32 सालों में पहली बार पाकिस्तान ने डरकर लगा दिए आतंकी शिविरों पर ताले!

भारत ने अमेरिका के साथ मिलकर उसे चारों ओर से फंसा दिया है. जिस एफएटीएफ लिस्ट में उसे डाला गया है, उसमें रहने तक उसके आर्थिक मदद के सारे दरवाजे बंद हो जाएंगे.

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: May 22, 2019, 1:30 PM IST
Sanjay Srivastava
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: May 22, 2019, 1:30 PM IST
क्या पाकिस्तान डर गया है? क्या वो भारत सरकार के बिछाए राजनयिक जाल में बुरी तरह फंस चुका है. जो भी हो लेकिन पाकिस्तान को पहली बार वाकई पसीना आ रहा है. उसकी विदेशी मुद्रा का खजाना भी खाली हो चुका है. उसे उस लिस्ट में डाल दिया गया है, जिसमें उन देशों को डाला जाता है, जो आतंकवादियों की मदद करते पाए जाते हैं. इन देशों को कोई देश किसी तरह की मदद नहीं करता.

यही वजह है कि एक दो दिन पहले पाकिस्तान ने 32 सालों में पहली बार आतंकी शिविरों पर ताला लगा दिया है. कश्मीर के जाने-माने अखबार कश्मीर रीडर ने 20 मई को खबर प्रकाशित कर बताया कि पाकिस्तान ने उन सभी आतंकवादी संगठनों के शिविरों पर ताला लगा दिया है, जो उसके इशारों पर कश्मीर में गड़बड़ी फैलाते थे.



खबर के अनुसार पाकिस्तान ने यूनाइटेड जिहादी काउंसिल से जुड़े 12 संगठनों के ऑफिसों को सीलबंद कर दिया. इन आतंकी संगठनों को चलाने के लिए पाकिस्तान उन्हें जो आर्थिक मदद देता था या जो आर्थिक मदद उन्हें बाहर से मिलती थी, उस पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी गई है.

इन दो बातों ने किए पाकिस्तान के होश गुल

दरअसल पिछले दिनों दो बातें हुई हैं, जिसने पाकिस्तान के होश गुल किए हैं. पहला पुलवामा के हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के बालाकोट में आतंकी शिविरों को निशाना बनाते हुए एयर स्ट्राइक की. भारत के इस कदम ने पाकिस्तान के आत्मविश्वास को हिलाकर रख दिया. उसे समझ में आ गया कि अब भारत में वो अपनी जमीन से प्रायोजित आतंकवाद नहीं चला सकता.

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दूसरा काम ये हुआ कि संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के नहीं चाहने के बाद भी चीन को मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकवादी घोषित करने का समर्थन करना पड़ा. इन दोनों बातों से अगर पाकिस्तान ने पहली बार दबाव महसूस करना शुरू किया तो आर्थिक कंगाली ने नसें और ढीली कर दीं. उसने जब पिछले दिनों आर्थिक मदद के लिए सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और चीन के आगे हाथ फैलाए तो निराशा हाथ लगी थी.
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पाकिस्तान के आतंकी संगठनों के ऑफिसों पर लगे ताले


गले की फांस बनी एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट
आईएमएफ उसे कर्ज दे जरूर रहा है, लेकिन कड़ी शर्तों के साथ. इसमें अड़चन बनी हुई है एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट, जिसमें पाकिस्तान का नाम पिछले दिनों शुमार कर लिया गया. इस लिस्ट में उन देशों को शामिल किया जाता है, जिनके खिलाफ आतंकवादियों को सहयोग और आर्थिक मदद के आरोप के साथ साक्ष्य भी होते हैं.

इसलिए हुए पाकिस्तान के होश फाख्ता
जैसे ही पाकिस्तान का नाम एफएटीएफ की लिस्ट में आया, उसके होश फाख्ता हो गए. क्योंकि जब तक उसका नाम इस लिस्ट में रहेगा, तब तक कोई देश उसकी आर्थिक मदद के लिए आगे नहीं आने वाला. लिहाजा पाकिस्तान इस समय चारों ओर हाथ-पैर फेंक रहा है कि किसी तरह उसे इस सूची से बाहर किया जाए. पाकिस्तान में 32 सालों से चल रहे आतंकी कैंपों को बंद करने का कदम इसी दिशा में उठाया गया है.

