क्यों अजरबैजान के लिए जानी दुश्मन पाकिस्तान और इजरायल साथ खड़े हैं?

इजरायल और पाकिस्तान के राष्ट्रीय ध्वज- सांकेतिक फोटो (Pixabay)
इजरायल और पाकिस्तान के राष्ट्रीय ध्वज- सांकेतिक फोटो (Pixabay)

आर्मेनिया और अजरबैजान की लड़ाई (Armenia and Azerbaijan tension) ने बड़े दिलचस्प समीकरण बना दिए हैं. इसमें अजरबैजान की मदद के लिए इजरायल (Israel) दुश्मनी भुलाकर पाकिस्तान और तुर्की के साथ खड़ा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 1, 2020, 3:05 PM IST
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पहले सोवियत संघ (Soviet Union) का हिस्सा रह चुके आर्मेनिया और अजरबैजान में जंग (Armenia and Azerbaijan conflict) जारी है. नागोर्नो-काराबाख इलाके पर कब्जे को लेकर दोनों देश एक-दूसरे के टैंक तबाह कर रहे हैं. हालांकि चिंता की बात ये है कि अब इनकी लड़ाई में बड़े देश भी लामबंद हो रहे हैं. लड़ाई में देशों के समीकरण उलट-पुलट हो रहे हैं. जैसे एक-दूसरे के जानी दुश्मन माने जाने वाले इजरायल और पाकिस्तान अजरबैजान के पाले में आ गए हैं, जबकि रूस और भारत आर्मेनियाके साथ दिख रहे हैं. जानिए क्यों अजरबैजान के कारण दो जानी दुश्मन एक साथ आ गए.

यहां से शुरू हुआ लड़ाई का इतिहास
आर्मेनिया और अजरबैजान के मामले पर नजर डालें तो पाएंगे कि ये देश कभी सोवियत संघ का हिस्सा थे. नब्बे के दशक में सोवियत संघ के टूटने के बीच ये देश आजाद हो गए. तब सोवियत ने ही बंटवारा करते हुए नागोर्नो-काराबाख इलाका अजरबैजान को दे दिया. ये बात और है कि खुद नागोर्नो-काराबाख की संसद ने आधिकारिक तौर पर अपने को आर्मेनिया का हिस्सा बनाने के लिए वोट किया था.

आर्मेनिया और अजरबैजान में अस्सी के मध्य से लगातार लड़ाई चल रही है- सांकेतिक फोटो

काराबाख क्यों जाना चाहता है अलग


आर्मेनिया के लिए इस क्षेत्र की दिलचस्पी इसलिए है क्योंकि नागोर्नो-काराबाख क्षेत्र की ज्यादातर आबादी आर्मीनियाई मूल की ही है. यही वजह है कि इस क्षेत्र के लोगों ने लगातार खुद को आर्मेनिया से मिलाने की बात की. हालांकि उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई. इसके बाद से काराबाख इलाके के लोगों ने अजरबैजान के खिलाफ आंतरिक लड़ाई शुरू कर दी.

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गुस्साए हुए अजरबैजान ने काराबाख के लोगों पर कत्लेआम मचा दिया. इधर आर्मेनिया अंदर ही अंदर अपने लोगों यानी काराबाख लोगों की मदद कर रहा था. ये एक तरह से भारत-पाक विभाजन के बाद की स्थिति थी, जो लगभग दशकभर चली. इसके बाद फ्रांस, रूस और अमेरिका जैसे देशों की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच लंबी बातचीत चली और कई समझौते भी हुए लेकिन तब भी छुटपुट संघर्ष चलता रहा.

तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्गोआन. सांकेतिक फोटो


अब ये संघर्ष एकदम से बढ़ गया है. किसी भी देश को ये नहीं पता कि ताजा मामले में लड़ाई की शुरुआत किसने की, वहीं दोनों देश एक-दूसरे पर अपने लोगों और सैन्य हथियार तबाह करने का आरोप लगा रहे हैं. इन दूर-दराज बसे देशों की लड़ाई में पूरी दुनिया के देश सक्रिय हो गए हैं.

