Explained: उत्तर कोरिया क्यों अमेरिका को अपना जानी दुश्मन मानता है?

उत्तर कोरियाई नेता किग जोंग उन एक बार फिर से खबरों में हैं- सांकेतिक फोटो (pixabay)

उत्तर कोरियाई नेता किग जोंग उन एक बार फिर से खबरों में हैं- सांकेतिक फोटो (pixabay)

उत्तर कोरिया का अमेरिका (North Korea and America) पर गुस्सा सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं, बल्कि आम उत्तर कोरियाई भी अमेरिकी लोगों को अपना दुश्मन मानता है. यही हाल अमेरिका का भी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 10, 2021, 11:50 AM IST
  • Share this:
उत्तर कोरियाई नेता किग जोंग उन एक बार फिर से खबरों में हैं. उन्होंने अमेरिका को अपना सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए एलान कर दिया कि सत्ता भले ही बदल जाए, अमेरिका का उनके लिए रवैया नहीं बदलेगा. और यही कारण देते हुए किम जोंग ने परमाणु हथियारों का विकास जारी रखने की बात की.

उत्तर कोरिया की अमेरिका के लिए तल्खी कोई नई बात नहीं. वहां देश के भीतर लोगों को अमेरिकी गाने या अमेरिकी उत्पाद इस्तेमाल करने तक की मनाही है.

ये भी पढ़ें: Explained: क्या होगा अगर डोनाल्ड ट्रंप पर महाभियोग साबित हो जाए? 

दोनों देशों की बीच दुश्मनी और खासकर उत्तर कोरिया का अमेरिका पर गुस्सा क्यों है, ये समझने के लिए थोड़ा सा इतिहास में झांकना होगा. दोनों देशों के बीच रंजिश की जड़ में कोरियाई युद्ध है. कोरियाई युद्ध(1950-53) की शुरुआत 25 जून, 1950 को उत्तरी कोरिया से दक्षिणी कोरिया पर आक्रमण के साथ हुई. चीन और रूस उत्तर कोरिया के सपोर्ट में थे. वहीं अमेरिका साउथ कोरिया का साथ दे रहा था.
north korea and america
किम जोंग ने परमाणु हथियारों का विकास जारी रखने की बात की- सांकेतिक फोटो (needpix)


हालात काबू में करने के लिए अमेरिका ने उत्तर कोरिया पर हवाई हमले शुरू कर दिये. अमरीकी बमवर्षक विमान बी-29 और बी-52 देश के हर हिस्से में मंडराने लगे. इससे गांव के गांव और शहर तबाह हो गए. लाखों उत्तर कोरियाई मारे गए. इस क्रूर हमले के बारे में खुद अमरीकी विदेश मंत्री डेयान रस्क ने कहा था- 'हम ने हर हिलती हुई चीज़ पर बमबारी की.

ये भी पढ़ें: तंजानिया की रहस्यमयी झील, जिसका पानी पत्थर में बदल देता है



तीन सालों तक उत्तर कोरिया पर नॉनस्टॉप हवाई हमले किए जाते रहे. इसके बाद कई देशों के दखल के बाद युद्दविराम का एलान हो गया. अपने लोगों के मारे जाने के कारण उत्तर कोरिया के मन में आज भी अमेरिका को लेकर गुस्सा है. इसके बाद ये देश खुद को परमाणु शक्ति संपन्न करने लगा. ये देखते हुए अमेरिका ने उसपर आर्थिक प्रतिबंध भी लगा दिए. इससे देश के व्यापार की क्षमता चीन और कुछ कम्युनिस्ट देशों तक ही सीमित रह गई. ये भी उत्तर कोरिया के अमेरिका पर गुस्से का एक कारण है.

