ANALYSIS: नीतीश कुमार क्यों बन रहे हैं 'खतरों के खिलाड़ी'?

आमतौर पर चुनावों (Election) के आसपास सरकार लोकप्रिय फैसले लेती है लेकिन बिहार (Bihar) में ऐसा नहीं हो रहा है. नीतीश सरकार (Nitish Government) के बैन वाले फैसलों को लोकप्रिय तो नहीं कहा जा सकता. आखिर नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ऐसा रिस्क क्यों उठा रहे हैं...

Vivek Anand | News18Hindi
Updated: September 6, 2019, 12:38 PM IST
ANALYSIS: नीतीश कुमार क्यों बन रहे हैं 'खतरों के खिलाड़ी'?
शराब के बाद अब बिहार में पान मसाला को भी बैन किया गया है
Vivek Anand | News18Hindi
Updated: September 6, 2019, 12:38 PM IST
बिहार (Bihar) में अगले साल विधानसभा (Assembly Election) के चुनाव होने वाले हैं. आमतौर पर चुनाव नजदीक आते ही सरकार जनता के बीच लोकप्रियता हासिल करने वाले कदम उठाने लगती है. चुनावी साल में सरकार को जनता के हितों की फिक्र ज्यादा होने लगती है. सरकार फौरी तौर पर लोगों को फायदा पहुंचाने वाले फैसले लेती है. लेकिन बिहार की नीतीश सरकार (Nitish Government) इसके उलट चल रही है. बिहार में चुनाव नजदीक है, लेकिन सरकार के तौर तरीकों को लोकप्रिय तो बिल्कुल नहीं कहा जा सकता.

बिहार में शराबबंदी के बाद पान मसाला को भी बैन कर दिया गया. कहा तो ये जा रहा था कि चुनाव नजदीक आने के बाद शायद नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का दिल पिघले और वो शराबबंदी के कड़े कानून में थोड़ा ढील बरतें. लेकिन नीतीश सरकार ने शराब के बाद अब पान मसाले को भी बैन कर दिया. बिहार जैसे राज्य में जहां सिगरेट से ज्यादा पान मसाला और गुटखा चबाया जाता हो, वहां नैतिकता का हवाला देकर इसकी तारीफ तो की जा सकती है, लेकिन इसे सरकार का लोकप्रिय कदम नहीं माना जा सकता.

नीतीश कुमार ने क्यों लिया ये रिस्क?

पहले ही शराबबंदी की आलोचना हो रही थी, अब पान मसाला बैन करके नीतीश सरकार ने नया रिस्क ले लिया है. क्या नीतीश सरकार ने शराबबंदी के बाद नया जोखिम नहीं ले लिया है? इस सवाल के जवाब में जेडीयू के प्रवक्ता अरविंद निषाद कहते हैं कि देखिए सरकार के इस कदम की आधी आबादी तारीफ कर रही है.

आधी आबादी यानी महिला. महिलाओं की वजह से ही नीतीश सरकार ने पहले शराबबंदी का फैसला लिया था. अब पान मसाला बैन को भी इसी नजरिए से लिया जा रहा है. हम जिसे सरकार का अलोकप्रिय कदम मान रहे हैं दरअसल वो महिलाओं के लिए लोकप्रिय कदम है. पान मसाला बैन करके नीतीश कुमार ने अपने महिला वोटर्स को फिर अपने करीब किया है.

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बिहार में पान मसाला को बैन किया गया है


बिहार में चबाने वाले तंबाकू और पान मसाले की वजह से सबसे ज्यादा मुंह का कैंसर फैल रहा है. 2002 के विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एक आंकड़े के मुताबिक पूरे देश में सबसे ज्यादा ओरल कैंसर के मामले बिहार में सामने आए थे. ओरल कैंसर के 90 फीसदी मामलों के पीछे खैनी, पान मसाला, गुटखा और सिगरेट था.
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बिहार में इसी साल जून और अगस्त महीने में सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने कई जिलों से पान मसाले के सैंपल लिए थे. जांच में पता चला कि पान मसाला के इन सभी सैंपलों में मैग्नेशियम कार्बोनेट मिला हुआ है. मैग्नेशियम कार्बोनेट सेहत के लिए काफी खतरनाक है. इसी नतीजे के बाद राज्य सरकार ने इन पान मसाला को बैन करने का फैसला लिया.

महिला वोटर्स को लुभाने के लिए उठाया कदम?

बिहार में पान मसाला बैन की सोशल मीडिया पर खूब आलोचना हुई. गोपालगंज में एक पान मसाला व्यवसायी के सुसाइड ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं. जेडीयू के ही एक विधायक अमरनाथ गमी ने सरकार के पान मसाला बैन की आलोचना कर दी. उन्होंने कहा कि पहले से ही बेरोजगारी ज्यादा है और सरकार अब रोजगार पर लात मार रही है. हालांकि मीडिया में उनकी थोड़ी बहुत चर्चा के अलावा ज्यादा कुछ नहीं हुआ.

जेडीयू प्रवक्ता अरविंद निषाद कहते हैं कि जनता के स्वास्थ्य के लिहाज से तो ये बड़ा कदम है ही. साथ ही इसकी वजह से भारत सरकार के स्वच्छता मिशन को भी बल मिला है.

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नीतीश कुमार ने महिला वोटर्स को ध्यान में रखते हुए हाल के वर्षों में कई फैसले लिए हैंबिहार


नीतीश सरकार ने जनता की सेहत, स्वच्छता और महिलाओं की तारीफ बटोरने के लिए बैन का कदम तो उठा लिया. लेकिन क्या ये कामयाब होगा? बिहार में शराब बैन के बाद गैरकानूनी तरीक से शराब की होम डिलिवरी होनी शुरू हो गई. ये सच्चाई किसी से छिपी नहीं है. शराबबंदी ने बिहार में गैरकानूनी तरीके से शराब बेचने का अच्छा खासा कारोबार खड़ा कर दिया है. पान मसाला का उसी तरह से एक अलग ब्लैक मार्केट खड़ा हो जाए तो हैरानी नहीं होगी.

नीतीश कुमार नैतिकता के मापदंड पर हमेशा खरा दिखना चाहते हैं. और ऐसा करते हुए भी वो एक खास वर्ग को लुभाने में कामयाब भी होते हैं. पान मसाला बैन को भी महिलाओं का समर्थन प्राप्त है. नीतीश कुमार ने महिला वोटर्स को ध्यान में रखते हुए कई कदम उठाए हैं.

सरकार ने पंचायतों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण दिया. स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए साइकिल पोशाक योजना चलाई. नाबालिग विवाह और दहेज के खिलाफ आंदोलन चलाए. महिलाओं को खुश रखने के लिए अपने चुनावी वायदे को पूरा किया और राजस्व का नुकसान सहते हुए शराब को बैन किया. अब पान मसाला बैन भी उसी दिशा में उठाया कदम है.

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First published: September 6, 2019, 11:47 AM IST
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