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इस आदमी के दिमाग को 2000 टुकड़ों में तोड़ दिया गया था, जानिए क्यों?

इस आदमी के दिमाग को 2000 टुकड़ों में तोड़ दिया गया था, जानिए क्यों?

एचएम ने अपनी ज्यादातर जिंदगी चीजों को भूलते हुए गुजार दी लेकिन हमें याद्दाश्त को समझाने में उनका बहुत महत्वपूर्ण योगदान है और उन्हें सदियों तक इसके लिए याद रखा जाएगा.

    1 सितंबर, 1953 को विलियम स्कोविल नाम के शख्स ने एक हाथ से घुमाकर फंसाने वाला खांचा और एक आरी ली और एक जवान आदमी के दिमाग को काट दिया. स्कोविल कोई वहशी क्रिमिनल नहीं था और न ही यह बात किसी पुलिस रिपोर्ट में लिखी गई. वह एक डॉक्टर का था और उसके इस कदम से पहली बार जिंदा आदमी के दिमाग को डॉक्टरों ने खोलकर देखा. इसके बाद उन्होंने एक मेटल ट्यूब से उस खून को निकाल लिया.

    डॉ स्कोविल अपने वक्त के सबसे प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन में से एक थे और जिस जवान इंसान का उन्होंने ऑपरेशन किया था, उसका नाम हेनरी मोलेसन था. जिसे आगे चलकर उसके शॉर्टनेम एचएम (HM) से जाना गया. जो मेडिकल जगत के सबसे फेमस रोगियों में से एक रहे हैं. आज हमें ज्यादातर बातें जो दिमाग के बारे में पता हैं वो एचएम की बीमारी की ही देन हैं.

    क्या थी हेनरी मोलेसन यानि एचएम की बीमारी?
    जब हेनरी बच्चे थे तभी उसने एक एक्सीडेंट में अपनी खोपड़ी की हड्डी तोड़ ली थी. और जल्द ही वो इससे बीमार पड़ गये. उन्हें दौरे पड़ने लगे, आंखों के सामने अंधेरा छा जाने लगा, साथ ही उनका दिमाग उनकी शारीरिक क्रियाओं को कर पाने के लायक भी नहीं रह गया.

    ऐसा लगातार कई सालों तक होने के बाद और उन्हें हाईस्कूल से निकाले जाने के बाद उस युवा लड़के को डॉ स्कोविल के पास ले जाया गया.

    खतरनाक सर्जन माने जाते थे स्कोविल
    स्कोविल अपने खतरनाक ऑपरेशनों के चलते फेमस थे. हालांकि इस वक्त तक दिमाग के इलाज के लिए उसके छोटे हिस्से को छेदकर इलाज किए जाने की तकनीक ही प्रचलित थी. इसके पीछे जानकारों का यह मानना था कि दिमाग के हर हिस्से का अलग-अलग काम होता है. इसके जरिए कई लोगों के दौरे पड़ने की बीमारी को सही कर चुके स्कोविल ने सोचा कि एचएम के साथ भी वह इसी विधि को अपनाएंगे और उन्होंने एचएम के दिमाग से हिप्पोकैंपस को निकालने का फैसला किया.

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    क्या होता है हिप्पोकैंपस का काम?
    हिप्पोकैंपस दिमाग के बीचोंबीच होता है और इसका प्रमुख काम इंसान की भावनाओं को नियंत्रित करना होता है. लेकिन तब तक जानकारों को इसके काम के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी और डॉ स्कोविल ने एचएम के दिमाग से हिप्पोकैंपस को निकाल दिया.

    क्या हुआ ऑपरेशन का नतीजा?
    पहली नज़र में लोगों को लगा कि एचएम का ऑपरेशन सफल रहा है क्योंकि इसके बाद एचएम को पड़ने वाले दौरे लगभग खत्म हो गए. साथ ही उसके व्यक्तित्व में भी कोई बदलाव नहीं आया. यहां तक कि उसकी आईक्यू में भी थोड़ी बढ़ोत्तरी हो गई थी. लेकिन बस एक समस्या थी, उनकी याद्दाश्त को नुकसान पहुंचा था. एचएम वो सबकुछ भूल गये थे, जो उसके साथ एक दशक पहले हुआ था. यहां तक कि वो नई बातें भी नहीं याद रख पा रहे थे. इतना भी नहीं कि कौन सा दिन है? कोई बात उन्होंने कब कही है? बल्कि एचएम एक दिन में कई बार खाना खा ले रहे थे.

    एचएम के दिमाग पर हुए रिसर्च ने बताया क्या होती है याद्दाश्त?
    जब स्कोविल ने एक दूसरे न्यूरो एक्सपर्ट वाइल्डर पेनफील्ड को यह बात बताई तो पेनफील्ड ने एक पीएचडी स्टूडेंट ब्रैंडा मिलनर को एचएम के घर उसके बारे में जानकारी जुटाने के लिए भेजा. जहां एचएम अपना वक्त साधारण चीजें करते हुए बिता रहा था. वे कई क्लासिक फिल्मों को बार-बार लेकिन पहली बार देख रहा था. पहली बार इसलिए क्योंकि किसी फिल्म को देखने के बाद वह उसे भूल जाता था.

    मिलनर ने कई सारे टेस्ट और इंटरव्यू किए. इन इंटरव्यूज से न केवल हमारे दिमाग और याद्दाश्त के बारे में कई बातें पता चलीं बल्कि इन टेस्ट ने डॉक्टरों को यह भी बताया कि याद्दाश्त का मतलब क्या होता है?

