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हिमाचल के विधायकों के वेतन भत्ते क्यों गुजरात के एमएलए से ज्यादा

हिमाचल प्रदेश का विधानसभा भवन (फोटो himachal govt)

हिमाचल प्रदेश का विधानसभा भवन (फोटो himachal govt)

गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनावों के परिणाम आ चुके हैं. गुजरात में अगर बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिला है तो हिम ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस ने मारी बाजी लेकिन क्या मालूम है उनके विधायकों का वेतन
करीब 04 साल पहले गुजरात और हिमाचल दोनों ही जगहों पर बढ़ा है विधायकों का वेतन
अलग अलग राज्यों में विधायकों से लेकर मंत्रियों के वेतन में क्यों नहीं होती समानता

गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा के चुनाव हो चुके हैं. गुजरात में अगर बीजेपी प्रचंड बहुमत से जीती तो हिमाचल में कांग्रेस ने सरकार बनाने लायक बहुमत हासिल कर लिया. क्या आपको मालूम है कि गुजरात में चुने हुए विधायकों के वेतन और भत्ते हिमाचल प्रदेश के समकक्ष नेताओं से कम हैं. वैसे ये बात सही है कि देश में हर राज्य में विधायकों के वेतन और भत्तों में अंतर तो है.

वैसे दोनों राज्यों ही राज्यों में वर्ष 2017 के आसपास विधायकों के वेतन और भत्तों में बढोतरी हुई थी. इसके बाद कोरोना काल में देशभर में विधायकों और सांसदों के वेतन में कटौती हुई थी, जो अब फिर से पुरानी स्थिति में बहाल हो चुकी है.

हिमाचल में वेतन बढ़कर अब कितना
हिमाचल प्रदेश की विधानसभा 68 सदस्यीय है. अब इसमें 40 कांग्रेस और बीजेपी के 25 विधायक होंगे तो चुनावों में 03 निर्दलीय भी जीते हैं. वर्ष 2017 में हिमाचल प्रदेश की विधानसभा ने वेतन वृद्धि से संबंधित एक प्रस्ताव पेश करके इसमें बढोतरी की थी, जो वहां 22 दिसंबर 2016 से लागू हो गया.

BJP Congress

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस ने बहुमत हासिल किया है और उसकी सरकार बनेगी. हिमाचल प्रदेश उन राज्यों में शामिल है, जहां विधायकों का वेतन कई राज्यों से कहीं बेहतर है. (सांकेतिक तस्वीर)

संविधान का कौन सा आर्टिकल इजाजत देता है
संविधान के आर्टिकल 106 और आर्टिकल 195 में विधायकों और सांसदों को वेतन और परिलब्धियों का अधिकार दिया गया है. साथ ही उसमें संशोधन भी किया जा सकता है. इसी के तहत देशभर में समय समय पर राज्यों से लेकर केंद्र तक ने अपने जनप्रतिनिधियों के वेतन और भत्तों को बढ़ाया है.

क्या है बेसिक सेलरी और भत्ते
इसके अनुसार विधायकों का वेतन और भत्ते 1.32 लाख रुपए से बढ़ाकर 2.10 लाख रुपए कर दिए गए. अब जानते हैं कि इसमें उनकी बेसिक सेलरी कितनी है औऱ उन्हें भत्तों के पर क्या क्या मिलता है. पहले हिमाचल प्रदेश में विधायक की बेसिक सेलरी 30,000 रुपए थी, जिसको बढ़ाकर 55,000 कर दिया गया. साथ ही कांस्टिट्वेंसी अलाउंस को 30,000 से 90,000 कर दिया गया.

2.5 लाख रुपए की यात्रा भी फ्री
साथ ही आफिस भत्ता 10,000 से 30,000 किया गया तो कंप्युटर डाटा इंट्री आपरेटर रखने के मद में 12,000 को बढ़ाकर 15,000 कर दिया गया. इसके अलावा विधानसभा में सत्र चलने की स्थिति में दैनिक भत्ता 1500 से 1800 हो गया. सालाना ट्रेन से यात्रा के मद में भी बढोतरी की गई. इसके अनुसार हिमाचल का कोई भी विधायक सालाना 2.5 लाख रुपए तक की ट्रेन या हवाई यात्रा फ्री कर सकता है.

गुजरात में विधायकों की सेलरी में चार साल पहले बढोतरी हुई थी लेकिन उनका वेतन हिमाचल में मिलने वाले विधायकों के वेतन से कम है. (न्यूज18)

अगर सरकारी भवन में रुके तो
हिमाचल सरकार द्वारा 03 फरवरी 2020 को जारी प्रपत्र ये भी जानकारी देता है कि विधायक, मंत्री, चीफ मिनिस्टर या स्पीकर अगर हिमाचल भवन या हिमाचल सदन में रुकते हैं तो उनके लिए इसका किराया रोज का 200 रुपए होगा लेकिन अगर वो निजी यात्रा में इनमें ठहरते हैं तो ये किराया 500 रुपए होगा.

गुजरात में क्या है सेलरी और कब बढ़ी
अब आइए गुजरात के विधायकों के वेतन को देखते हैं, जो हिमाचल ये विधायकों की तुलना में कम लगता है. गुजरात में विधायकों के वेतन और भत्तों में वर्ष 2018 में बढोतरी हुई है. पहले उन्हें वेतन और भत्ते मिलाकर हर महीने 70,727 रुपए मिलते थे, अब इसे बढ़ाकर 1.16 लाख कर दिया गया है. वैसे उनकी बेसिक सेलरी 78,800 रुपए है.

विधायकों के हास्टल का किराया तो हैरान करने वाला
अब उनका सत्र चलने की स्थिति में डेली अलाउंस 200 रुपए से 1000 रुपए हो गया है तो निजी सहायक के खर्च को 3000 रुपए से बढ़ाकर 20,000 रुपए किया गया है तो टेलीफोन अलाउंस के तौर पर 7000 रुपए और स्टेशनरी खर्च के तौर पर 7000 रुपए माहवार मिलेंगे. गांधीनगर और अहमदाबाद में विधायकों के रहने के लिए हास्टल हैं, जहां वो रह सकते हैं. यहां उनका रोज के किराए के बारे में जानकर आप हैरान रह सकते हैं, ये केवल 1.25 रुपए प्रतिदिन है.

हर राज्य तय कर सकता है अपने विधायकों और मंत्रियों का वेतन
अब सवाल ये उठता है कि ऐसा क्यों है कि हिमाचल के विधायकों का वेतन और भत्ते गुजरात के समकक्ष नेताओं की तुलना में अधिक है. दरअसल इसका फैसला करना और वेतन परिलब्धियों में वृद्धि करना पूरी तरह से राज्य का विषय है, वो राज्य अपने तरीके से तय कर सकता है. इस बढोतरी के प्रस्ताव को उसको खुद ही बनाना होता है और फिर पास करना होता है. इसमें केंद्र का कोई रोल नहीं होता.

Tags: Gujarat, Gujarat Assembly Elections, Himachal, Himachal Assembly Elections, MLA

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