संघ क्यों मानता है दारा शिकोह को अच्छा मुसलमान

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Updated: September 12, 2019, 3:27 PM IST
संघ क्यों मानता है दारा शिकोह को अच्छा मुसलमान
दारा शिकोह की छवि को मुसलमानों के बीच प्रचारित करना संघ के एजेंडे में है

आरएसएस (RSS) मुगल शासक शाहजहां (Shahjahan) के सबसे बड़े बेटे दारा शिकोह (Dara Shikoh) को अच्छा मुसलमान (good muslim) मानता है. औरंगजेब की क्रूरता से तुलना कर संघ हमेशा मुसलमानों के बीच दारा शिकोह की छवि को प्रचारित करती रही है. आखिर इसके पीछे क्या वजह है...

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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (Aligarh Muslim University) ने केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय को दारा शिकोह (Dara Shikoh) की जीवनी को इतिहास की किताबों में शामिल करने का प्रपोजल दिया है. दिल्ली में हुई एक गोष्ठी में बाकायदा इसका ऐलान हुआ. इस गोष्ठी में अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और आरएसएस (RSS) नेता कृष्ण गोपाल भी शामिल थे. गोष्ठी में बोलते हुए आरएसएस के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल ने दारा शिकोह को अच्छा मुसलमान बताया.

बीजेपी और आरएसएस मुगल शासक शाहजहां के बड़े बेटे दारा शिकोह की कई मौकों पर तारीफ कर चुकी है. दरअसल बीजेपी और आरएसएस मुस्लिम समुदाय के बीच दारा शिकोह को एक अच्छे मुसलमान (good muslim) के तौर पर प्रस्तुत करती है.

ये एक ऐतिहासिक तथ्य है कि जहां औरंगजेब ने हिंदू धर्म और उसकी परंपराओं, मान्यताओं को नष्ट करने का काम किया, वहीं उसके भाई दारा शिकोह ने हमेशा सर्वधर्म समभाव की बात कही. दारा शिकोह धार्मिक सहिष्णुता और धर्म निरपेक्षता का हिमायती रहा. बीजेपी और आरएसएस उसकी इसी छवि को मुसलमानों के बीच ज्यादा से ज्यादा प्रचारित करना चाहती है.

आरएसएस के एजेंडे में है दारा शिकोह की छवि का प्रचार

दारा शिकोह को अच्छे मुसलमान के रूप में प्रचारित करना संघ का एजेंडा रहा है. इसी कड़ी में 2017 में दिल्ली की डलहौजी रोड का नाम बदलकर दारा शिकोह कर दिया गया. इसके पहले 2016 में दारा के बड़े भाई औरंगजेब के नाम पर रखी गई औरंगजेब रोड को बदलकर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम रोड कर दिया गया.

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मुगल शासक शाहजहां का सबसे बड़ा बेटा था दारा शिकोह


आरएसएस औरंगजेब बनाम दारा शिकोह की बहस के जरिए एक उदाहरण प्रस्तुत करती है. कट्टरता बनाम सहिष्णुता की इस बहस में सहिष्णुता को तवज्जो देने की कोशिश की जाती है. संघ चाहता है कि देश के मुसलमान खुद को दारा शिकोह के विचार और परंपरा से जोड़ें और उसी तरह से आचार व्यवहार करें. इसलिए दारा शिकोह की छवि को बार-बार मुसलमानों को बीच प्रचारित किया जाता है.
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क्यों दारा शिकोह था एक अच्छा मुसलमान?
मुगल शासक शाहजहां के चार बेटे थे. उनमें दारा शिकोह उन्हें सबसे प्रिय था. वो बाकी बेटों से उसे ज्यादा प्यार और तवज्जो देते थे. इसी ने भाई-भाई के बीच नफरत के बीज बोए. बाद में सल्तनत पर कब्जे की जंग ने इसे और बढ़ा दिया. औरंगजेब ने सत्ता के लिए पहले अपने ही भाई से युद्ध लड़ा. दारा शिकोह को परास्त कर उसे बंदी बनाया और एक दिन अपने ही गुलाम से उसकी हत्या करवा दी.

दारा शिकोह विद्वान था. वो भारतीय उपनिषद और भारतीय दर्शन की अच्छी जानकारी रखता था. इतिहासकार बताते हैं कि वो विनम्र और उदार ह्दय का था.

आरएसएस नेता कृष्ण गोपाल का मानना है कि दारा शिकोह सही मायने में असली मुसलमान था, जिसने एक अच्छा हिंदुस्तानी बनने की कोशिश की. कृष्ण गोपाल कहते हैं, ‘दारा शिकोह के पिता ने समझ लिया था कि उसके बेटे ने हिंदुस्तान को जान लिया है और वो शासन चलाने के लिए बेहतर साबित होगा लेकिन औरंगजेब ने बवाल खड़ा किया. औरंगजेब को लगा कि अगर दारा शिकोह सफल रहता है तो इस्लाम खतरे में आ जाएगा.’

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औरंगजेब


इतिहास में दारा की क्रूरता के भी उदाहरण
इतिहास के जानकार बताते हैं कि 17वीं सदी में एक फ्रांसीसी चिकित्सक फैंक्विस बर्नियर भारत आए थे. वो शाहजहां के शासनकाल में लंबे समय तक रहे थे. फैंक्विस कुछ वक्त के लिए दाराशिकोह के निजी चिकित्सक भी रहे थे. बर्नियर ने लिखा है कि दारा लोगों को प्रभावित करने में उस्ताद था. वह ईसाइयों में ईसाई और हिंदुओं में हिंदू बन जाता था.

हालांकि कुछ चालाक पंडित दारा की इस कमजोरी का फायदा भी उठाते थे. वो दारा से खूब इनाम इकराम लूटते थे. इतिहासकार कहते हैं कि दारा ने बुजी नामक एक पादरी से लंबे समय तक शिक्षा ली थी. उसके तोपखाने के कुछ नौकर ईसाई थे. दारा शिकोह उनके सामने ऐसे पेश आता था, मानो वह ईसाई हो. हिंदू सैनिकों के सामने वह हिंदू बना रहता था.

हालांकि इतिहास में दारा को क्रूर और लंपट मानने के उदाहरण भी हैं. कहा जाता है कि दारा के हरम में बहुत सारी पत्नियां थीं. बादशाह शाहजहां की आंखों में हमेशा चमकते रहने के लिए उसने कुछ अच्छे लोगों को मरवा दिया. कहा जाता है कि दारा की वजह से ही वजीर सआदुल्ला खां मारा गया. दारा शिकोह को लगता था कि वजीर सआदुल्ला खां शाहजहां के बाद तख्त का वारिस बन सकता है. उसने धोखे से शाहजहां के हाथों ही वजीर का वध करवा दिया.

बादशाह शाहजहां जब बीमार हुआ तो दारा दिल्ली का दरबार संभाल रहा था. बीमार बादशाह से उसने अपने किसी भाई को मिलने नहीं दिया. बादशाह के बाकी बेटे अपने पिता से मिलने दिल्ली चढ़ आए तो दारा ने उनके खिलाफ जंग छेड़ दी. इसी जंग में दारा शिकोह औरंगजेब के हाथों हार गया. बाद में औरंगजेब ने अपने गुलाम के हाथों दारा शिकोह की हत्या करवा दी.

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First published: September 12, 2019, 2:45 PM IST
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