    स्टडी में सामने आया कि भले ही एचएम नई याद्दाश्त न बना पा रहे हैं लेकिन फिर भी कुछ बातें उन्हें याद रह जा रही थीं. जैसे बाथरुम जाना और कोई वाक्य पूरा करना. मिलनर ने एक बार उसे एक नंबर याद रखने को कहा, एचएम को वह नंबर 15 मिनट तक याद रहा. लेकिन इस दौरान वह इस नंबर को लगातार अपने दिमाग में दोहराते रहे. हालांकि टेस्ट के पांच मिनट के भीतर ही वह भूल चुके थे कि उनका ऐसा कोई टेस्ट भी हुआ है.

    प्रतीकात्मक तस्वीर


    तब तक याद्दाश्त के बारे में न्यूरोलॉजिस्ट यही मानते थे कि हर तरह की याद्दाश्त को पूरा दिमाग सेव करके रखता है. इसके बाद लोगों को समझ आया कि ऐसा नहीं है. मिलनर के रिजल्ट ने न केवल यह बताया कि शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग टर्म मेमोरी में फर्क होता है. बल्कि यह भी साबित हो गया अलग-अलग तरह की याद्दाश्त दिमाग के अलग-अलग हिस्सों में होती है.

    अब हमें पता चल चुका है कि जानकारी को याद्दाश्त बनाने के लिए दिमाग को बहुत सारे कदम उठाने पड़ते हैं.

    जिस हिप्पोकैंपस को डॉक्टरों ने निकाल दिया था, उसका रोल भी पता चला
    इन टेस्ट में सामने आया कि जब दिमाग के पास कोई जानकारी पहुंचती है तो न्यूरॉन उसे कोर्टेक्स तक ले जाते हैं. इसके बाद वह हिप्पोकैंपस में पहुंचता है. जहां स्पेशल प्रोटीन कोर्टिकल स्नैप्टिक कनेक्शन को मजबूत बनाने के लिए काम करते हैं. ऐसे में अगर जानकारी बहुत मजबूत होती है या हम उसके होने के कुछ दिन बाद तक उसे बार-बार दोहराते हैं तो हिप्पोकैंपस उस जानकारी को फिर से कोर्टेक्स में हमेशा के लिए स्टोर किए जाने को वापस भेज देता है.

    इसी वजह से एचएम का दिमाग शुरुआती जानकारी तो ले पा रहा था. लेकिन हिप्पोकैंपस वाले हिस्से की दिमाग में गैरमौजूदगी के चलते वह जानकारी मजबूत नहीं हो पा रही थी. ये जानकारियां वैसे ही मिट जा रही थीं, जैसे रेत पर लिखी जानकारियां लहर के साथ मिट जाती हैं. हालांकि मिलनर ने इसके अलावा भी याद्दाश्त के बारे में बहुत सी बातें पता की थीं.

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    बातें नहीं थीं याद लेकिन प्रक्रिया याद रह जा रही थी
    मिलनर ने पाया कि कुछ ही मिनटों में सारी बातें भूल जाने के बाद भी एचएम की किसी काम को करने की क्षमता में धीरे-धीरे सुधार आ रहा था. इससे पता चला कि भले ही उनका एक्टिव माइंड जानकारियों को भूल जा रहा हो लेकिन उसके इनएक्टिव माइंड के मोटर सेंटर उनमें से कुछ जानकारियों को खुद ब खुद याद रख ले रहे थे.

    इससे मिलनर ने जाना कि ऐसी जानकारियां जिनमें नाम या कोई जानकारी याद रखनी हो, उस याद्दाश्त से अलग होती है, जिसमें लोगों को किसी प्रक्रिया को याद रखना होता है. जैसे साइकिल चलाना या अपने सिग्नेचर करना. साथ ही हमें यह जानकारी भी हुई कि ऐसी प्रक्रिया वाली याद्दाश्त दिमाग के बेसल गैंग्लिया और सेरिबेलम के हिस्सों को ही काम में लेती है. और एचएम के दिमाग के ये दोनों ही हिस्से पूरी तरह से सही थे.

    हमें पता चला कि किसी बात को जानने/ याद रखने और किसी प्रक्रिया को दोहराने में फर्क होता है, उनकी इस खोज ने दिमाग के अध्ययन में महत्वपूर्ण रोल निभाया.

    एचएम का दिमाग है दुनिया का सबसे ज्यादा स्टडी हुआ दिमाग
    एचएम ने अपनी जिंदगी आराम से एक नर्सिंग होम में गुजारी और 82 साल की उम्र में साधारण तरीके से उनकी मौत हुई. इस दौरान सैकड़ों न्यूरोसाइंटिस्ट ने उसका परीक्षण किया. जिसके चलते एचएम के दिमाग को दुनिया का ऐसा दिमाग माना जाने लगा, जिसका सबसे ज्यादा परीक्षण हुआ. एचएम की मौत के बाद भी उनके दिमाग को बचाकर रख लिया गया और उसे स्कैन किया गया. इसके बाद इसे करीब 2000 छोटे-छोटे हिस्सों में काट दिया गया. और इनकी तस्वीर लेकर एक दिमाग का एक डिजिटल मैप तैयार किया गया. यह मैप इतना क्लियर था कि आप एक अकेले न्यूरॉन की गतिविधि भी इसमें देख सकते थे. एक ब्रॉडकास्ट में इस प्रक्रिया को करीब 4 लाख लोगों ने देखा.

    हालांकि एचएम ने अपनी ज्यादातर जिंदगी चीजों को भूलते हुए गुजार दी लेकिन हमें याद्दाश्त को समझाने में उनका बहुत महत्वपूर्ण योगदान है और उन्हें सदियों तक इसके लिए याद रखा जाएगा.

    टेड-एड के इस वीडियो के जरिए जानें एचएम की पूरी कहानी -



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    Tags: Brain hemorrhage, Brain power, Health Explainer, Health News

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