क्यों भारत को ताकतवर चीन की बजाए कमजोर इस्लामाबाद से है खतरा?

चीन के पास पाकिस्तान से ज्यादा परमाणु हथियार होने के बाद भी उससे भारत को कम खतरा है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)
चीन के पास पाकिस्तान से ज्यादा परमाणु हथियार होने के बाद भी उससे भारत को कम खतरा है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)

चीन (China) के पास पाकिस्तान (Pakistan) से ज्यादा परमाणु हथियार (nuclear weapons) होने के बाद भी उससे भारत को कम खतरा है. इसकी वजह चीन की नो फर्स्ट यूज पॉलिसी (no first use policy) है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 4, 2020, 11:27 AM IST
  • Share this:
तीसरे विश्व युद्ध के कयासों के बीच ये देखने की कोशिश की जा रही है कि किन देशों के बीच जंग से बड़ी लड़ाई शुरू हो सकती है. इसमें अमेरिका, ईरान, तुर्की जैसे देशों के बीच चीन, भारत और पाकिस्तान भी हैं. फिलहाल चीन और पाकिस्तान दोनों ही मिलकर किसी ने किसी तरीके से देश को घेरने की कोशिश में हैं. चीन पाकिस्तान से कई गुना ज्यादा ताकतवर है, इसके बावजूद एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत को चीन से ज्यादा पाकिस्तान से खतरा है.

किसके पास कितने परमाणु हथियार
सबसे पहले तो ये जानते हैं कि पाकिस्तान और चीन के पास भारत की तुलना में कितने कम या ज्यादा परमाणु हथियार हैं. फिलहाल दुनिया के कुल 9 देश हैं जो परमाणु हथियार से लैस हैं. इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, चीन, इजरायल, नॉर्थ कोरिया, भारत और पाकिस्तान हैं. परमाणु हथियारों के बारे में स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (Stockholm International Peace Research Institute) के मुताबिक देश अपने पुराने परमाणु हथियारों को डिसमेंटल कर अत्याधुनिक हथियार बनाने में जुटे हैं. इनमें चीन और पाकिस्तान काफी आगे हैं.

ये भी पढ़ें: उदार यूरोपीय देश France अब मुस्लिमों को लेकर कौन सी सख्ती करने जा रहा है? 
चीन के पास फिलहाल 290 हथियार हैं, वहीं पाकिस्तान के पास 160 के आसपास हथियार हैं. इनकी तुलना में भारत के पास अपेक्षाकृत कम लगभग 130 से 140 परमाणु हथियार हैं.



पाकिस्तान के पास कोई फर्स्ट यूज न्यूक्लियर पॉलिसी नहीं है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


नो फर्स्ट यूज पॉलिसी 
चीन की तुलना में कम परमाणु हथियार होने और सैन्य ताकत भी कम होने के बाद भारत को पाकिस्तान से ज्यादा खतरा बताया जा रहा है. इसकी वजह ये है कि पाकिस्तान के पास कोई फर्स्ट यूज न्यूक्लियर पॉलिसी नहीं है. यानी इस्लामाबाद ऐसे किसी समझौते का हिस्सा नहीं है, जिससे ये पक्का हो सके कि वो परमाणु हथियारों का पहले इस्तेमाल नहीं करेगा. इससे ये समझ में आता है कि अगर किसी देश के साथ पाकिस्तान की लड़ाई शुरू हो जाए और पाक ज्यादा आक्रामक हो जाए तो वो परमाणु हथियारों के उपयोग से परहेज नहीं करेगा.

ये भी पढ़ें: US Election: क्या होगा अगर जीत के बाद राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार की मौत हो जाए?

खतरनाक दिख रहे हैं इरादे
यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान लंबी दूरी के परमाणु हथियार बनाने की बजाए नॉन स्ट्रेटेजिक न्यूक्लियर वेपन बनाने पर ध्यान दे रहा है. ये इस तरह से डिजाइन होते हैं कि दुश्मन देश की सेना को जंग के मैदान में टारगेट करें. साथ ही साथ ये सेना के हथियारों के जखीरे को भी नुसान पहुंचाने के लिए बनाया जाता है. पाकिस्तान बहुत तेजी से ऐसे हथियारों का भंडार जमा कर रहा है. खुद फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट ने इसपर मुहर लगाते हुए बताया है कि इस्लामाबाद सबसे तेजी से इस तरह के परमाणु हथियार बना रहा है.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान


हथियारों के अलावा यूरेनियम का भंडार है पाक के पास
लगभग 160 के आसपास परमाणु हथियारों के अलावा पाकिस्तान के पास यूरेनियम की भी अच्छी-खासी मात्रा है. बता दें कि यूरेनियम से ही पमाणु हथियार बनाए जाते हैं. इसके अलावा पाकिस्तान में लगभग 280 किलोग्राम प्लूटोनियम है, जो इसी काम आता है. न्यूक्यिलर थ्रेट इनिशिएटिव (NTI) ने पाकिस्तान के इस भंडार पर चिंता जताते हुए कहा है कि भारत को इससे सबसे ज्यादा खतरा है क्योंकि पाकिस्तान का मुख्य टारगेट हमेशा से भारत रहा है.

दे रहा अनाप-शनाप बयान
खुद पाकिस्तान जब-तब भारत के लिए अपने इरादे जाहिर करता आया है. यूरेशियन टाइम्स ने पाकिस्तान के स्ट्रेटजिक प्लान्स डिवीजन फोर्स (Strategic Plans Division Force) का हवाला देते हुए बताया कि कैसे इस फोर्स ने भारत को धमकाते हुए कहा था कि हमारा इरादा देश की परमाणु क्षमता को वहां तक पहुंचाना है, जिससे भारत का एक-एक नागरिक पाकिस्तान के निशाने पर आ जाए.

पाकिस्तान जब-तब भारत के लिए अपने इरादे जाहिर करता आया है


क्यों चीन करेगा परहेज
दूसरी ओर चीन की सैन्य ताकत पाकिस्तान से कई गुना ज्यादा होने के बाद भी वो भारत के लिए परमाणु हथियारों से युद्ध का खतरा नहीं ले सकता. इसकी सबसे बड़ूी वजह चीन का नो फर्स्ट यूज पॉलिसी No first use (NFU) से जुड़ा होना है. चीन ने साल 1964 में इसका एलान किया. इसके मुताबिक वो किसी से देश से भिड़ंत की स्थिति में परमाणु हमले की शुरुआत नहीं करेगा.

कूटनीति और व्यापार भी हैं वजहें
चीन के भारत पर एक हद से ज्यादा आक्रामक न हो पाने की एक वजह कूटनीतिक स्तरों पर भारत का ज्यादा मजबूत होना भी है. फिलहाल जैसे हालात हैं, भारत को अमेरिका समेत लगभग सभी मजबूत यूरोपियन देशों का साथ मिला हुआ है. ऐसे में चीन की कोई भी पहल उसपर भारी पड़ सकती है. चीन के झड़प के बाद भी बड़ा कदम न उठा पाने के पीछे भारत के साथ उसके व्यापारिक संबंध भी रहे हैं. अब इन्हें पूरी तरह से खत्म करने की कीमत पर ही वो ऐसा कदम ले सकता है. दूसरी ओर भारत और पाकिस्तान के व्यापारिक संबंध लगभग नहीं के बराबर हैं. यही कारण है कि पाकिस्तान चीन की तुलना में भारत को लेकर ज्यादा आक्रामक तेवर दिखा सकता है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज