशल मीडिया में हो रही है क्योंकि एक महीने बाद 26 जनवरी 2021 को भारत के गणतंत्र दिवस (Republic Day of India) के मौके पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन (British PM Boris Johnson) को भारत ने मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया है. दूसरी तरफ, ब्रिटेन में कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन (New Variant of Corona Virus) के बाद अचानक संक्रमण बेतहाशा बढ़ने की खबरें हैं.

    पिछले दिनों ब्रिटेन में वायरस के नए घातक रूप के सामने आने की हलचलों के बाद कई देशों ने ब्रिटेन से आने-जाने वाली उड़ानें रद्द कीं, तो बीते सोमवार को भारत ने भी यह प्रतिबंध लगाया. भारत ने हालांकि यह प्रतिबंध फिलहाल 31 दिसंबर तक लगाया है, लेकिन सवाल यही है कि अगर प्रतिबंध को बढ़ाने की नौबत आई तो क्या जॉनसन भारत आा सकेंगे? और अगर आए तो क्या भारत में कोरोना संक्रमण केसों के बढ़ने की स्थितियां बनेंगी?

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    क्या है जॉनसन को न्योते का मतलब?
    बोरिस जॉनसन को सम्माननीय अतिथि के तौर पर भारत के न्योते के पीछे भारत की परंपरा है कि गणतंत्र दिवस के मौके पर किसी राष्ट्र के गणमान्य को बुलाया जाता है. लेकिन, इस बार जॉनसन को न्योता देने के पीछे एक आपसी ट्यूनिंग भी है. जॉनसन भारत आएंगे और उसके बाद भारत के प्रधानमंत्री को ब्रिटेन की तरफ से न्योता मिलेगा.

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    नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम के दौरान अहमदाबाद में भारी भीड़ जुटी थी.


    जॉनसन कह चुके हैं कि पृथ्वी की सुरक्षा के लिए साथ मिलकर लड़ने की बात हो या रोज़गार और विकास के मोर्चे पर बढ़ने की, भारत और यूनाइटेड किंगडम कंधे से कंधा मिलाकर चलने पर राज़ी हैं. ऐसी ही कुछ योजनाओं पर पिछले दिनों दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने चर्चा की थी. जिसके बाद जॉनसन की तरफ से भारत के न्योते को स्वीकारा गया.



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    क्या था 'नमस्ते ट्रंप' आयोजन?
    इसी साल फरवरी के महीने में गुजरात के अहमदाबाद में बने दुनिया के सबसे बड़े स्टेडियम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मेहमाननवाज़ी भारत ने की थी, जिसमें हज़ारों लोगों ने शिरकत की थी. गौरतलब है कि जनवरी के महीने में भारत में कोरोना का पहला केस आ चुका था और अमेरिका में भी संक्रमण फैल रहा था.

    विपक्ष ने आरोप लगाया था कि 'नमस्ते ट्रंप' आयोजन के कारण गुजरात में कोविड से कम से कम 800 मौतें हुईं. यह भी गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जनवरी में ही कोरोना को लेकर चेतावनी जारी कर दी थी, उसके बावजूद यह कार्यक्रम हुआ था. सितंबर में विदेश राज्य मंत्री की तरफ से यह भी कहा गया कि भारत पधारे ट्रंप और उनके परिजनों की कोरोना संबंधी कोई जांच नहीं हुई थी.

    राज्य सभा में सरकार ने यह भी बताया था कि 24-25 फरवरी के दौरान जब यह कार्यक्रम हुआ, तब अनिवार्य कोविड-19 टेस्टिंग को लेकर कोई गाइडलाइन नहीं थी. 4 मार्च से भारत के 21 हवाई अड्डों पर इस बारे में टेस्टिंग को अनिवार्य किया गया था. अब मौजूदा हालात पर नज़र डालिए.

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    क्या 'नमस्ते जॉनसन' से बढ़ेगा संक्रमण?
    हाल में, भारतीय विशेषज्ञों के एक पैनल ने अनुमान के हिसाब से कहा कि भारत में फरवरी तक कोरोना से निजात मिल जाएगी क्योंकि जनवरी से वैक्सीन कार्यक्रम शुरू हो सकता है. यह भी कहा गया कि भारत में कोरोना का एक और प्रकोप झेलने की नौबत नहीं आएगी क्योंकि हर्ड इम्यूनिटी डेवलप हो चुकी है.



    दूसरी तरफ, एक-डेढ़ हफ्ते पहले ही ब्रिटेन में वायरस का नया स्ट्रेन फैलने की खबरें सामने आई हैं, जिसके कारण संक्रमण तेज़ और ज़्यादा घातक हुए हैं. अभी इस बारे में भी रिसर्च चल रही है कि इस नए स्ट्रेन पर वैक्सीनों का असर किस तरह होगा. ऐसे में चर्चा यही है कि वैक्सीनेशन के जारी रहते ब्रिटेन में वायरस के नए वैरिएंट से भारत को खतरा हो सकता है, अगर जॉनसन भारत आते हैं.

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    हालांकि जॉनसन के यहां आने को लेकर भारत ने न तो फिलहाल कोई पुष्टि की है और न ही इस तरह की कोई बात कही है कि उनकी भारत यात्रा पर पुनर्विचार किया जा रहा है. अभी स्थिति पर नज़र रखी जा रही है और समय आने पर ही इस बारे में कोई फैसला लिया जाएगा.
    Published by:Bhavesh Saxena
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