पाकिस्तान ने ना केवल आतंकी शिविरों को बंद किया है बल्कि आर्थिक मदद भी बंद कर दी है


पहली बार इतने खराब आर्थिक हालात
ये जानना भी जरूरी है कि पाकिस्तान आजादी के बाद पहली बार बहुत खराब आर्थिक हालात से गुजर रहा है. ऐसे हालात, जो किसी भी देश को दीवालियापन की ओर ले जाते हैं. पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार पूरी तरह खाली है. बाहर से उसके लिए कुछ भी मंगाना मुश्किल हो चला है. तेल तक मंगाने के लाले हैं. एक डॉलर की कीमत 152 पाकिस्तानी रुपये के बराबर हो चुकी है. उसे पेट्रोल में राशनिंग जैसे हालात से गुजरना पड़ रहा है.

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ये हालात तब तक ज्यादा रहेंगे जब तक कि वो एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बाहर नहीं निकल पाता. अब आइए समझते हैं कि एफएटीएफ क्या है और इसकी लिस्ट में आने का मतलब क्या है.

पाकिस्तान इस समय कई तरफ से सांसत में फंसा हुआ है


क्या है एफएटीएफ
एफएटीएफ का फुल फॉर्म है-फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स. ये एक ग्लोबल वॉच डॉग है जो मनी लांड्रिंग और आतंकियों को आर्थिक मदद की निगरानी करती है. पाकिस्तान का नाम इसी संस्था की ग्रे लिस्ट में डाला गया है. इस लिस्ट में आने के बाद पाकिस्तान के सामने 'इधर कुआं तो उधर खाई' वाली स्थिति है. उसे ग्रे लिस्ट से तो निकलना ही है साथ में ब्लैक लिस्ट में जाने से बचना है.

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16 से 21 जून तक फ्लोरिडा के ओरलैंडो में एफएटीएफ के वर्किंग ग्रुप की मीटिंग हो रही है. पाकिस्तान 15-16 देशों के पास जाकर दो महीने से उन्हें मना रहा है कि लिस्ट से बाहर निकालने में मदद करें. लिस्ट से बाहर निकलने के लिए कम से कम 15-16 देशों का वोट जरूरी है. हालांकि इस संस्था के देशों पर अमेरिका-भारत का असर ज्यादा है.

एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल दिया है, जब तक पाकिस्तान इस लिस्ट में रहेगा, उसके लिए आर्थिक मदद हासिल करना मुश्किल हो जाएगा


दोस्तों ने भी नहीं दिया साथ
मौजूदा तौर पर एफएटीएफ के सदस्य 36 देश और दो क्षेत्रीय संगठन हैं, जिन्हें वोटिंग पावर हासिल है. ये सारे ही देश और संगठन दुनिया भर के प्रमुख वित्तीय केंद्रों पर अपनी पकड़ रखते हैं. हालत ये थी कि जब पाकिस्तान के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया तो उसके पक्ष में तीन वोट भी नहीं पड़े, जो उसे ग्रे लिस्ट में जाने से बचा लेते.

उसके दोस्तों ने इसलिए उसका साथ नहीं दिया क्योंकि उनकी अपनी प्राथमिकताएं थीं. चीन को अगले साल इस संस्था की अध्यक्षता हासिल है तो सऊदी अरब को पूर्ण सदस्य बनना है. लेकिन अब भी अगर पाकिस्तान के फेवर में कम से कम तीन वोट नहीं आएंगे तो उसका ब्लैक लिस्ट में जाना पक्का है. तब उसकी हालत और दयनीय होगी. गौरतलब कि पाकिस्तान के आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका, ब्रिटेन, भारत और यूरोप ने अभियान छेड़ा हुआ है.

इसलिए पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ कदम उठाने का नाटक करना पड़ रहा है. आगे भी पाकिस्तान के साथ हालात ऐसे ही रहने वाले हैं. दरअसल भारत की कूटनीति और अमेरिका के साथ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसका गठजोड़ अब पाकिस्तान को भारी पड़ने लगा है.

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