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योग के मामले में क्यों अष्टांग योगी कहे जाते थे नेहरू

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: November 10, 2019, 10:11 AM IST
योग के मामले में क्यों अष्टांग योगी कहे जाते थे नेहरू
योग में सिद्धहस्त थे जवाहरलाल नेहरू

नेहरू का योग से रिश्ता उनके जवानी के दिनों से ही जुड़ गया था. वो योगासनों में सिद्धहस्त थे. उनके पिता मोतीलाल नेहरू की भी योग में रुचि थी. इसे हम पेश कर रहे हैं पीयूष बबेले की किताब "नेहरू मिथक और सत्य" के कुछ अंशों के जरिए

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‘‘मैं लंबे समय से योग पद्धति के फिजिकल कल्चर में रुचि रखता रहा हूं. कुछ हद तक योगाभ्यास भी करता रहा हूं. मुझे इससे बहुत फायदा हुआ है. मैं इस बात से सहमत हूं कि यह एक मूल्यवान पद्धति है. शुरुआती तौर पर यह शरीर के लिए है, लेकिन यह सिर्फ पहला चरण है. इसका दूसरा चरण मस्तिष्क की ट्रेनिंग का है. मैं समझता हूं कि तीसरा चरण चेतना या उसे आप जो भी कहें, वहां तक जाता है.’’
- जवाहरलाल नेहरू, 19 मई 1958

क्या नेहरू को योग के बारे में कुछ अता-पता था. या फिर आधुनिक विज्ञान और प्रगतिशीलता की राह पर बढ़ रहे नेहरू को इस तरफ देखने की फुर्सत नहीं मिली. ऐसे में ये बताना जरूरी है कि नेहरू अच्छी तरह समझते थे कि आने वाली दुनिया में योग की बड़ी कदर होगी. वो उन शुरुआती लोगों में भी थे, जिन्होंने इस विद्या की पैरोकारी की और इसे विज्ञान की कसौटी पर कसा. योग के मामले में वो अष्टांग योगी भी थे.

इसके संकेत उन तस्वीरों से मिलते हैं, जिनमें नेहरू शीर्षासन करते दिखते हैं. लेकिन इस तरह के आसन तो दूसरी फिजिकल ट्रेनिंग का हिस्सा भी हो सकते हैं. इसे अनिवार्य रूप से योग ही क्यों मानें. इसलिए न मानने वालों को यह बताना होगा कि नेहरू सिर्फ कर्मयोगी ही नहीं थे, अष्टांग योगी भी थे. यही नहीं उनके पिता मोतीलाल नेहरू की भी योग में रुचि थी.

नेहरू इस बात को अच्छी तरह समझते थे कि आने वाली दुनिया में योग की बड़ी कदर होगी. वही उन शुरुआती लोगों में से थे जिन्होंने इस बात की पैरोकारी की कि इस भारतीय विद्या को आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर खरा साबित कर इसे जनता के लिए बहुत उपयोगी बनाया जा सकता है.

नेहरू कठिन से कठिन योगाभ्यासों में प्रवीण थे. वो रोजाना शीर्षासन करते थे


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जवानी के दिनों से जुड़ा था योग से रिश्ता
नेहरू का योग से रिश्ता उनके जवानी के दिनों से ही जुड़ गया था. 28 मार्च 1958 को नेहरू ने बंबई में ईश्वरलाल चुन्नीलाल योगिक हेल्थ सेंटर में कहा:
‘‘30 साल पहले मैं पूना के पास लोनावला में इस सेंटर के मातृ संस्थान कैवल्य धाम योग सेंटर में अपने पिता के साथ आया था. इस सेंटर का मुआयना करते वक्त मुझे यह जानकर बहुत खुशी हुई कि यह संस्थान योग के क्षेत्र में वैज्ञानिक शोध कर रहा है. योग निश्चित तौर पर एक पद्धति पर आधारित तंत्र है. यह कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे जड़ता (डोग्मा) की तरह स्वीकार किया गया था. अगर हमें इसे समझना है तो हमें वैज्ञानिक पद्धति से इस तक पहुंचना होगा. मैं इस बात से सहमत हूं कि योग पद्धति तब तक तरक्की नहीं कर पाएगी, जब तक कि उसे आधुनिक विज्ञान की रोशनी में जांचा-परखा नहीं जाएगा.