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लड़ाई में कौन किसने पाले में है, ये देखना दिलचस्प है
अजरबैजान में तुर्की लोगों की आबादी ज्यादा है इसलिए तुर्की के राष्ट्रपति की सहज ही दिलचस्पी अजरबैजान का साथ देने की है. वो लगातार इसे अपना दोस्त देश बताते हुए आर्मेनिया के खिलाफ बोल रहा है. दूसरी ओर आर्मेनिया पूर्व सोवियत संघ का हिस्सा है और रूस से उसके बढ़िया संबंध हैं. यहां तक कि रूस ने दोस्ती के प्रतीक के तौर पर आर्मेनिया में अपना मिलिट्री बेस बना रखा है. कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन के सदस्य होने के कारण दोनों ही देश एक-दूसरे का बचाव करने को तैयार रहते हैं. यही वजह है कि रूस आर्मेनिया के साथ है.

अजरबैजान ने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के रुख का खुलकर समर्थन किया था


दुश्मन देश हुए साथ
लड़ाई ने दो दुश्मन देशों इजरायल और पाकिस्तान को भी साथ खड़ा दिया है. ये दोनों ही अजरबैजान के साथ हैं. इसमें पाकिस्तान का पक्ष तो साफ दिखता है कि वो लड़ाई में तुर्की के साथ खड़ा दिखना चाहता है. अब चूंकि तुर्की अजरबैजान के साथ है, लिहाजा पाकिस्तान भी उसके साथ है. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में अज्ञात स्त्रोतों के हवाले से कहा गया कि पाकिस्तान से आतंकी हथियारों समेत अजरबैजान पहुंच रहे हैं ताकि आर्मेनिया के खिलाफ हल्ला बोल सकें. यहां तक कि पाकिस्तानी मीडिया और सोशल मीडिया पर भी अजरबैजान के पक्ष में पोस्ट लिखे जा रहे हैं.

पाकिस्तान को क्या है मतलब
इससे साफ दिखता है कि पाकिस्तान अपने नए आका तुर्की को खुश करने के लिए अजरबैजान का दोस्त बन गया है. बता दें कि आर्मेनिया में जहां 94 फीसदी आबादी ईसाई है, वहीं अजरबैजान में 97 फीसदी आबादी मुस्लिम है. ये भी पाकिस्तान के सपोर्ट की एक वजह हो सकती है.

अजरबैजान की मदद के लिए इजरायल दुश्मनी भुलाकर पाकिस्तान और तुर्की के साथ खड़ा है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


अजरबैजान ने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के रुख का खुलकर समर्थन किया था. पाक के लिए ये सारी वजहें किसी देश का साथ देने के लिए काफी लगती हैं. यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट ने पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के हवाल से बताया है कि पाकिस्तान अपने भाई जैसे देश अजरबैजान के साथ खड़ा है.

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इजरायल क्यों दे रहा साथ
तुर्की और पाकिस्तान के अलावा इजरायल भी अजरबैजान के साथ आ चुका है. बता दें कि इजरायल के तुर्की और पाकिस्तान दोनों ही देशों के बेहद तनावपूर्ण रिश्ते रहे हैं. यहां तक कि इजरायल और पाकिस्तान तो एक-दूसरे के नागरिकों तक को मान्यता नहीं देते. इसी तरह से तुर्की भी पूरी तरह से एंटी-इजरायल है. वो इस एकमात्र यहूदी देश को खत्म करने की फिराक में रहता है. ऐसे में इजरायल का अपने दुश्मनों के साख खड़ा होना चौंकाता है.

हालांकि इसकी वजह अजरबैजान और इजरायल के पुराने रिश्ते हैं. अजरबैजान में सोवियत संघ के बाद से मची उथल-पुथल के बीच इजरायल हमेशा उसके साथ रहा और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक से लेकर व्यापारिक संबंध भी रहे. कुल मिलाकर अजरबैजान ऐसा अकेला मुस्लिम-बहुल देश है जिससे इजरायल की दोस्ती रही. यही वजह है कि वो अब भी उसके साथ है.
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