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संविधान के इन अनुच्छेदों का हवाला देकर क्यों हो रहा है नागरिकता बिल का विरोध

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Updated: December 10, 2019, 9:54 AM IST
संविधान के इन अनुच्छेदों का हवाला देकर क्यों हो रहा है नागरिकता बिल का विरोध
विपक्षी पार्टियां नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध कर रही हैं

विपक्षी पार्टियों का कहना है कि नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill 2019) से संविधान के अनुच्छेद 5, 10, 14 और 15 का उल्लंघन होता है. सवाल है कि आखिर इन अनुच्छेदों में ऐसा क्या है..

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  • Last Updated: December 10, 2019, 9:54 AM IST
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नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill 2019) सोमवार को लोकसभा (Lok Sabha) से पास हो चुका है. देर रात इस विधेयक पर हुई वोटिंग में संशोधन विधेयक के समर्थन में 311 और विपक्ष में 80 वोट पड़े. लोकसभा में विधेयक के पास होने के बाद अब कहा जा रहा है सरकार इसे राज्यसभा में पेश करेगी.

विपक्षी पार्टियां नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध कर रही हैं. उनका कहना है कि नागरिकता संशोधन विधेयक संविधान के कई अनुच्छेदों का उल्लंघन करती हैं. विपक्षी पार्टियों का कहना है कि इस विधेयक से संविधान के अनुच्छेद 5, 10, 14 और 15 का उल्लंघन होता है. सवाल है कि आखिर इन अनुच्छेदों में ऐसा क्या है, जिसके आधार पर कहा जा रहा है नया नागरिकता बिल इसका उल्लंघन कर रहे हैं.

किस आधार पर हो रहा है नागरिकता बिल का विरोध
संविधान का अनुच्छेद 5 भारतीय नागरिक की पहचान करता है. अनुच्छेद 5 के मुताबिक संविधान लागू होते वक्त उसे ही भारतीय नागरिक माना गया- जिसका जन्म भारत में हुआ हो या जिसके माता पिता में से कोई एक भारत में जन्मा हो या फिर अगर कोई व्यक्ति भारतीय संविधान लागू होने से कम से कम 5 साल पहले से भारत में रह रहा हो. संविधान लागू होते वक्त इसी आधार पर भारतीय नागरिक की पहचान की गई.

संविधान के अनुच्छेद 10 में नागरिकता के अधिकार के बने रहने का प्रावधान है. इसके मुताबिक अगर कोई व्यक्ति एक बार भारतीय नागरिक बन जाता है तो फिर उसकी नागरिकता बनी रहती है. नए नागरिकता बिल में भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसमें नागरिकता खत्म करने की बात की गई हो. जो भारतीय नागरिक हैं उनकी नागरिकता बहाल रहेगी.

why opposition parties opposing citizenship amendment bill based on violation of articles of the constitution
असम में नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध


संविधान के अनुच्छेद 14 का हवाला देकर विपक्ष का विरोधसंविधान का अनुच्छेद 14 बताता है कि कानून के सामने सब बराबर हैं. अनुच्छेद 14 कहता है कि राज्य के कानून के सामने सभी नागरिक बराबर होंगे. धर्म, नस्ल,जाति, लिंग या जन्म के स्थान के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता. राज्य, कानून के सामने सभी नागरिकों को बराबर मानने को बाध्य होगा. राज्य कानून के संरक्षण से किसी नागरिक को बाहर नहीं कर सकता.

इसी अनुच्छेद का हवाला देकर सबसे ज्यादा विरोध हो रहा है. हालांकि लोकसभा को संबोधित करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक से संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं होता है. नए बिल में धार्मिक आधार पर प्रताड़ना के शिकार पड़ोसी देशों में बसे अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का प्रावधान है. उन्होंने कहा, 'मैं सदन के माध्यम से पूरे देश को आश्वस्त करना चाहता हूं कि यह विधेयक कहीं से भी असंवैधानिक नहीं है. विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं करता है. अगर इस देश का विभाजन धर्म के आधार पर नहीं होता तो मुझे विधेयक लाने की जरूरत ही नहीं पड़ती.'

किस आधार पर दी जा सकती है कोर्ट में चुनौती
इसी तरह से संविधान का अनुच्छेद 15 भी राज्य को अपने नागरिकों के साथ भेदभाव करने से रोकता है. अनुच्छेद 15 के मुताबिक राज्य किसी नागरिक को धर्म, मूलवंश, जाति लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा. संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का हवाला देकर नए नागरिकता बिल का ज्यादा विरोध हो रहा है. संविधान के जानकार बताते हैं कि अनुच्छेद 14 और 15 के उल्लंघन के आधार पर नागरिकता बिल को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है.

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CAB के खिलाफ आंदोलन करती महिला (PTI Photo )


संविधान के अनुच्छेद 11 में नागरिकता तय करने और उसे खत्म करने का अधिकार है. इस अनुच्छेद के मुताबिक ये तय होता है कि किसी नागरिकता मिलेगी, कब मिलेगी, किसे नागरिकता के लिए अयोग्य ठहराया जा सकता है. साथ ही कोई बाहरी व्यक्ति किन परिस्थितियों में भारतीय नागरिक बन सकता है. इन सारे सवालों पर कानून बनाने का अधिकार संसद को दिया गया है.

संविधान का अनुच्छेद 13 में नागरिकों के मौलिक अधिकारों का जिक्र है. संविधान का अनुच्छेद 13 कहता है कि ऐसा कोई भी कानून नहीं बनाया जा सकता है जो नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता हो.

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First published: December 10, 2019, 9:54 AM IST
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