नेहरू ने योगा फॉर द वेस्टर्न वर्ल्ड किताब के लेखक सर पॉल ड्यूक्स को लिखा, मैं कुछ हद तक योगाभ्यास भी करता रहा हूं. मुझे इससे बहुत फायदा हुआ है. मैं सहमत हूं कि यह एक मूल्यवान पद्धति है.


ऐसा था योग से नेहरू का रिश्ता 
नेहरू का योग से रिश्ता सिर्फ संस्थानों का फीता काटने तक सीमित नहीं था. उस जमाने में या ठीक-ठीक कहें तो 19 मई 1958 को नेहरू जी ने सर पॉल ड्यूक्स को पत्र लिखा. पॉल ने ‘योगा फॉर द वेस्टर्न वर्ल्ड’ नाम की किताब लिखी थी. वह एक ब्रिटिश लेखक, इंटेलिजेंस एजेंट और पश्चिमी देशों में योग पहुंचाने वाली शुरुआती व्यक्ति थे. उन्होंने ‘द योगा ऑफ हेल्थ यूथ एंड जॉय’ नाम की किताब भी लिखी है. उस जमाने में पश्चिमी जगत तक योग पहुंचाने वाले सबसे प्रतिष्ठित व्यक्ति ने अपनी किताब की एक प्रति नेहरू जी को भेजी.

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योग हमें कहां से कहां तक ले जाता है
इस किताब को मिलने के बाद नेहरू ने इसके लेखक को लिखा, मैं लंबे समय से योग पद्धति के फिजिकल कल्चर में रुचि रखता रहा हूं. कुछ हद तक मैं योगाभ्यास भी करता रहा हूं और मुझे इससे बहुत फायदा हुआ है. मैं इस बात से सहमत हूं कि यह एक मूल्यवान पद्धति है. शुरुआती तौर पर यह शरीर के लिए है, लेकिन यह सिर्फ पहला चरण है. इसका दूसरा चरण मस्तिष्क की ट्रेनिंग का है और मैं समझता हूं कि तीसरा चरण चेतना या उसे आप जो भी कहें, वहां तक जाता है.

उन्होंने आगे लिखा, मेरे हिसाब से योग ऐसी वैज्ञानिक ट्रेनिंग है. जो न सिर्फ एक स्वस्थ और प्रसन्न शरीर का निर्माण करती है. बल्कि एक ऐसा दिमाग भी विकसित करती है जो ठंडा और संतुलित होता है. जो विचारों के थपेड़ों से बहक नहीं जाता.मैं इस बात से बहुत खुश हूं कि आप योग का संदेश दूसरे देशों तक ले जा रहे हैं.’’

50 के दशक में नेहरू ने कई अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर योग की पैरवी की थी


3 अक्टूबर 1958 को कोलंबिया ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम (सीबीएस) के ब्रॉडकॉस्ट जर्नलिस्ट एडवर्ड आर मुरो ने विश्व नेताओं के साथ एक रिकॉर्डिंग की. इसमें फिल्म, रेडियो और टेलीफोन तीनों माध्यमों से रिकॉर्डिंग की गई. इस कार्यक्रम का प्रसारण 12 अक्टूबर 1958 को ‘स्माल वर्ल्ड’ नाम के प्रोग्राम में किया गया. इस बातचीत में नई दिल्ली से प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू शामिल हुए. अमेरिका के पोर्टलैंड मेने से थॉमस ई डेवे शामिल हुए. डेवे 1943 से 1955 तक अमेरिका के न्यूयॉर्क स्टेट के गवर्नर रहे. वह 1944 और 1948 में रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी भी थे.

इसमें नेहरू ने योग के फायदों की चर्चा तो की ही साथ ही इसके फायदों के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि योग विश्व शांति में मदद कर सकता है.

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First published: November 10, 2019, 10:11 AM IST
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