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क्यों पंजाब और हरियाणा के बीच चंडीगढ़ को लेकर फिर है विवाद?

चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर लगे बोर्ड की यह तस्वीर विकिकॉमन्स से साभार.
चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर लगे बोर्ड की यह तस्वीर विकिकॉमन्स से साभार.

यूनेस्को की विश्व धरोहर (UNESCO World Heritage) सूची में शामिल चंडीगढ़ का केपिटल कॉम्प्लेक्स अपनी अनूठी पहचान के लिए ख्यात है. लेकिन पिछले दिनों हरियाणा के स्थापना दिवस (Haryana Foundation Day) के बाद से फिर चर्चा है कि इस शहर का प्रशासनिक ढांचा इतना पेचीदा क्यों है?

  • News18India
  • Last Updated: November 25, 2020, 7:42 AM IST
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चंडीगढ़, एक ऐसा शहर जो पंजाब की राजधानी (Capital city of Punjab) है और हरियाणा (Haryana Capital) की भी और साथ ही केंद्रशासित प्रदेश (Union Territory) भी है. कल्पना कीजिए कि प्रशासनिक ढांचे में कितनी पेचीदा स्थितियां और उलझनें बन जाती होंगी. बहरहाल, अचानक चंडीगढ़ की बात नहीं छिड़ गई है, बल्कि राजधानी के तौर पर इससे छुटकारा पाने को लेकर जो बहस चल रही है, उसके बीच आपको जानना चाहिए कि अगर यह तय करना ही पड़ जाए कि चंडीगढ़ (Chandigarh Issue) को किसी एक राज्य की राजधानी रखा जाए, तो किस राज्य का दावा किस तरह का है.

वास्तव में, 1966 में पंजाब से अलग होकर 1 नवंबर को हरियाणा अलग राज्य बना था. इस साल स्थापना दिवस के मौके पर हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने यह विचार दोहराया कि चंडीगढ़ को केंद्रशासित प्रदेश के तौर पर छोड़कर हरियाणा और पंजाब अपनी अलग अलग राजधानियां बनाएं और हाई कोर्ट की बेंचें दोनों राज्यों में हों. व्यवस्था के लिहाज़ से यह चर्चा पहले भी होती रही है.

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इस चर्चा में खास बात हमेशा यह रही है कि पंजाब हमेशा चंडीगढ़ पर हरियाणा के दावे को खारिज करता रहा है. इसके पीछे उसके अपने तर्क रहे हैं और हरियाणा के पास भी जवाब रहे हैं. आइए इस बहस को समझते हैं. सबसे पहले जानते हैं कि चंडीगढ़ की इस मौजूदा व्यवस्था की शुरूआत कैसे हुई थी.

आखिर क्यों बना था चंडीगढ़?
देश के सबसे आधुनिक शहरों में शुमार चंडीगढ़ को लाहौर के स्थान पर एक शहर के तौर पर विकसित किया गया था क्योंकि विभाजन से पहले पंजाब की राजधानी लाहौर हुआ करती थी. विभाजन के बाद चूंकि लाहौर पाकिस्तान का हिस्सा हो गया इसलिए मार्च 1948 में भारत के पंजाब के लिए केंद्र सरकार ने शिवालिक की पहाड़ियों की तलछटी का इलाका नई राजधानी के लिए तय किया.

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पंजाब और हरियाणा के बीच हाई कोर्ट भी साझा है.


एक योजना के तहत बनाए और बसाए गए शहर को पंजाब की राजधानी बनाया गया और 1952 से 1966 तक यहां कोई समस्या नहीं थी, लेकिन फिर हरियाणा अलग राज्य बना और चंडीगढ़ को उसकी राजधानी के तौर पर भी रखा गया.

क्यों एक ही रही दो राज्यों की राजधानी?
जब पंजाब से अलग होकर हरियाणा अलग राज्य बना, तो चंडीगढ़ को ही एक मुफीद शहर समझा गया, जिसके पास प्रशासनिक से लेकर व्यवस्था का पूरा ढांचा मौजूद था. अपनी अनूठी खासियतों के साथ इसी शहर को दोनों राज्यों की राजधानी बनाया गया लेकिन पंजाब को यहां की संपत्तियों में 60 फीसदी हिस्सा मिला, जबकि ​हरियाणा को 40. इसके अलावा, केंद्रशासित प्रदेश के तौर पर यहां केंद्र के पास सीधा नियंत्रण रहा.

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क्या है चंडीगढ़ पर पंजाब का दावा?
अलग राज्य बनने के वक्त देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कहा था कि कुछ समय के लिए चंडीगढ़ साझा राजधानी रहेगी और बाद में पंजाब को मिल जाएगी. 29 जनवरी 1970 के एक दस्तावेज़ के आधार पर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बारे में हरियाणा को लिखित तौर पर सूचित किया गया था कि 'दो राज्यों के दावे के चलते चंडीगढ़ का कैपिटल प्रोजेक्ट एरिया पूरी तरह पंजाब के खाते में जाएगा.'

इसके बाद, फिर 1985 में राजीव-लोंगोवाल समझौते के तहत चंडीगढ़ को पंजाब के सुपुर्द किए जाने की पूरी प्रोसेस हो चुकी थी, लेकिन 26 जनवरी 1986 को राजीव गांधी सरकार ने ऐन वक्त पर हाथ खींच लिये और चंडीगढ़ के पंजाब के पास जाने की पूरी कवायद धरी रह गई.


क्या हैं ​हरियाणा के तर्क?
हरियाणा को स्थापना के वक्त पांच साल का समय दिया गया था कि वो अपनी राजधानी बना ले. नई राजधानी के लिए केंद्र ने 10 करोड़ रुपये की ग्रांट और इतने ही लोन का प्रस्ताव भी दिया था. एक तरीका यह भी सोचा गया था कि चंडीगढ़ को दोनों राज्यों के बीच आधा आधा बांट दिया जाए, लेकिन यह व्यावहारिक नहीं था. कुल मिलाकर दो पाटों के बीच चंडीगढ़ पिसता ही रहा.

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चलती रहती है राज्यों की खटपट?
अब चंडीगढ़ देश के भीतर ही 'सीमा विवाद' का क्षेत्र जैसा हो गया है. दोनों राज्य यहां अधिकार जमाने के लिए उलझते रहते हैं. उदाहरण के तौर पर, 2018 में हरियाणा सीएम ने चंडीगढ़ के विकास के लिए एक विशेष बॉडी बनाई तो पंजाब के सीएम इसे यह कहकर खारिज कर दिया कि 'चंडीगढ़ अविवादित रूप से पंजाब का हिस्सा है.' दूसरी तरफ, विधानसभा भवन भी पंजाब के अधिकार में है, तो हरियाणा वहां अपने लिए 20 कमरों की मांग करता रहा है.
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