ये भी पढ़ें: अमेरिकी आसमान में दिखा कयामत लाने वाला जहाज, 1 घंटे उड़ने की लागत करोड़ों में

ट्रंप के कार्यकाल के दौरान वे इस देश से संबंध सामान्य करना चाहते थे. इसके लिए दो बार शिखर वार्ता भी हुई, हालांकि उनका कोई नतीजा नहीं निकला. इस बीच बार-बार किम जोंग आरोप लगाते रहे हैं कि अमेरिका उससे जंग चाहता है. हालांकि अमेरिका ने अपनी ओर से कभी ऐसा एलान नहीं किया. अब ट्रंप के सत्ता छोड़ने और जो बाइडन के आने में 10 दिन बाकी हैं. इस बीच किम जोंग ने अमेरिका से अपनी नफरत का एक बार फिर एलान करते हुए परमाणु हथियारों का अपना जखीरा बढ़ाने की बात की.

north korea and america
ट्रंप के कार्यकाल के दौरान वे इस देश से संबंध सामान्य करना चाहते थे- सांकेतिक फोटो (pixabay)


अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच तनाव केवल राजनैतिक स्तर पर ही सीमित नहीं. आम लोगों तक इसका असर है. गैलप इंटरनेशनल ने अमेरिकी जनता को टटोला और पाया कि 87% लोग इस देश को पसंद नहीं करते हैं. वे मानते हैं कि वहां लोग पिछड़े हुए हैं और अमेरिका से बदला लेने के फेर में रहते हैं. वैसे मजे की बात है कि उत्तर कोरिया की सबसे कम रेटिंग के तुरंत बाद इरान का नबंर आता है. ये वही देश है, जिसे लेकर अमेरिकी राजनीति गरमाई रहती है.

उत्तर कोरियाई लोगों में अमेरिकी चीजों पर गुस्सा और बढ़कर है. वहां नीली जींस पहनने पर बैन है क्योंकि क्योंकि इससे किंग जोंग को अमेरिकन साम्राज्यवाद की बू आती है. देश मानता है कि किसी भी तरह से अमेरिकी सभ्यता या संस्कृति का असर यहां नहीं आना चाहिए. यही कारण है कि वहां अमेरिकी गाने या फिल्में भी तस्करी के जरिए ही मिल पाती हैं.

वैसे अमेरिका से उत्तर कोरिया की नफरत को अब हल्के में नहीं लिया जा सकता. दरअसल एक समय पर बंटवारा और नरसंहार झेल चुके इस देश ने सैन्य तौर पर खुद को काफी मजबूत बना लिया है. कम से कम दावों से तो ऐसा ही लगता है, साथ ही दक्षिण कोरियाई खुफिया एजेंसियां भी ऐसी खबरें देती हैं.

उत्तर कोरिया ने एक नई तरह की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) का परीक्षण किया सांकेतिक फोटो (pixabay)


उत्तर कोरिया ने एक नई तरह की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) का परीक्षण किया है जिसका नाम ह्वासोंग-15 है. देश के पास सभी तरह की परमाणु ताकत है, जो किसी भी विकसित देश के पास हो सकती है. ये परमाणु बम, हाइड्रोजन बम और यहां तक कि इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल तक का परीक्षण कर चुका है. उसके पास असीमित संख्या में रॉकेट लॉन्चर भी हैं.

ये भी पढ़ें: क्या तुर्की कोरोना वैक्सीन के बदले चीन से उइगर मुस्लिमों का सौदा कर लेगा? 

एक अनुमान के मुताबिक नॉर्थ कोरियाई सेना के पास ढाई से 5 हजार मेट्रिक टन तक जानलेवा नर्व एजेंट्स हैं, जिनका इस्तेमाल लाखों लोगों को एक बार में मौत दे सकता है. ऐसे में अगर अमेरिका या कोई भी देश ज्यादा आक्रामक हुआ तो दशकों से हार और आइसोलेशन देख रहे देश के तानाशाह को केमिकल हथियार का उपयोग करते देर नहीं लगेगी. खासकर उन हालातों में, जब वो जानता है कि उसके पास अमेरिका जितनी आधुनिक सेना नहीं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज